
PIB Delhi झारखंड सरकार का पंचायती राज विभाग 24 दिसंबर 2024 को रांची में पेसा अधिनियम पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन करेगा। इसका उद्देश्य पंचायतों (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 ( पेसा अधिनियम ) के प्रावधानों के बारे में जागरूकता फैलाना है।
पेसा कार्यशाला में झारखंड की पंचायती राज, ग्रामीण विकास और ग्रामीण कार्य मंत्री दीपिका पांडे सिंह बीज वक्तव्य देंगी। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज भारद्वाज राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करेंगे और अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय शासन को आगे बढ़ाने में पेसा के महत्व पर प्रकाश डालेंगे तथा अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायती राज मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेंगे। पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री आलोक प्रेम नागर, झारखंड के पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव श्री विनय कुमार चौबे और झारखंड की पंचायती राज निदेशक श्रीमती नेशा उरांव भी पेसा कार्यशाला में योगदान देंगे तथा पेसा अधिनियम के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के संबंध में अपने विचार एवं मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
झारखंड के रांची में 24 दिसंबर 2024 को पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा अधिनियम) के प्रावधानों पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय कार्यशाला भारत के आदिवासी क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह अवसर अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को स्वशासन और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के साथ सशक्त बनाने वाले ऐतिहासिक कानून पेसा अधिनियम को 24 दिसंबर 1996 को लागू किए जाने की याद दिलाता है। आदिवासी समुदायों को शोषण से बचाने में इस अधिनियम की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इस अधिनियम में अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन और कामकाज के तौर-तरीकों को संरक्षित करने तथा बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया है।
उल्लेखनीय है कि झारखंड, पेसा अधिनियम के अनुरूप अपने पेसा नियमों को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुका है। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम अधिनियम के उद्देश्यों, उपलब्धियों और अनुसूचित क्षेत्रों में समुदायों के अधिकारों की रक्षा करते हुए स्थानीय शासन को सशक्त बनाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा में हितधारकों को शामिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करेगा। एक दिवसीय पेसा कार्यशाला के आयोजन की तैयारी इसके संबंध में सार्थक संवाद को सुविधाजनक बनाने और कार्रवाई योग्य परिणाम उत्पन्न करने के उद्देश्य से की गयी है जिससे लक्षित समुदायों को लाभ होगा। कार्यक्रम में अनुसूचित क्षेत्रों में शासन को मजबूत करने में पेसा की भूमिका पर विस्तार से चर्चाएँ होंगी। साथ ही पेसा की विशेषताओं और इसके प्रभाव को प्रदर्शित करने वाली एक लघु फिल्म और गीत को भी इसमें प्रस्तुत किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्य संबोधन के अतिरिक्त आदिवासी परंपराओं और शासन के तौर-तरीकों पर पैनल चर्चाएँ और आदिवासी समुदायों की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी होंगी। इसमें हितधारक पारंपरिक ग्राम सभाओं के कामकाज के तौर-तरीकों और अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को बढ़ाने के लिए पंचायत शासन के साथ उनके एकीकरण सहित महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। कार्यशाला का उद्देश्य सहयोग को बढ़ावा देना, जागरूकता बढ़ाना और पेसा अधिनियम के मजबूत कार्यान्वयन के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए एक स्पष्ट मार्ग तैयार करना है।
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) 24 दिसंबर 1996 को अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों को ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन के जरिए सशक्त बनाने के लिए लागू किया गया था। हालांकि, राज्यों के लिए अपने खास पेसा नियमों के निर्माण में देर, व्यापक प्रशिक्षण सामग्री और राज्यों के सहायक कानूनों की कमी के कारण इसके प्रभावी कार्यान्वयन को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। पंचायती राज मंत्रालय ने इन चुनौतियों का समाधान करने और पेसा अधिनियम के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए, सभी पेसा राज्यों से 24 दिसंबर 2024 को उपयुक्त गतिविधियां और कार्यक्रम आयोजित करने और गहन जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया है। अपनी तरह की इस प्रथम पहल का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पेसा अधिनियम का लाभ पहुंचाने के लिए सामूहिक और ठोस प्रयासों को मजबूत करना है। इ
2024 में जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए आयोजित प्रमुख कार्यशालाएं/सम्मेलन :पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 – जिसे व्यापक रूप से पेसा अधिनियम के रूप में जाना जाता है, के प्रावधानों के मजबूती से कार्यान्वयन के लिए 2024 में प्रमुख सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित की है। पहला क्षेत्रीय सम्मेलन 11-12 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र में पुणे के वाईएएसएचएडीए में आयोजित किया गया था जिसमें गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान शामिल थे । दूसरा क्षेत्रीय सम्मेलन 4-5 मार्च 2024 को झारखंड के रांची में हुआ, जिसमें आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना पर ध्यान केंद्रित किया गया। पेसा पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन 26 सितंबर 2024 को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित किया गया, जिसमें ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) और प्रशिक्षण पहलों को बढ़ाने के लिए पेसा-जीपीडीपी पोर्टल और सात विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च किए गए। पंचायती राज मंत्रालय ने पेसा अधिनियम पर व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया है। राज्यों को स्थानीय भाषाओं और बोलियों में इसका अनुवाद करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर पर इसकी बेहतर पहुंच और प्रभावी कार्यान्वयन हो सके।
2024 पर उपराष्ट्रपतिजगदीप धनखड़ ने चौधरी चरण सिंह पुरस्कार देते हुए कहा कलम को नीरजा जी से बेहतर कौन संभाल सकता है। विपरीत परिस्थितियों में मौके आये हैं पर वह प्रभावित नहीं हुई हैं । उन्होंने यथासंभव वस्तुनिष्ठता को बनाए रखा है और इसलिए वे पत्रकारों की श्रेणी में बहुत कम लोगों में से एक हैं, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जिसने अत्यंत सतर्कता के साथ कई अफ्रीकी देशों में लोकतंत्र सुनिश्चित किया है और जब मैं नीरजा जी जैसे किसी व्यक्तित्व को देखता हूं, जिन्हें यह महान सम्मान दिया गया है,मैं अपने स्तर पर ट्रस्टियों के साथ संपर्क में रहूंगा, इसके अलावा जो भी व्यक्ति ग्रामीण भारत के कल्याण, किसानों के कल्याण के बारे में दिल से सोचता है, चाहे वह कॉरपोरेट से हो, बुद्धिजीवियों से हो या किसी अन्य क्षेत्र से हो, उसे इस तरह के ट्रस्ट को विकसित करने के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक हमें दूसरा चौधरी चरण सिंह नहीं मिलेगा।चौधरी साहब की भावना को ध्यान में रखते हुए मैंने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है कि अभिव्यक्ति और संवाद ही लोकतंत्र को परिभाषित करते हैं। कोई राष्ट्र कितना लोकतांत्रिक हो, यह उसके व्यक्तियों और संगठनों की अभिव्यक्ति की स्थिति से निर्धारित होता है और कोई सरकार कितनी उत्तरदायी है, यह उसके संवाद की प्रकृति से निर्धारित होता है, लेकिन किसी भी लोकतंत्र की सफलता के लिए अभिव्यक्ति और संवाद दोनों ही पक्षों को बहुत जिम्मेदारी के साथ मिलकर चलना चाहिए।
मैं इस अवसर पर ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा लेकिन एक विचार आपके समक्ष रख रहा हूं,यह समय है कि हर विचारशील भारतीय अपने दिमाग को खंगाले और उन सभी लोगों के प्रति जवाबदेही की गहरी भावना जगाएं, जो दायित्वों से बंधे हैं वे कोई गलती न करें क्योंकि मैं सांसदों की बात कर रहा हूं। हमारी स्वतंत्रता और भारतीय संविधान को अपनाने की सदी के अंतिम चौथाई हिस्से में, मुझे जिस तरह का नजारा देखने को मिला है, वह चिंता का विषय होना चाहिए। मुझे लगता है कि चारों ओर कोई चिंता नहीं है। लोगों ने अव्यवस्था को व्यवस्था के रूप में लेना सीख लिया है। घृणा की कोई भावना नहीं है।मैं उम्मीद करता हूं लोगों की कलम चलेगी, लोगों के विचार लेंगे, लोग मजबूर करेंगे की आप सोचिए आप क्यों गए थे वहां ? PIB Delhi
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम एनएचआरसी के अध्यक्ष नियुक्त
नयी दिल्ली: 23 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा का एक जून को कार्यकाल पूरा होने के बाद से एनएचआरसी अध्यक्ष का पद रिक्त था।
भागवत का बयान सिर्फ गुमराह करने के लिए, संघ के इशारे पर हो रहा है मंदिर-मस्जिद: कांग्रेस
नयी दिल्ली: 23 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के एक हालिया बयान को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि उन्होंने सिर्फ समाज को गुमराह करने के लिए टिप्पणी की है क्योंकि कई स्थानों में मंदिर-मस्जिद का विवाद आरएसएस के इशारे पर ही रहा है।पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि भागवत को लगता है कि ऐसी बातों से आरएसएस के पाप धुल जाएंगे और उनकी छवि अच्छी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है।
भारत के वन क्षेत्र पर सरकार के ताजा आंकड़ों को ‘बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया’ : विशेषज्ञ
नयी दिल्ली: 23 दिसंबर (भाषा) कई पर्यावरण विशेषज्ञों ने दावा किया है कि भारत के वनों पर नवीनतम सरकारी आंकड़े ‘बढ़ा-चढ़ाकर’ पेश किए गए हैं, क्योंकि इसमें बांस के बागान, नारियल के पेड़ और बागों को वन क्षेत्र के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है।लगभग एक साल की देरी के बाद शनिवार को जारी ‘भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023’ (आईएसएफआर-2023) में कहा गया है कि 2021 से भारत का कुल वन और वृक्ष क्षेत्र 1,445 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है, जो 2023 में कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत हो गया है।

