धीरेंद्र शास्त्री के बयान “महाकुंभ मे न आना देशद्रोह” पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग//अब भारत केवल कार्यबल नहीं, बल्कि एक ‘‘विश्व शक्ति’’ -प्रधानमंत्री/जनजातियों का स्वर्णिम युग- राज्यपाल

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नयीदिल्ली -(भाषा)प्रधानमंत्री की सैलरी कितनी होती है, जानिए यहांप्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत केवल कार्यबल नहीं बल्कि एक ‘‘विश्व शक्ति’’ है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का तीसरी बार फिर से चुना जाना लोगों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत का नया वैश्विक समाचार चैनल देश की उपलब्धियों को विदेशों तक ले जाएगा।प्रधानमंत्री ने ‘‘लुटियन जमात’’ और ‘‘जनहित याचिका के ठेकेदार’’ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे हर चीज के लिए अदालत जाते हैं, लेकिन ऐसे कानून पर चुप्पी साधे रहते हैं। उन्होंने कहा कि तब वे आजादी के बारे में नहीं सोचते थे।मोदी ने ‘एनएक्सटी’ सम्मेलन में ‘न्यूजएक्स वर्ल्ड’ चैनल के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि दुनिया दशकों तक भारत को अपने ‘बैक ऑफिस’ के रूप में देखती रही, लेकिन देश अब दुनिया के कारखाने के रूप में उभर रहा है।भारत अब दुनिया के कारखाने के रूप में उभर रहा है: प्रधानमंत्री मोदी|

मुंबई: एक मार्च (भाषा)New Sebi Chief Tuhin Kanta Pandey Odisha Cadre Ias Education Salary Profile  In Hindi - Amar Ujala Hindi News Live - Tuhin Kanta Pandey:कितने पढ़े-लिखे  हैं नए सेबी अध्यक्ष, वेतन कितना होगा? तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को पूंजी बाजार नियामक सेबी के 11वें चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाल लिया।अब तक वित्त सचिव के रूप में कार्य कर रहे एक नौकरशाह पांडेय को बृहस्पतिवार को सरकार ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) का चेयरमैन नियुक्त किया।

  उमरियाजनजातियों का चल रहा स्वर्णिम युग- राज्यपाल मंगुभाई मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आज का युग जनजातियों के लिए स्वर्णिम युग है। जहां जनजातियों के लिए केंद्र एवं राज्य शासन के द्वारा अनेक महत्वाकांक्षी एवं कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा जनजातियों को सीधे तौर पर इनका लाभ प्राप्त हो रहा है, जिससे जनजातीय समुदाय सशक्त एवं आत्मनिर्भर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में बैगा, भारिया एवं सहरिया विशेष पिछड़ी जनजातियों के रूप में चिन्हित हैं, इनके उत्थान एवं समाज के मुख्य धारा में जोड़ने के लिए सरकार द्वारा अनेकों प्रयास किए जा रहे है।

*धीरेंद्र शास्त्री के बयान “महाकुंभ मे न आना देशद्रोह” पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग*हाल ही में धर्मगुरु धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा दिया गया जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता संदीप तिवारी ने कहा कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री द्वारा दिया गया बयान,महाकुंभ मे हर व्यक्ति को आना चाहिए जो नहीं आएगा वह पछताएगा,और देशद्रोह कहलाएगा* न केवल असंवेदनशील और असमर्थनीय है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय एकता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ भी है, इस प्रकार के बयान सामाजिक सौहार्द्र को नष्ट करने और देश की अखंडता को खतरे में डालने का कार्य करते हैं।
शास्त्री जी का यह बयान निश्चित रूप से धार्मिक विश्वासों को राजनीति और अराजकता के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, यदि इस बयान को सही माना जाए तो क्या वे नागरिक, जो किसी कारणवश महाकुंभ में भाग नहीं ले पाए है उन्हें देशद्रोही करार दिया जाएगा? क्या वे भारतीय नागरिक जो अपने कर्तव्यों में व्यस्त हैं, जैसे कि सैनिक, पुलिसकर्मी, डॉक्टर, वकील, पत्रकार ,या अन्य आवश्यक सेवाओं में कार्यरत हैं, वे भी जो नही पहुंच पाए देशद्रोही कहलाएंगे? यह सब तर्कहीन और अतार्किक है।
इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, मैंने दिनांक 4 फरवरी 2025 को शहडोल पुलिस अधीक्षक महोदय को एक लिखित शिकायत दी थी, जिसमें धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी, हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और यह दिखाता है कि शहडोल पुलिस प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को हल्के में ले रहा है।
भारत एक लोकतांत्रिक देश है और संविधान के तहत हर नागरिक को अपने धर्म, आस्था, और स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है, ऐसे बयानों के जरिए किसी को देशद्रोही ठहराना न केवल गलत है, बल्कि यह संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भी है।इसलिए, मैं शहडोल पुलिस प्रशासन से अपील करता हूँ कि वे इस मामले में तत्काल कार्रवाई करें और शास्त्री के बयान के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करें, साथ ही, सरकार और न्यायपालिका से यह अपेक्षा है कि वे इस प्रकार की भड़काऊ बयानबाजी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं, ताकि समाज में शांति, सौहार्द्र और कानून व्यवस्था बनी रहे।हमारे समाज में सभी को अपनी स्वतंत्रता का अधिकार है, और किसी को भी इसके खिलाफ जाकर समाज में विघटन की स्थिति उत्पन्न नहीं करने दिया जाना चाहिए।

 

 

 

 

 

 


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