
रील देखने की लत दिमाग ही नहीं ‘खराब’ कर रही, आंखों को भी बीमार कर रहीनयी दिल्ली: दो अप्रैल (भाषा) चिकित्सक पहले ही एक-दो मिनट की रील (वीडियो)देखने की लत से दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंता जता चुके हैं लेकिन अब उन्होंने इसके आंखों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को लेकर चेतावनी दी है।चिकित्सकों का कहना है कि बहुत अधिक समय स्क्रीन पर व्यतीत करने से विशेष तौर पर इंस्टाग्राम, टिकटॉक, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया मंचों पर लगातार रील देखने से सभी आयु समूहों में, खासतौर पर बच्चों और युवाओं में आंखों की समस्या में वृद्धि हो रही है।
विवादास्पद वक्फ विधेयक लोकसभा में पेश; रिजिजू ने कहा कि यह धर्म से नहीं, बल्कि संपत्तियों से संबंधित है
नई दिल्ली: 2 अप्रैल /
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के कामकाज में सुधार, जटिलताओं को दूर करना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और प्रौद्योगिकी-संचालित प्रबंधन शुरू करना है।विधेयक को पेश करते हुए, जिसकी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा जांच की गई और फिर से मसौदा तैयार किया गया,
रिजिजू ने कहा कि कानून का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह केवल संपत्तियों से संबंधित है।रिजिजू ने कहा “सरकार किसी भी धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप नहीं करने जा रही है। यूपीए सरकार द्वारा वक्फ कानून में किए गए बदलावों ने इसे अन्य कानूनों पर हावी कर दिया, इसलिए नए संशोधनों की आवश्यकता थी,” रिजिजू ने विपक्ष के शोरगुल के बीच कहा, “आपने (विपक्ष ने) लोगों को उन मुद्दों पर गुमराह करने की कोशिश की जो वक्फ विधेयक का हिस्सा नहीं हैं।”मंत्री ने कहा कि जेपीसी को भौतिक और ऑनलाइन प्रारूपों के माध्यम से 97.27 लाख से अधिक याचिकाएँ और ज्ञापन प्राप्त हुए कहा कि 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों के अलावा 284 प्रतिनिधिमंडलों ने विधेयक पर अपने विचार प्रस्तुत किए।और जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले उनमें से प्रत्येक का अध्ययन किया
उन्होंने कहा, “रेलवे और रक्षा के बाद देश में संपत्तियों के तीसरे सबसे बड़े पूल को वक्फ नियंत्रित कर रहा है। रेलवे और रक्षा संपत्तियां राष्ट्र की हैं, लेकिन वक्फ संपत्तियां निजी प्रकृति की हैं। रेलवे और सशस्त्र बलों के भूमि बैंकों के साथ उनकी तुलना करना अनुचित है।” मंत्री ने आगे आरोप लगाया कि 70 वर्षों तक वोट बैंक की राजनीति के लिए आम मुसलमानों को गुमराह किया गया, क्योंकि इतने बड़े भूमि बैंक से उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। रिजिजू ने कहा, “वक्फ संपत्तियों का इस्तेमाल आम, गरीब और वंचित मुसलमानों के लाभ और कल्याण के लिए क्यों नहीं किया जाता? इन संपत्तियों का इस्तेमाल आम मुसलमानों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि 2004 तक वक्फ के पास कुल 4.9 लाख संपत्तियां थीं और उनकी आय सिर्फ 163 करोड़ रुपये थी। मंत्री ने कहा कि 2013 के संशोधन के बाद आय सिर्फ 3 करोड़ रुपये बढ़कर 166 करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने कहा, “हम इतनी बड़ी संपत्ति बैंक से इतनी कम आय स्वीकार नहीं कर सकते। आय कम से कम 12,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी। वक्फ संपत्ति का इस्तेमाल गरीब मुसलमानों के लिए किया जाना चाहिए और इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वक्फ विधेयक की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि यह कानून भविष्य के लिए होगा, न कि पूर्वव्यापी और इससे किसी की संपत्ति नहीं छीनी जाएगी। रिजिजू ने कहा कि जब 2019 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम लागू किया गया था, तो विपक्ष ने दावा किया था कि मुसलमानों के अधिकार छीन लिए जाएंगे और उनकी नागरिकता के अधिकार छीन लिए जाएंगे। उन्होंने कहा, “अब मुझे बताएं कि सीएए लागू होने के बाद से कितने मुसलमानों के नागरिकता अधिकार छीने गए? एक भी नहीं। सीएए पर लोगों को गुमराह करने के लिए आपको माफी मांगनी चाहिए। देश सदियों तक याद रखेगा कि कौन वक्फ बिल का समर्थन कर रहा है और कौन विरोध कर रहा है।” मंत्री ने यह भी कहा कि वक्फ बिल का नाम बदलकर एकीकृत वक्फ प्रबंधन सशक्तीकरण, दक्षता और विकास (यूएमईईडी) विधेयक रखा जाएगा। रिजिजू ने कहा कि अभी तक कुल वक्फ संपत्तियों की संख्या लगभग 8.72 लाख है और अगर उनका कुशलतापूर्वक प्रबंधन किया जाता, तो न केवल मुसलमानों, बल्कि पूरे देश की किस्मत बदल जाती। उन्होंने कहा, “आप एक साल के भीतर ही परिवर्तनकारी प्रभाव देखेंगे। एक नई सुबह आएगी। यही कारण है कि आम मुसलमान पूरे दिल से इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं।” राज्य सरकारों को दी जाने वाली शक्तियों का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड की नियुक्ति राज्य करेंगे। मंत्री ने कहा, “राज्य सरकारों के पास पूर्ण अधिकार होंगे क्योंकि भूमि राज्य का विषय है। बोर्ड पूरी तरह से राज्य सरकारों के अधीन होंगे और केंद्र सरकार का उन पर कोई नियंत्रण नहीं होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक में एक विशेष प्रावधान शामिल किया गया है कि आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता।
मंत्री ने मूल अधिनियम की धारा 40 को “सबसे कठोर” बताया, जो वक्फ बोर्ड को यह जांच करने और निर्णय लेने का अधिकार देती है कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं। रिजिजू ने कहा कि पहले के कानून के “दुरुपयोग” के कई उदाहरण हैं, उन्होंने हरियाणा में एक गुरुद्वारे का उदाहरण दिया जिसे वक्फ घोषित किया गया था, और केरल में 600 परिवारों की संपत्ति भी वही घोषित की गई थी। उन्होंने कहा, “यही कारण है कि ईसाई समूहों सहित कई संगठनों ने अधिनियम के तत्काल कार्यान्वयन की मांग की है।” उन्होंने कहा कि सीमा अधिनियम, 1963 अब वक्फ संपत्ति के दावों पर लागू होगा, जिससे लंबी मुकदमेबाजी कम होगी। रिजिजू ने सदन में विचार और पारित करने के लिए एक और विधेयक – मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 भी पेश किया।
कांग्रेस के समय संसदीय समितियां केवल ठप्पा लगाती थीं, आज चर्चा करके परिवर्तन करती हैं: अमित शाहनयी दिल्ली: दो अप्रैल (भाषा) वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति के विचार-विमर्श करने की पृष्ठभूमि में गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय संसद की समितियां केवल ठप्पा लगाती थीं, लेकिन आज वे लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा करके परिवर्तन करती हैं।लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को चर्चा और पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया गया तो आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि उन्होंने दावा किया कि समिति ने अधिकार से परे जाकर प्रावधान जोड़े हैं और यह बहुत गंभीर तकनीकी मामला है।जो नियम एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के मंत्रिमंडल ने सबसे पहले इस संबंध में एक विधेयक को मंजूरी दी थी जिसे पूर्व में सदन के सामने रखा गया था।उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया, जिसके लिए विपक्ष ने भी आग्रह किया था। समिति ने इस पर सुविचारित रूप से अपना मत प्रकट किया। उसके सुझाव के अनुसार विधेयक को फिर से मंत्रिमंडल के सामने भेजा गया।’’गृह मंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘आपका ही आग्रह था कि जेपीसी बने। समिति को यदि कोई बदलाव ही नहीं करना था तो क्या फायदा। यह कांग्रेस की सरकार के समय जैसी समिति नहीं थी, यह लोकतांत्रिक समिति है जिसने मंथन किया।’’शाह ने कहा, ‘‘कांग्रेस के समय समितियां केवल ठप्पा लगाती थीं। जब परिवर्तन स्वीकार ही नहीं तो समिति का क्या उद्देश्य।’’
दिल्ली के द्वारका इलाके में गैराज में लगी आग, 11 कारें जलकर खाक
नयी दिल्ली: दो अप्रैल (भाषा) दिल्ली के द्वारका सेक्टर-24 इलाके में बुधवार तड़के एक गैराज में आग लगने से 11 कारें जलकर खाक हो गईं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।अधिकारी ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए दमकल की नौ गाड़ियां भेजी गईं।

