
चुनाव आयोग ने भारतीय नागरिकों की दबाव में अथवा अपनी ऐच्छिक स्वतंत्रता में पारदर्शी होनी चाहिए प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से स्वतंत्र कर दिया है और अपने वेबसाइट में छुपा-छुपी के खेल को खत्म कर दिया जिससे शहडोल की लोकसभा क्षेत्र की वोटिंग की भी जानकारी आदिवासी क्षेत्र के निवासियों के लिए प्रकाशित हो गई है उपलब्ध शांति की जानकारी के अनुसार शहडोल लोकसभा क्षेत्र में 17 77 185 मतदाता दर्ज हैं जिसमें 1149 506 मतदाताओं ने मतदान कर भाग लिया है जिसका प्रतिशत 64.68 है इस तरह करीब एक महीना बाद यह जानकारी सार्वजनिक की गई है।
मेगसेसे अवार्ड प्राप्त पत्रकार रवीश कुमार ने अपने यूट्यूब में इसकी जानकारी दी उन्होंने दिल्ली के चुनाव पर भी रिपोर्ट किया है, जिसमें स्पष्ट किया है कि जहां चुनाव आयोग का मुख्यालय है वहां पर खुलेआम राम के नाम अयोध्या के मंदिर के निर्मित मूर्ति राम की फोटो लगाकर पर मतदान दिन में मतदान स्थल के आसपास वोट मांगे गए हैं. और यह काम बहुत पारदर्शी तरीके से दिल्ली में होता रहा… इस तरह यह बात भी प्रमाणित हो गई है की पूर्व निर्वाचन आयुक्त टी एन सेशन ने निर्वाचन आयोग को और उसके निष्पक्षता को जिन असीम ऊंचाइयां में पहुंचा था वर्तमान निर्वाचन आयोग इस असीम पतन में भारतीय निर्वाचन आयोग को ला पटका है। और निर्वाचन की इस प्रक्रिया में मतदान के कार्य प्रणाली हतोत्साहित करती है. किसी भी निष्पक्ष राष्ट्र के लिए यह दुर्भाग्य जनक है देखना होगा निर्वाचन आयोग, पारदर्शी आचार संहिता के पतन पर कुछ देखता या सोचता भी है अथवा वह भी राम राज्य का सुख भोगना चाहता है..?

