
जनता जनार्दन के मन में परिवर्तन की कसक है, वह कांग्रेस को चुनाव जीतना चाहती है लेकिन जनता की दुविधा यह है की क्या कांग्रेस पार्टी का संगठन चुनाव जीतना चाहता है…..? यह माहौल शहडोल जिले में आम होता जा रहा है …. कतिपय लोग इस पर चुटकी भी ले रहे हैं।
_______(सुशील कुमार शर्मा)___________
क्योंकि शहडोल में चुनाव प्रचार की बुलेट ट्रेन में अभी तक कांग्रेस पार्टी का ईंधन नहीं भरा गया है। तो कांग्रेस संगठन के लोग इसे किसी जैन नाम के व्यक्ति को देर से आने का दोषी ठहराते हैं। फिर भी जो बैठकें शहडोल जिले में विधानसभा वार हुई है उसके बावजूद भी चुनाव प्रचार के लिए जो ऊर्जा कांग्रेस संगठन में दिखना चाहिए वह अभी नहीं दिख पा रहा है चुनाव प्रचार भी ठंडा पड़ा हुआ है। शहडोल नगर पास में ही करीब 75000 वोटर हैं जहां नगर पालिका अध्यक्ष कांग्रेस के घनश्याम जायसवाल हैं और उसे वक्त चुनाव प्रचार में जो ताकत लगाई गई थी पार्षद स्तर पर वह नहीं दिखाई दे रही है।
जबकि दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का पॉलिटिकल इंडस्ट्री 24 घंटा अपने कार्यकर्ता भाजपा की नीव को मजबूत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
यह बात अनुभव में देखी गई है की जब लोकसभा का उपचुनाव शहडोल में हुआ था तब हिमाद्री सिंह जो कांग्रेस सांसद रही, श्रीमती राजेश नंदिनी सिंह की पुत्री हैं उन्हें बतौर उम्मीदबार तत्कालीन कांग्रेस की इकलौती लोकसभा उपचुनाव क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी का कोई भी बड़ा नेता प्रचार करने नहीं आया था। जबकि तब भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपनी जीत की साख मानकर मोहल्ले मोहल्ले प्रचार के लिए काम कर रहे थे और अंततः कम मार्जन से हिमाद्री सिंह कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव हार गई थी। क्योंकि तब जनता ने उन्हें जीताने के लिए मन बना रखा था। कमोबेश वही हालत वर्तमान में भी देखने को मिल रहे हैं जब जनता सत्ता परिवर्तन के लिए बेचैन है और वह कांग्रेस को वैकल्पिक रूप से सत्ता सौंपना चाहती है किंतु संगठन की ताकत कमजोर दिखती है की गिने चुने 10 दिन रह गए हैं चुनाव को अभी तक चुनाव प्रचार शहडोल क्षेत्र में सिर्फ प्रत्याशियों के भरोसे दिख रहा है।

