
शहडोल में गैंगरेप के बलात्कारी को पकड़ा भी जाता है और उसका घर भी तोड़ दिया जाता है लेकिन यही काम जब सांसद लोग करते हैं तब उन्हें विशेष सुविधा क्यों मिलती है..?यह आखिर दोहरा व्यवहारक्यों हो रहा है…?जबकि न्यायालय अभी इन्हें सजा नहीं देता यानी आरोपी होते हैं.... ……महान बलात्कारी को जिसने तथा कथित तौर पर 400 पार महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाया और इतना ही नहीं उन्हें ब्लैकमेलिंग करने के लिए या अन्य राजनीतिक उपयोग के लिए उनका ब्लू फिल्म का वीडियो भी बनाया.. मान लीजिए हम अज्ञात ताकत में 400 पार के साथ सत्ता में आ गए और हमारी इच्छा हुई कि बलात्कार विशेष माननीय आरोपी सांसदों और विधायकों और अफसरों के लिए इस सुविधा संतुलन के जरिए नीतिगत तरीके से गौरव का कारण बनना चाहिए। तथा इसमें भविष्य में “द ग्रेट इंडियन रेपिस्ट के अवार्ड” के जरिए पुरस्कारों के जरिए सम्मानित भी किया जाए… ऐसी स्थिति में इस दिखाने वाला कानून बनाना पड़ेगा,
———–(त्रिलोकी नाथ)———-
जैसे प्रधानमंत्री जी की और स्टेट बैंक आफ इंडिया की इच्छा हुई कि वह एक राजनीतिक पार्टियों के लिए एक ऐसा चंदा का इंतजाम करें जिसको जानता न जानने नहीं पावे, और इसका नाम उन्होंने “इलेक्टोरल बांड” रख करके बकायदे इसके जरिए देश के तमाम काला बाजार में होने वाले धन का इस्तेमाल राजनीतिक पार्टियों अपने फंड में पैसा इकट्ठा करने के लिए कर रही थी. और यदि किसी कारण से कोई राजनीतिक दल इस कैश नहीं करता था यानी काला धन को नहीं लेता था तो उसमें भी व्यवस्था थी कि ऐसा पैसा “पीएम केयर फंड* में अपने आप चला जाएगा।
कहने के लिए यह तो स्टेट बैंक आफ इंडिया की नीतिगत “इलेक्टोरल बांड” था किंतु वास्तव में यह एक आधुनिक राजनीति की काली सच्चाई थी. जिसमें किसी प्रधानमंत्री राजीव गांधी के ऊपर यदि 64 करोड रुपए का वोफोर्स घोटाले का आरोप लगता था तो इस भ्रम को और अफवाह को उपयोग करके विश्वनाथ प्रताप सिंह सत्ता में आ जाते थे । लेकिन यह सच्चाई सामने नहीं आने पाती थी कि क्या 64 करोड रुपए राजीव गांधी ने वोफोर्स तो घोटाले में लिए थे…?
अब यह घटिया स्तर की बात अपमानजनक आरोप की हो चुकी। इस कड़वी सच्चाई के रूप में बदलने के लिए “इलेक्टोरल बांड” कानून का रूप लेकर के करीब 160 अरब रुपए का काला धन जिसमें कुछ सफेद धन भी रहा होगा… उसको स्टेट बैंक ने इकट्ठा किया. ज्यादातर पैसा सत्ताधारी भाजपा के पास आया क्योंकि वही अपने संसाधनों सत्ता, ईडी,सीबीआई ,पुलिस, इनकम टैक्स, डिपार्टमेंट जीएसटी आदि के जरिए लोगों को ब्लैकमेल कर सकती थी । वैसे भी ब्लैकमेल अब कोई अपमानजनक व्यावहारिक शब्द नहीं रह गया है। जिस तरह से करोड़ों रुपए खर्च करके विधायकों को खरीदा और बेचा जाता है उसे नीतिगत रूप दिया जाता है। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के इलेक्टोरल बांड को गैरकानूनी पाया और इसे रद्द कर दिया । इससे यह साबित हो गया कि यह गलत कानून था ऐसा कानून लोकतांत्रिक देश में नहीं बनना चाहिए।
अब मान लीजिए हम अज्ञात ताकत की बदलते 400 पार के साथ सत्ता में आ गए और हमारी इच्छा हुई कि बलात्कार विशेष माननीय सांसदों और विधायकों और अफसरों के लिए इस सुविधा संतुलन के जरिए नीतिगत तरीके से गौरव का कारण बनना चाहिए। तथा इसमें भविष्य में “द ग्रेट इंडियन रेपिस्ट के अवार्ड” के जरिए पुरस्कारों के जरिए सम्मानित भी किया जाए… ऐसी स्थिति में इस दिखाने वाला कानून बनाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में जब व्यक्तियों का चयन करना पड़ेगा उसे वक्त माननीय सांसद बृजभूषण सिंह जो कुश्ती संघ अध्यक्ष रहे जिन पर बलात्कार और यौन शोषण का आरोप विश्व स्तर पर ओलंपियाड विजेता महिला पहलवानों ने न सिर्फ लगाया बल्कि जंतर मंतर में धरना आंदोलन भी किया और कुछ लोगों ने उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीकी की विवशता की देखते हुए अपने कुश्ती में प्राप्तमॉडल भी वापस कर दिए। ऐसे सांसद को वास्तव में द ग्रेट इंडियन रेपिस्ट का अवार्ड प्रथम रूप से मिलना चाहिए।
किंतु इस आधुनिक राजनीतिक शैली कीगौरवशाली अवार्ड को लेकर माननीय सांसद ने ठोकर मार दिया और अब वह चौथे नंबर पर चयन प्रक्रिया में टिक जाएंगे.. क्योंकि पहले नंबर पर इस अवार्ड को प्राप्त करने का हक धर्म-प्रचारक महान-संत महान-बाबा राम रहीम डेरा सच्चा सौदा वाले ने कब्जा कर रखा है… वह घोषित बलात्कारियों के रूप में 20-20 साल की सजा से दंडित होने के बावजूद भी भाजपा के शासनकाल में जब इच्छा पडती है तब अपने अध्यात्म की गाड़ी में जाकर लोगों को आध्यात्मिक की भावना से परिपूर्ण कर देता है। और उसमें तमाम राजनीतिक दल उनके चरण चुम्मन करते हैं। इसलिए वह पहले “ग्रेट इंडियन रेपिस्टअवार्ड” के हकदार हो गए ।
हालांकि पहले अवार्ड का हक गुजराती बाबा संतआसाराम बापू को मिलना था क्योंकि वह सबसे पहले जेल में जाकर के बलात्कारी के रूप में महान संत की गौरव-गाथा को स्थापित किए हैं… किंतु उनका सत्ताधारी राजनेताओं के साथ बहुत अच्छा जम नहीं पाया इस वजह से उनका यह हक उनसे छिन गया. और पहले स्थान पर डेरा सच्चा सौदा के बाबा राम रहीम ने कब्जा कर लिया है।
स्वाभाविक है ऐसे में तीसरे स्थान पर माननीय सांसद कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे बृजभूषण सिंह को जाना चाहिए था क्योंकि उनके खिलाफ एक साल से ज्यादा विश्व स्तरीय महिला खिलाड़ियों ने जंतर मंतर में धरना दिया इसके बावजूद भी उसका बाल बांका का नहीं हुआ। अगर सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया निर्देश नहीं करती तो उसे खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज नहीं होती।
प्रधानमंत्री और जिस दल का वह सांसद है उसके मुखिया ने इस दिशा में देखना उचित भी नहीं लगा.. उन्हें शायद इस सांसद से ताकत मिलती रही होगी किंतु यह भी बात गलत साबित हो गई क्योंकि प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में जाकर के युवा सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना के पक्ष में चुनाव-प्रचार किया तब उन्होंने कहा भी की “प्रज्वल रेवन्ना को जो वोट मिलेगा उससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताकत बढ़ेगी… लेकिन भारत की जनता भी विचित्र टाइप की है इतने महान बलात्कारी को जिसने तथा कथित तौर पर 400 पार महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाया और इतना ही नहीं उन्हें ब्लैकमेलिंग करने के लिए या अन्य राजनीतिक उपयोग के लिए उनका ब्लू फिल्म का वीडियो भी बनाया ताकि समय-समय पर राजनीतिक सत्ता के लिए उनका सीधा उपयोग हो सके… इतना सदुपयोग करने वाला सांसद पूर्व प्रधानमंत्री का पोता प्रज्वल रमन्ना अपने मतदान क्षेत्र हासन में मतदान के बाद जर्मनी भाग गया या वह ससम्मान पहुंचा दिया गया कि भारतीय जनता मुर्ख है वह इस विवाद को उठाती रहेगी जब तुम लौटोगे तब तक बहुत कुछ शांत हो चुका होगा और चुनाव भी 5 जून के नतीजे आ जाएंगे तो सीधे लौट कर हासन नहीं आना आ करके महान बलात्कारियों के रूप में भारत की नव निर्मित संसद में शपथ लेना… शायद इसी आशय से उसे विदेश जाने का शासकीय सुविधा के साथ अवसर दिया गया और बलात्कार और यौन शोषण के बाद ब्लू फिल्म बनाकर के सत्ता के लिए उपयोग करने की इस महान गौरवशाली योग्यता की नई राजनीतिक शैली के लिए वह “द ग्रेट इंडियन रेपिस्ट” का तीसरा दावेदार बन बैठा और बृजभूषण सिंह चौहान पर चुकी देर से कोर्ट ने आरोप तय किए हैं इसलिए उसका स्थान चौथा स्थान पर चला गया…. तो “ग्रेट इंडियन रेपिस्ट अवार्ड” ( महान भारतीय बलात्कारी पुरस्कार) के लिए बृजभूषण सिंह पीछे गए हैं… ऐसा समझा जाना चाहिए ।
तो देखते हैं कि भविष्य में इन महान बलात्कारी में अभी कौन प्रतियोगिता में भारत की उच्च नेताओं और कार्यपालिका के द्वारा प्रथम स्थान को गौरवशाली लोकप्रिय भारतीय बलात्कारी के रूप में पहला पुरस्कार पाता है क्योंकि दशा और दिशा कुछ इसी तरह है, इलेक्टोरल बांड की तरह है।
यह भी एक प्रकार का 21वीं सदी की आधुनिक भारतीय राजनीतिक विकसित शैली में मिल का पत्थर साबित होने जा रहा है यह अलग बात है कि तब कोई सिरफिरा उच्चतम न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश आएगा और वह इस “द ग्रेट इंडियन रेपिस्ट अवार्ड “ को अवैध ठहरा देगा तब तक इसकी प्रतियोगिता और इसकी कार्यप्रणाली लगातार जारी रहेगी।
ठीक उसी तरह जैसे 160 अरब रुपए भारतीय संसाधनों के साथब्लैकमेलिंग तानाशाही के जरिए पारदर्शी तरीके से स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने इस लोकतंत्र के लिए फंड जनरेट किया था तब तक कुछ और रेपिस्ट और बलात्कारी अपना नाम अवार्ड के लिए दर्ज कर सकेंगे । शहडोल में गैंगरेप के बलात्कारी को पकड़ा भी जाता है और उसका घर भी तोड़ दिया जाता है लेकिन यही काम जब सांसद लोग करते हैं तब उन्हें विशेष सुविधा क्यों मिलती है..?यह आखिर दोहरा व्यवहारक्यों हो रहा है…?जबकि न्यायालय अभी इन्हें सजा नहीं देता यानी आरोपी होते हैं…. यही भारत की वर्तमान सच्चाई होती जा रही है अब इस पर जिसको रोना हो वह रोये और जिसको खुश होना हो वह खुश हों.. यही वर्तमान का प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् है “होंइहें वही जो राम रचि राखा….

