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से आंदोलन का लक्ष्य किस प्रकार पूर्ण होता है यह महत्वपूर्ण नहीं है महत्व इस बात का है की क्या हम स्वतंत्रता के प्रति सोचना जारी रखे हैं अथवा हमने हजारों साल की गुलामी को फिर से स्वीकारना चालू कर दिया है… आम नागरिकों को भी पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। शहडोल का यह मुद्दा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए तैयार हैं, या फिर हम इसे अनदेखा करके भविष्य को और संकट में डाल देंगे? बहरहाल धरना आंदोलन में अपने प्रयास में शहडोल को नागरिक कर्तव्य बोध का एहसास कराया है जो जिंदा है स्वतंत्र है उनका विचार करना होगा जो गुलाम है मरे हुए लोग हैं धरना आंदोलन उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। ( त्रिलोकी नाथ)
शहडोल ( मध्य प्रदेश ) संविधान की पांचवी अनुसूची में अनुसूचित शहडोल आदिवासी बहुल क्षेत्र, अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में, खासकर 21वीं सदी में, यह क्षेत्र जल संसाधनों के अतिक्रमण और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। संभाग मुख्यालय किरण टॉकीज के पास स्थित प्राचीन जल बावड़ी के अतिक्रमण हर जागरूकता के लिए चल रहा है धरना आंदोलन का मामला इसका एक ज्वलंत उदाहरण है। इस मुद्दे ने न केवल स्थानीय समुदाय को प्रभावित किया है, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही और सामाजिक जागरूकता के सवाल को भी उजागर किया है। इस आलेख में, हम इस आंदोलन, प्रशासन की भूमिका, सत्ताधारी दल की जिम्मेदारी, और आदिवासी समुदाय पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करेंगे।
प्राचीन जल बावड़ी और प्रशासन की चुप्पी और जवाबदेही का सवाल प्रशासनिक सक्रियता की अर्ध सत्य बताती है कि किरण टॉकीज के पास जल बावड़ी पर अतिक्रमण को हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है, जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला अध्यक्ष और स्थानीय विधायक इस मुद्दे पर रैली निकालकर मांग पत्र सौंप चुके हैं। जबकि यह काम कांग्रेस पार्टी विपक्षी दल का होना चाहिए जो नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर वापस है कांग्रेस ने शायद अपनी कूटनिति के चलते इस मामले से स्वयं को दूर रखा। क्योंकि सबके अपने-अपने अतिक्रमण हैं अपना अपना कब्जा है। भाजपा की कार्रवाई न केवल जनता की आवाज को बुलंद करने का प्रयास थी, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सत्ताधारी दल के नेतृत्व को इस मुद्दे की गंभीरता का अहसास है। फिर भी, प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई न होना यह सवाल उठाता है कि क्या यह केवल एक राजनैतिक प्रदर्शन था, या वास्तव में बदलाव की मंशा थी?आदिवासी समुदाय पर प्रभाव और शोषण का इतिहास शहडोल एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां आदिवासी समुदाय की संस्कृति, जीवनशैली, और संसाधनों पर निर्भरता गहरी है। जल बावड़ी जैसे कुरुक्षेत्र में विकसित प्राकृतिक संसाधनों का अतिक्रमण न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों और उनकी आजीविका को भी प्रभावित करता है। इस मामले में, यह आरोप लगाया गया है कि जो लोग इस आंदोलन से जुड़े हैं, उन्हें अलग-अलग तरीकों से प्रताड़ित किया जा रहा है। आदिवासी समुदाय के साथ शोषण और प्रताड़ना का इतिहास नया नहीं है। औपनिवेशिक काल से लेकर आधुनिक समय तक, आदिवासियों की जमीन, जंगल, और जल संसाधनों पर अतिक्रमण और उनके अधिकारों का हनन होता रहा है। किरण टॉकीज जल बावड़ी का मामला भी इसी शृंखला का पारदर्शी शोषण का हिस्सा प्रतीत होता है।
धरना आंदोलन की प्रेस विज्ञप्ति में 100 दिन होने के बाद पुराने गांधी चौक में इस महात्मा गांधी की मूर्ति पर जाकर अपनी व्यथा रोई जिसे तोड़कर नष्ट करने का प्रयास किया गया था महात्मा गांधी की नई मूर्ति लगाकर आम आदमी के दिमाग में स्वतंत्रता के प्रति जिंदा रहने का एक सबक है। इसी मूर्ति पर स्वतंत्र नागरिकों में माल्यार्पण किया और अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
किरन टॉकीज शहडोल स्थित दुर्गा पूजा बावली की जमीन बचाने चल रहे आंदोलन संघर्ष के 100 दिन पूरे होने पर अनशन स्थल से पुराने गांधी चौक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। आज भारी संख्या में स्त्री पुरुष सहित नौजवान शामिल रहे ।भारी उत्साह के साथ सभी ने एक साथ मिलकर के महात्मा गांधी अमर रहे के नारे के साथ आज अनशन का आरंभ किया ।
आज अनशन में शहर के प्रतिष्ठित सर्राफा व्यापारी जमुना प्रसाद सराफ जी मौजूद थे जमुना प्रसाद जी ने सर्वप्रथम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण किया अनशन पर बैठने वाले नौजवान सुनील शर्मा, शीनू वर्मा को तिलक लगाकर माला पहनकर आज अनशन के समय दिन अनशन की प्रतिज्ञा के साथ बैठाया ।
आज अनशन के 100 वें दिन पर भारी संख्या में लोग मौजूद थे आज अनशन पर महिलाओं की संख्या अधिक थी सभी महिलाओं ने आंदोलन के नारे लगाए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अमर रहे महात्मा गांधी जिंदाबाद के नारे से पूरी शहडोल बाजार की बस्ती गुंजायमान रही। शहर के चौराहों से निकलते हुए सभी लोगों के हाथों में देश की आन बान शान राष्ट्रध्वज था।
सभी ने पुराना गांधी चौक स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण किया और महात्मा गांधी अमर रहे महात्मा गांधी जिंदाबाद के नारे को बुलंद किया ।
आज आंदोलन के 100वें दिन किरन टॉकीज शहडोल उमा भवन पर आंदोलन के प्रेरणा स्रोत समाजसेवी रंजीत बसाक, राजेंद्र रजक, शिवेंद्र सिंह, मनोज अग्रवाल, प्रदीप सोनी, प्रदीप साहू, संदीप सोनी विनोद शर्मा, शंकर रजक, अंश सोनी, मीतू ध्रुव मोर, ज्ञानेश जायसवाल, जय गुप्ता, सुमित शर्मा रुस्तम रजक प्रदीप कुमार अशोक रजक उपेंद्र जायसवाल सुरेश गुप्ता गोवर्धन गुप्ता सोनू मिनी राजू थारवानी प्रेमलाल सोनी मयंक गुप्ता प्रदीप सिंह संजय सोनी श्यामलाल वर्मा भोला जगवानी रवि लालवानी राजू लालवानी जनक लालवानी सुभाष सोनी दिनेश सिंह दिनेश गुप्ता सोनू गुप्ता अश्विनी गुप्ता सुनील कुमार किशन कॉल मंजू चौरसिया पवन खुदी सा रोहित गुप्ता लालू खुदी सा आशीष गुप्ता संजय गुप्ता रोहिणी प्रसाद जायसवाल जवाहर सिंह राहुल लालवानी सुमित लालवानी चंदन लालवानी सीनू वर्मा राजू यादव मोहन चौधरी अजय रजक चंद्रेश आचार्य राजू लक्ष्यकर गोपाल जेठानी रोहित गुप्ता राहुल सिंह। महिलाओं में प्रमुख रूप से अनीता गुप्ता माधुरी गुप्ता नेहा गुप्ता अनुपम सिंह मंजू केशरवानी स्वामी केसरवानी पार्वती रजक इनकी लकीर रानी सोनी प्रीति जायसवाल अनसूया सोनी ललित वर्मा उषा रजत रेखा रजक मुन्नी बाई रजत माधुरी रजक सुनीता गुप्ता सुनीता गुप्ता प्रियंका गुप्ता रेनू गुप्ता सुनीता पानी का मंजू चौरसिया रीना साहू संध्या गुप्ता राजकुमार बागवानी सीता वर्मा प्रिया गुप्ता आज अनशन में विशेष रूप से सभी ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सेदारी करी ।
अंत में धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने 100 दिन से चल रहे क्रमिक अनशन आंदोलन में भागीदारी करने के लिए शहडोल शहर व जिले के कोने-कोने से आए सभी आंदोलनकारी का संघर्ष के मंच से धन्यवाद किया और आगे भी संघर्ष में साथ देने के लिए उम्मीद जताई ।

