
यानी यात्री गाड़ियों की आकाल बनाकर मूसलाधार बारिश के रूप में बीमार यात्रियों के लिए रेलगाड़ी का झुनझुना वरदान बनने वाला है । ————–(त्रिलोकी नाथ )————–
लेकिन यह गाड़ी फिलहाल महिला आरक्षण विधेयक की तरह,नारी शक्ति वंदन अधिनियम हो रहा है… क्योंकि घोषणा होने के बाद भी सभी बीमार लोगों को तब तक अप्रत्यक्ष रूप से सांस रोकने का आदेश जैसे दिया गया है…? जब तक मुख्यमंत्री जी शहडोल में आकर इस बीमारीवाली रेलगाड़ी को हरी झंडी न दिखा दे…. वैसे यह काम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का है वह अक्सर वंदे मातरम को हरी झंडी दिखाते रहे हैं। किंतु शायद यह बीमार यात्रियों और गरीबों को मदद पहुंचाने वाली ट्रेन होगी जो उनके स्तर की नहीं होगी इसलिए मुख्यमंत्री जी को यह जिम्मेदारी बहन करने का काम दिया गया है….चाहते तो महिला सशक्तिकरण के इस ऐतिहासिक युग में श्रीमती हिमाद्री सिंह को भी हरी झंडी दिखाने का काम मिल सकता था।किंतु लोकहित से ज्यादा लोगों को अपना अपना चेहरा चमकाने की ज्यादा चिंता है आखिर इवेंट का कोई अवसर कोई क्यों छोड़ना चाहता है….

फिर बीमार लोगों के लिए रेलगाड़ी जैसे अति महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कार्य के लिए किसी युवा महिला आदिवासी संसद के भरोसे यह काम तो छोड़ना चाहिए शायद यही सोच कर ट्रेन की हरी झंडी लोकहित को समर्पित नहीं कि शायद आने वाली 5 तारीख को हरी झंडी कमाल दिखाएं…..बहरहाल अगर हरी झंडी वाली इस नई 5 तारीख को मुख्यमंत्री जी किन्हीं कारणों से अपने लक्ष्य शहडोल से नागपुर तक की रेलगाड़ी को हरी झंडी नहीं दिखा पाएंगे तो यह रेलगाड़ी भी महिला आरक्षण विधेयक की तरह 2029 में चालू की जाएगी, ऐसा मानकर चलना चाहिए; तब तक सभी बीमारी व यात्रियों को सूचना दी जाती है की अपनी सांसों पर नियंत्रण बनाकर रखें।

