
प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्- साम-दाम-दंड-भेद, पैगासेस ,आरएसएस, इसीआइ, विभीषण, शासन और प्रशासन ने मिलकर जिताया भाजपा को; सिर्फ 2% वोट से .
दिल्ली में जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मारी है इससे यह कहना मुश्किल है कि बाजीगर नरेंद्र मोदी और उसकी भाजपा है। बेहद पारदर्शी तरीके से दिख रहा है की जीती तो भारतीय जनता पार्टी है लेकिन खुशी कांग्रेस में भाजपा से कम नहीं है। क्योंकि उसे मालूम था वह चुनाव हारी हुई है । क्योंकि कांग्रेस भी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को चुनाव हराना चाहती थी । कोन जीता है उसे मतलब नहीं। क्योंकि ऐसा करके कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा में आप आदमी पार्टी की धत्कर्म का बदला ले लियाहै।
कहने को तो केजरीवाल इंडिया गठबंधन नामक विपक्षी खेमे में शामिल थे लेकिन हरियाणा में अपने अहंकार के कारण विपक्षी धर्म का सकारात्मक भूमिका अदा नहीं किया और कांग्रेस पार्टी को हराने में अहम भूमिका अदा की थी। इस बार दिल्ली के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने वही भूमिका “तेरा तुझको अर्पण” कहकर आम आदमी पार्टी को लौटा दिया। और आम आदमी पार्टी जीत कर चुनाव हार गई। ——-( त्रिलोकी नाथ )——
अब उसे उन्हीं चुनौतियों से जिंदा रहना होगा जिस चुनौती में कांग्रेस पार्टी देश में जीवित रह रही है इसमें कोई शक नहीं है।
अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का निर्माण लोकपाल विधेयक और भ्रष्टाचार के आंदोलन को लेकर हुआ था तब सरकार कांग्रेस पार्टी की थी। हालांकि अन्ना हजारे जो इस आंदोलन के चेहरा थे वह चाहते थे इस आंदोलन से कोई राजनीतिक दल अरविंद केजरीवाल ना बनाएं क्योंकि उनका नजरिया था कि विपक्ष की भारतीय जनता पार्टी तत्कालीन सत्ताधारी कांग्रेस के खिलाफ मजबूत बंन कर निकले। लेकिन अरविंद केजरीवाल और उनके तमाम साथियों ने बगावत कर दी और आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ। जो तीन बार दिल्ली में शासन और लगे हाथ पंजाब में भी सरकार बनाए रखी। और अब भी मजबूती के साथ वह तमाम प्रकार के राजनीतिक हथियारों के शस्त्रों का हमला झेलते हुए मजबूती से खड़े हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी 45.56% वोट परसेंट के साथ सत्ता में आई है वहीं 43.57% वोट परसेंट के साथ आज भी आम आदमी पार्टी उतनी ही मजबूती से जमीन पर है। उसे सिर्फ अपने शस्त्रों में अहंकार का मुर्चा जो लगा है उसे छुड़ाना होगा। उसे सोचने के लिए लोकतंत्र में बहुत शानदार अवसर प्रदान किया है लेकिन शुरू से ही अहंकारी स्वभाव के अरविंद केजरीवाल इसे निकल पाएंगे यह भविष्य बताएगा।
सब जानते हैं कि जैसे ही सत्ता में आम आदमी पार्टी आई तो सबसे पहले उसने अपने पार्टी के अपने अंदर वरिष्ठ बौद्धिक समुदाय से आने वाले संस्थापक प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को सत्ता के अहंकार में आकर बाहर का रास्ता दिखाया था और कुछ समय बाद विश्वसनीय कुमार विश्वास को भी पार्टी से दरकिनार कर दिया । एक अन्य दलित समाज की स्वाति मालीवाल जो आप की सांसद भी है उनसे भी वैचारिक ताल में न होने के कारण उनका अपमान किया। और स्वाति मालीवाल इस अहंकार के रावण राज्य में विभीषण के रूप में भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करती रही। यह सब बातें अंततः भारतीय जनता पार्टी के लिए विभीषिका दिवस के रूप में जीत का कारण बनी।
तो लिए एक नजर डालते हैं की कैसे भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीत कर भी नैतिकता के तराजू में आज भी हारी पार्टी है सिर्फ उसे सत्ता के जरिए यह साबित करना होगा कि वह अगला चुनाव जीत जाएगी । क्योंकि अगर अन्य परिस्थितियों और महत्वपूर्ण अरविंद केजरीवाल का अहंकार मजबूत शस्त्र के रूप में भाजपा के लिए वरदान साबित नहीं होता तो स्पष्ट तौर पर दिल्ली की सल्तनत भाजपा के लिए उतनी ही दूर है जितने की पहले उसने सत्ता को दी थी।
क्योंकि आम आदमी पार्टी भाजपा का मजबूत विकल्प बन कर निकल कर आया था। ऐसा नहीं है की अहंकार नामक यह खतरनाक शस्त्र नवोदित राजनेता अरविंद केजरीवाल की बड़ी कमजोरी हो, यही अहंकार उतना ही मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ भी जुड़ा हुआ है किंतु नरेंद्र मोदी एंड कंपनी में अहंकार को पचाने की बड़ी क्षमता है वह तत्काल तेजी से यू-टर्न लेना जानते हैं.. जिस जेडीयू के नीतीश कुमार से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए कभी खतरा हुआ करता था उसी के साथ नरेंद्र मोदी की गठबंधन फिर से हो जाना मोदी के अहंकार का सबसे बड़ा यू टर्न है।
और यह बात समय रहते अरविंद केजरीवाल ने नहीं सीखा उन्होंने न सिर्फ कांग्रेस के खिलाफ हरियाणा में गठबंधन धर्म को लात मारा बल्कि कांग्रेस को दिल्ली के चुनाव में विधानसभा के अंदर जगह न देने के लिए गठबंधन से इनकार कर दिया। जिसका परिणाम बेहद पारदर्शी तरीके से दिल्ली के चुनाव परिणाम में स्पष्ट दिखता है कि कैसे 14 विधानसभा क्षेत्र में स्पष्ट रूप से आम आदमी पार्टी व सभी चुनाव हार गई जहां कांग्रेस पार्टी के सदस्य हर कीमतों के अंतर से बहुत ज्यादा वोट पाए। यानी जो अन्य स्थान है वहां पर कांग्रेस ने जितना भी वोट पाया और जो माहौल बनाया उससे धोबी पछाड़ के तरह अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की सल्तनत से कांग्रेस ने पटक दिया। तो यह कांग्रेस पार्टी की जीत के रूप में भी देखा जाना चाहिए।।
स्पष्ट तौर पर भाजपा अंकगणित में चुनाव जीत गई है किंतु उसे किसी भी तरह इस पर गुमान नहीं करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान भाजपा मुख्यालय में सत्य प्रतीत होता है की “मूर्खता और धूर्तता” के कारण चुनाव परिणाम ऐसे आए हैं ….भाजपा को सत्ता में बने रहने के लिए बेहद कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। क्योंकि सिर्फ दो प्रतिशत वोट की जीत कोई मायने नहीं रखती हालांकि वह आगे सफलता पा सकती है। तब जब कि भाजपा ने साम-दाम-दंड-भेद, झूठ का प्रोपेगेंडा, यमुना का जहर के अलावा पेगासस, आरएसएस निर्वाचन आयोग के साथ शासन और प्रशासन का पूरा उपयोग किया; इसके अलावा राम राज्य के रावण की लंका से विभीषण को स्वाति मालीवाल के रूप में इस युद्ध की जीतने के लिए उपयोग किया… किंतु इससे वह कोई राम राज्य स्थापित नहीं कर रहे थे।
क्योंकि प्रबंधन में कुंभ में भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन बुरी तरह से फेल हुई है वह सिर्फ कुछ विशिष्ट लोगों को अपने सट्टा की समस्त प्रबंधन सौंप देती है और वह लोग कुंभ नहा लेते हैं बाकी लोग आज भी सैकड़ो किलोमीटर दूर कुंभ के अड्डे भीड़ की अराजकता से परेशान है कई कई घंटा वह परेशानी में जीने को मजबूर है यानी कुप्रबंधन भाजपा की डबल इंजन में भरपूर है ऐसे में इसका लाभ इंडिया गठबंधन कैसे उठेगा या उठाने की योग्यता भी रखता है यह भविष्य के धुंध में छुपा हुआ है ऐसा कह सकते हैं यह उतना ही पारदर्शी है जितना की प्रयागराज के कुंभ के मेले में गुमनामी में मर गए सैकड़ो लोगों की लाश हैं.. आज भी गुमनाम है। बावजूद इसके अहंकारी मुख्यमंत्री आदित्यनाथ झूठ के अहंकार में अटल रूप से खड़े हुए हैं क्योंकि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को एहसास है कि उनके आका अहंकार की इस ऊंचाई को चुनाव परिणाम से छुपा लेंगे और कुंभ में मर गए लोग इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएंगे। किंतु गीता में स्पष्ट लिखा है सत्य, राख में दबे हुए अग्नि के समान है वह कब वह कैसे साफ दिखेगी कहा नहीं जा सकता। इस तरह कह सकते हैं कि दिल्ली का चुनाव परिणाम से कुंभ में झू़सी में मर गए लोगों की लाश को छुपाया नहीं जा सकता। कह सकते हैं एआइ (आभाषी) की दुनिया मेंभारतीय जनता पार्टी चुनाव जीती नहीं है, अरविंद केजरीवाल का अहंकार चुनाव हार है… यही इस चुनाव का सत्य है। यह अलग बात है इस सत्य को प्रमाणित करने के लिए भाजपा को सिर्फ 2% वोटो के अंतर से सत्ता मिली है। अब वह इसको जीत के रूप में कैसे परिवर्तित करती है यह भविष्य बताएगा देखना । क्योंकि जो प्रत्यक्ष है उसके प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है यही वर्तमान दिल्ली की जीत का प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् है।

