गर्व से कहो हम भ्रष्टाचारी हैं; काश, हम विदेशी पॉडकास्टर होते… ( त्रिलोकी नाथ )

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गर्व से कहो हम भ्रष्टाचारी हैं…

एक पुरानी फिल्म का गाना है “बहुत दिया, देने वाले ने देने वाले ने तुझको.., आंचल ही न समाये.. तो क्या कीजै….. “ कुछ इस अंदाज में हम गौरवान्वित हो रहे हैं इन दिनों…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्ममुग्ध हैं और आत्म मुग्धता इस कदर की है की हफ्ते पर बाद भी वह बकायदे एक अति सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्य की तरह एक विदेशी संवादकर्ता जिसे पॉडकास्टर कहा जाता हैPM Modi Podcast: PM मोदी का अनोखा पॉडकास्ट, अमेरिकी पॉडकास्ट फ्रिडमैन ने इंटरव्यू के लिए किया 45 घंटे का उपवास | PM Modi Podcast: American podcaster Lex Fridman fasted for 45 hours उसकी चर्चा को कई भाषाओं में अनुवाद करा कर प्रधानमंत्री मोदी इसे अति महत्वपूर्ण कार्य की तरह लोगों को अपने सूचना तंत्र के जरिए सूचित कर रहे हैं कि  ..इसको जरूर सुने…। इसमें मुझे गर्व होता है.. लेकिन मुझे यह समझने में या कहना चाहिए गर्व करने में बड़ा भ्रम पैदा हो रहा है अथवा बहुत बड़ा विरोधाभास पैदा हो रहा है किमैं मध्य प्रदेश के उस जंगल में गर्व करूं जहां मामूली सा सिपाही का तथाकथित करोड़ों रुपए एक कार में सुनसान जगह जंगल में मिलता है कुछ किलो सोना कुछ कुंतल चांदी भी मिल जाता है और उसका कोई दावेदार सामने नहीं आता, हालांकि मध्यप्रदेश की पुलिस सतर्क है और वह इस पुलिस वाले सौरभ नामक करोड़पति या अरबपति जो कहें उसे पर एक तथाकथित आरोप जड़कर कार्रवाई कर रही है। पद के हिसाब से छोटा सा सिपाही…. यह सोचकर गर्व करने की इच्छा करता है की कितनी योग्यता रखता है काश हम ऐसे होते…?
                                              ( त्रिलोकी नाथ )
इस व्यक्ति की तरह लेकिन जब दिल्ली की राजधानी में न्यायालय का न्यायमूर्ति जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में करोड़ों रुपए के कहते हैं करीब 6 बोरा नोटों के भरे बंडल आग से जल गए Justice Yashwant Varma News: दिल्ली HC के जज के घर से मिले करोड़ों के कैश, सज़ा हैरान करने वाली | CJI - YouTubeचर्चित तौर पर 14 मार्च को यह घटना घटी थी और इस घटना का भी कोई दावेदार खड़ा नहीं हो रहा है,  ठीक सिपाही सौरभ जी की तरह जस्टिस यशवंत जी पर इसलिए आरोप लग रहे हैं। क्योंकि वह उनके घर था सरकारी बंगला था कथित तौर पर 15 करोड रुपए नोटों के जलते हुए बंडल को वहां की फायर ब्रिगेड संस्था वीडियो में हटाते हुए जलते से ठीक हुए नोटों को दिखाई देती है। टुकड़े-टुकड़े गैंग की तरह यह वीडियो सामने आए।
तो फिर मन इस पर गर्व करने की हिम्मत दिखता है क्योंकि वीडियो सामने आने के बाद फायर ब्रिगेड के मुखिया, दिल्ली के कहते हैं कि नहीं यह सब गलत है। फिर बाद में कहते हैं मैंने जो कहा वह गलत है उसे गलत समझा गया.. आदि आदि…तो फिर इसमें गर्व करने की इच्छा पडती है।
कितना पारदर्शी दिल्ली का प्रशासन, कितनी ईमानदारी से सब चीज तय कर रहा है इस तरह इन तथाकथित वीडियो में जलते हुए नोटों को बंडलो को गायब किया जा रहा है.. अब तो खबर यह है की नोट के बंडल है भी या नहीं या यह वीडियो क्लिप एनीमेटेड थी बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है वह कोई जांच-फांच करावेगी.
जैसे हमारे संत मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जो  गोरखपुर का पीठाधीश कहते हैं पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ और सच्चाई से प्रेस वार्ता में आकर कह दिया कि महाकुंभ प्रयागराज में 144 साल वाला में जो झूंसी में आम श्रद्धालुओं की भगदड़ मेंपचासों लोग दब कर मरे थे दर असल व वीडियो उनकी सच्चाई की परख में सामने नहीं आया। कुछ ऐसी सोच के साथ उन्होंने अपनी बात रखी थी। और सिर्फ संगम में करने वाले करीब 30 लोगों को 25-25 लाख राहत देने की बात कर दी।
तो स्वाभाविक है जो झूंसी में गंगा के किनारे संगम में ही भगदड़ में मर गए या फिर संगम में ही अन्य घटनाओं में मर गए उनकी लाशें सिर्फ वीडियो क्लिप तक सीमित रह गई जैसी फिल्मों में दिखाया जाता है। तो हो सकता है जिन्हें मरता दिखाई दिया गया है वह सब एक वीडियो फिल्में की तरह पॉडकास्ट किया गया हो…
जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका से आकर एक पाडकास्टर (संवादकर्ता) ने, मीडियाकर्ता या पत्रकार या चर्चाकर्ता अथवा भविष्य में कोई नए शब्दों में बताएं जाने वाले संज्ञा में उसे पहचाना; वह योग्यता सिर्फ विदेश से आयातित उस व्यक्ति में सुनिश्चित थे.. “मेक इन इंडिया” वाले इस देश का शेर लगता है उसे वक्त सो रहा था. इसलिए वह देश के 140 करोड़ भारतीय नागरिकों में एक में भी ऐसी योग्यता पैदा नहीं किया की 45 घंटे तक भूखे रहने के बाद वह देश के नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री से संवाद करने की हिम्मत जुटा पाए… यह सोचकर भी गर्व करने का मन करता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेने वाले Lex Fridman कितने हैं अमीर? – TV9 Bharatvarsh

कि मैं अमेरिका जाकर इस शैक्षणिक दार्शनिक आध्यात्मिक योग्यता को आखिर क्यों नहीं स्वीकार कर पाया अब तो नरेंद्र मोदी के प्यारे-दुश्मन डोनाल्ड ट्रंप विदेशियों को अपने ही जहाज में भारतीयों को कचरे की तरह भरकर अपमानित करके भारत में फेंक रहे हैं फिलहाल बंद है। अन्यथा हम भी किसी कबूतर-बाजी में उड़कर अमेरिका पहुंच जाते और निश्चित तौर पर 45 घंटा उपवास रखने के बाद यह योग्यता अवश्य धारण करते ताकि हफ्ते भर बाद भी देश के प्रधानमंत्री को याद रहता की विदेशी पॉडकास्टर जैसी योग्यता हमें भी थी.. यह मुंगेरीलाल का सपना हमें दिखे पड़ा… बहरहाल वह एक दिल की कसक है हम इसमें गर्व न कर पाएंगे..

लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि भारत में रहकर बिल्कुल रियल स्टोरी की तरह चलने वाले वीडियो क्लिप चाहे वह प्रयागराज के महाकुंभ में भगदड़ में मरने वाले पचासों लोगों की लाशों को गलत बता देना हो अथवा दिल्ली के अंदर ही हमारी न्यायपालिका के एक न्यायमूर्ति के घर में करोड़ों रुपए के जले हुए बंडलों को रियल स्टोरी की तरह दिखा देना और उससे ज्यादा एक मामूली से सिपाही का मध्य प्रदेश में कई किलो सोना कुंडलों चांदी और करोड़ों रुपए से भरी कार का जंगल में मिल जाना और उसके दावेदार ना आ जाना यह सब किसी रियल स्टोरी की तरह भारत में ही संभव है….। क्योंकि यह एक पारदर्शी ईमानदार शासन प्रणाली है।    व्यापमं: सरकार ने बताया ऐसे मरे 34 - BBC News हिंदी  कुछ इस तरह जिस तरह मध्य प्रदेश में व्यापम के घोटाले में पचासों लोग मर गए और चूं से चां तक नहीं हुआ। ऐसा नहीं है की मध्य प्रदेश में पत्रकार नहीं है अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में लाखों लड़के पत्रकार बनकर निकलते हैं क्या एक भी लड़का इतना योग्य नहीं था जो पत्रकार बन सके… कि वह व्यापम का घोटाला पारदर्शी तरीके से प्रमाणित कर सके इसका मतलब पत्रकारिता में यह पढ़ाया नहीं जाता…? लड़के में योग्यता नहीं थी ऐसा नहीं कहना चाहिए।
अब क्योंकि हमारी भारतीय जनता वोट देकर इसमें न्याय करती ही रहती है क्या फर्क पड़ता है अगर मणिपुर में भारत की दो दो अलग जातियां सांप्रदायिक गृहयुद्ध में कटती-मरती रहती हैं सालों इस पर नहीं सोचा जाता, अभी भी प्रधानमंत्री जी की प्राथमिकता में शायद मणिपुर नहीं है, क्योंकि वह वहां नहीं गए।
किंतु उन्हें इस बात की चिंता है भारत के 140 करोड़ प्रिय जनताजनार्दन के एक-एक मन में इस गर्व का अनुमान होना चाहिए की विदेशी पाडकास्टर ने कितनी आध्यात्मिक ऊंचाइयां के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा की है। उससे भारत का मोक्ष भी संभव है। शायद इसीलिए उन्होंने कहा एक हफ्ते बाद कि इसे जरूर सुनना चाहिए….।
आपको भी सुनना चाहिए. नहीं तो शिवराज मामा का डांस… ♥️ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेटे की शादी में पत्नी साधना के साथ किया डांस पुत्र की शादी की आपको बहुत ...फिर व्यापम घोटाले के शिवराज की परिवार की शादी में डांस देखना चाहिए.., वीडियो क्लिप में जो किसी अंबानी के विवाह वाली रियल स्टोरी की तरह दिखते हैं… अथवा मंत्रिमंडल से हटा दिए गए हमारेट्रेन से बारात, बाहुबली जैसा सेट और सितारों का जमघट... MLA बेटे की रॉयल  वेडिंग देख याद आएगी 'अंबानी की शादी' - mla sanjay pathak son yash royal  wedding remind you of संजय पंडित जी की शादी के डांस ठीक रियल स्टोरी की तरह उन्हें भी देखना चाहिए क्योंकिAnant-Radhika Wedding: अनंत की हुईं राधिका... तस्वीरों में देखें 7 महीने चली मेगा वेडिंग की एक-एक झलक - News AajTak मुकेशअंबानी ने जो शादी में समझ में करोड़ों रुपए वैवाहिक कार्यक्रम में आग लगाकर इस गरीब देश में कर्ज में डूबे देश में महिनो शादी समारोह में फिजूल खर्ची को मॉडल बनाने का काम किया या नमूना प्रस्तुत किया उसके अनुरूप अब  नेता भी ऐसे ही वीडियो क्लिप अपने लड़कों की शादी में या लड़कियों की शादी में एआइ से बनवाकर वीडियो क्लिप जारी कर सकते हैं ।
उसमें नाचना भी नहीं पड़ेगा सब काम एआइ कर लेगा लेकिन एलन मस्क को जो अमेरिकी प्रधानमंत्री ट्रंप का इस तरह खास है जैसे अदानी भारत में खास है, कोई यह सब रास नहीं आ रहा है। इसलिए वह भारतीय न्यायपालिका में अभिव्यक्ति की आजादी के लिए किसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की तरह है याचिका लगा दिया है, क्योंकि लोकतंत्र की आजादी की आज की धड़क लिए 140 करोड़ भारतीय नागरिकों में किसी में यह योग्यता नहीं थी ठीक उसे पाडकास्टर की तरह जिसकी योग्यता को प्रमाणित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक हफ्ते बाद कहा इसे जरूर सुनना चाहिए।
तो अब यह समझ नहीं आता गर्व किसमें करें पारदर्शी भ्रष्टाचार में गर्व करें पारदर्शी हत्या करने में गर्व करें या फिर बेमानी पूर्ण तरीके से भ्रष्टाचार को पारदर्शिता के साथ प्रायोजित करने का गर्व करें …क्योंकि हमें गर्व करना चाहिए क्योंकि हम भारतीय हैं….।
लेकिन जलते हुए नोटों के बंडल में गांधी के इस युग में “छावा” पर ज्यादा गर्व करने की इच्छा पडती है क्योंकि शेर का छावा है पंजा तो मरेगा ही.. History Of Aurangzeb: औरंगजेब.. इतिहास के सबसे क्रूर बादशाह की कहानी | Chhaava | Roots Of Bharat - YouTubeएक पंजे से ही औरंगज़ेब दो लोगों को गर्व करने की ताकत खड़ी कर दिया है.. एक तो शिवाजी महाराज को और दूसरा उनके पुत्र संभाजी महाराज को, नहीं तो हम तो संभाजी को पहचानते ही नहीं थे..? क्योंकि इतना ज्ञान नहीं था. क्योंकि हम उत्तर भारतीय हैं हमें फुर्सत कहां है पारदर्शी भ्रष्टाचार के इस प्रशासनिक प्रणाली में कि यह सुनिश्चित करें कि हम भारतीय होने पर गर्व करें या अमेरिकी होने पर गर्व करें ….
क्योंकि जो घटनाएं घट रही हैं उसमें प्रधानमंत्री ही कह रहे हैं इस विदेशी पॉडकास्टर को जरूर सुने…।
लेकिन हमारा मन आदिवासी क्षेत्र शहडोल का है वह देख रहा है की वार्ड नंबर 20 और 21 के बीच में जो कुछगज भर की सड़क बन रही है उस पर जो भ्रष्टाचार हो रहा है उसे जो पारदर्शी तरीके के साथ नहीं बनाया जा रहा है तो हम गर्व कैसे करेंगे…? क्योंकि नालियां तो बन ही नहीं रही हैं. तो पानी तो सड़क से ही जाएगा..।
तो नाली पर गर्व करेंगे बरसात में या सड़क पर गर्व करेंगे…? की सड़क ही नाली बन गई है.. आम नागरिकों का क्या है वह पिछले 20 साल से भाजपा के रामराज्य में जी रहे हैं पहली बार एक्सीडेंटल कांग्रेसी अध्यक्ष है अतः नागरिकों को प्रताड़ित होने पर गर्व करना ही चाहिए। आखिर शहडोल बनने के बाद अब तक तो यह सड़क में प्रताड़ित हुए ही हैं.. कुछ दिन मनीषा जी के नाम पर क्यों ना प्रताड़ित हुआ जाए.. आखिर महिलाओं को भी गर्व करने का हक होना चाहिए यह अलग बात है कि एक घर डायन भी छोड़ती है हमारी दकियानूशी सोच की विचार का एक मुहावरा था। क्योंकि इन्हीं वार्ड में जिला कांग्रेस अध्यक्ष जो स्वयं को सिविल इंजीनियर भी कहते हैं वह इस बनते हुए कुछगज भर की सड़क को हमेशा चुपचाप मा रहकर देखेंगे.. क्योंकि सबसे छोटा शहडोल का वार्ड नंबर 21 वार्ड है.. इसलिए देखना पड़ेगा आते जाते। वार्ड नंबर 20 जो कथित तौर पर इस सड़क के बनने का जिम्मेदार है उसका पार्षद फिलहाल शहडोल के लिए प्रधानमंत्री के विदेशी पॉडकास्टर से कमजोर नहीं है.. इसलिए सड़क के भ्रष्टाचार के लिए उसे हम दोष नहीं देंगे.. क्योंकि दोस्त भी एक योग्यता है.. हमें यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा इस सड़क के भ्रष्टाचार के लिए हम कितने प्रतिशत गर्व करेंगे…?
फिलहाल उनके मित्र जो मुंबई में रहते हैं मुकेश अंबानी, उनकी शहडोल में कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज जो चल रही है 2009 से आज तक गैस उत्पादन का अनुबंध भी नहीं की है अवैध रूप से चल रही है.. यह इसी आदिवासी क्षेत्र शहडोल में हो सकता है इसलिए तो उसे पर गर्व करने की ज्यादा इच्छा होती है…

लेकिन गर्व टूट भी सकता है क्योंकि दिल्ली में विभिन्न सचिवालय स्तर पर मंथन जोर से चल रहा है अनुबंध के छूट में भी चर्चा चल रही है क्यों कि वह आदिवासी क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। गैस उत्खनन महंगा उत्पादन है इसलिए अंबानी जी की गरीबी पर राहत दी जाए। ठीक वैसे जैसे ओरिएंट पेपर मिलकर बिरला जी को दी गई है कथित तौर पर। काश ऐसे गरीब हम भी होती है… यह सोचकर मन राष्ट्रवादी होकर गर्व करने लगता है, और नाचने लगता है कि वह एक देसी प्रोडक्ट है विदेशी नहीं है…ऐसी देसी भ्रष्टाचार को गर्व करना ही चाहिए तो सिपाही से लेकर न्यायमूर्ति तक और प्रयागराज की हत्या से लेकर नई दिल्ली भगदड़ रेलवे स्टेशन की हत्या तक कहीं भी कोई भी एनीमेटेड वीडियो क्लिप बनाई जा सकती है. इसलिए वीडियो क्लिप में विश्वास मत करिए हम पारदर्शी शासन प्रणाली के हिस्सा है.. हमें गर्व करते रहना चाहिए और कोई बात नहीं है…


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