
भारतीय संसद में युवराज चलेगा महाराज नहीं…. क्योंकि युवराज शब्द का संबोधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं और महाराज शब्द का संबोधन कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई कर रहे हैं यह भी खुला पक्षपात भारतीय संसद में इस तरह दिखता है जैसे कि चंडीगढ़ में कार्यपालिका के एक पीठासीन अधिकारी ने मेयर के चुनाव में पारदर्शी भ्रष्टाचार किया यानी पक्षपात किया था।
ऐसे में संसद की सदन की पीठाधीश ने चेयरपर्सन का निर्णय महत्वपूर्ण हो जाता है उनके सामने दुविधा आ जाती है कि वह प्रधानमंत्री के बोले गए प्रिय वचन “युवराज” को सदन के रिकॉर्ड में रखें या गौरव गोगोई की बोले गए “महाराज” शब्द को सदन से हटाए…? फिलहाल सब कुछ पारदर्शी और उतना ही महीन जितना कि लोकतंत्र और राजतंत्र की पतली लकीर । तो देखें कि किस प्रकार से किस नेता ने क्या बोला था-
राष्ट्रपति के भाषण पर कांग्रेस के नेता गौरव जब अपनी बात रख रहे थे तो इस बीच उन्होंने संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताया और फिर कहा की लोक लोकतंत्र का मंदिर नहीं अब यह विशेष सम्राट का राज दरबार बनता जा रहा है, महाराज आते हैं और महाराज चले जाते हैं। लोकतंत्र का यह राजतंत्र एक स्थिति है जिस पर लोकसभा अध्यक्ष सहित अन्य सांसद मंत्रियों ने भी काफी हंगामा किया की संसद के अंदर इस प्रकार की भाषा शैली का उपयोग ना हो। क्योंकि नरेंद्र मोदी को महाराज बोल जाना उन्हें नहीं पच रहा था।
लेकिन बहुत जल्दी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी बात रख रहे थे तब उन्होंने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को युवराज संबोधन कहकर तंज कसाप्रधानमंत्री ने करीब डेढ़ घंटे के अपने संबोधन के दौरान कहा उन्होंने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और उन्हें ‘युवराज’ के नाम से संबोधित करते हुए उन्हें ऐसा ‘नान स्टार्टर’ बताया जो न तो ‘लिफ्ट’ हो पा रहे हैं और ना ही ‘लांच’।
नयी दिल्ली: आठ फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को देश के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सराहना करते हुए उन्हें ‘प्रेरक उदाहरण’ बताया प्रधानमंत्री ने शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद सदन की कार्यवाही में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मनमोहन सिंह की सराहना की और उनके दीर्घायु होने की भी कामना की।मनमोहन सिंह सहित उच्च सदन के 68 सदस्य फरवरी से मई महीने के बीच सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इतने लंबे अरसे तक जिस प्रकार से उन्होंने इस सदन का मार्गदर्शन किया है, देश का मार्गदर्शन किया है, वो हमेशा-हमेशा जब भी हमारे लोकतंत्र की चर्चा होगी… कुछ सदस्यों की जो चर्चा होगी, उसमें डॉ. मनमोहन सिंह की योगदान की चर्चा जरूर होगी।’’
एक घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सभी को पता था कि विजय सत्ताधारी पक्ष की होने वाली है लेकिन डॉक्टर मनमोहन सिंह जी व्हीलचेयर में आए और उन्होंने मतदान किया।उन्होंने कहा, ‘‘एक सांसद अपने दायित्व के लिए कितना सजग है, इसका वो उदाहरण थे। वो प्रेरक उदाहरण था। इतना ही नहीं मैं देख रहा था कभी समिति या समिति के सदस्यों चुनाव हुए, वह व्हीलचेयर पर वोट देने आए।’’मनमोहन सिंह देश के चौदहवें प्रधानमंत्री थे। वर्ष 2004 से 2014 तक वह देश के प्रधानमंत्री रहे। मनमोहन सिंह ने 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया जो स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में एक निर्णायक समय था।उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय में भी तीन-चार साल के बाद एक नया व्यक्तित्व बाहर निकलता है जबकि वे तो विविधताओं से भरे व अनुभव से गढ़े हुए इस विश्वविद्यालय में छह साल रहने के बाद जा रहे हैं।उन्होंने उम्मीद जताई कि वे जिस भी भूमिका में रहेंगे राष्ट्र के काम को गति देने में अपने सामर्थ्य का सदुपयोग करेंगे।
नयी दिल्ली: आठ फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग से गुजरने वाले श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर बड़े पैमाने पर हिमस्खलन हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।उन्होंने बताया कि अब तक इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

