
नयी दिल्ली: 28 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को जल महल झील को नुकसान पहुंचाने और आसपास के क्षेत्र में रात्रि बाजार लगाने की अनुमति देकर इसके पानी को दूषित करने के लिए नगर निगम जयपुर हैरिटेज को फटकार लगाई।न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि नगर निगम जयपुर हैरिटेज की ‘‘लापरवाही और अवैध कृत्यों’’ के कारण जल महल झील ‘‘पूरी तरह से नष्ट हो गई।’’
21 विधायकों निलंबन ‘लोकतंत्र पर प्रहार’ नयी दिल्ली: 28 फरवरी (भाषा) दिल्ली विधानसभा में विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) के 21 विधायकों के निलंबन के बाद राजनीतिक टकराव शुरू हो गया और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने इसे ‘जनता के जनादेश का अपमान’ और लोकतंत्र पर प्रहार’ बताया, इसके जवाब में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने संसदीय नियमों और पिछले व्यवधानों का हवाला देते हुए इस कदम को सही ठहराया।उपराज्यपाल वी के सक्सेना के उद्घाटन अभिभाषण में कथित रूप से बाधा डालने के लिए आतिशी समेत 21 आप विधायकों को 25 फरवरी को तीन दिन के लिए निलंबित कर दिया गया था।
कोयला परिवहन दो वर्षों में दोगुनी कोयला मंत्रालय ने रेल-सी-रेल (आरएसआर) को बढ़ावा देने के लिए पहल की है, जिसका उद्देश्य कोयले की कुशल आवाजाही के लिए आरएसआर परिवहन के साथ जोड़ना है। यह मल्टी-मॉडल प्रणाली कोयले को खदानों से बंदरगाह और उनके अंतिम उपयोगकर्ताओं तक निर्बाध रूप से पहुंचाने की सुविधा प्रदान करने के साथ ही रसद दक्षता में भी सुधार करती है।आरएसआर मोड कोयला निकासी का अतिरिक्त वैकल्पिक मोड प्रदान करके सभी रेल मार्गों (एआरआर) पर भीड़भाड़ को कम करता है और कोयला परिवहन के एआरआर मोड की तुलना में कम कार्बन-फुटप्रिंट सुनिश्चित करता है। परिवहन के तटीय शिपिंग मोड में भारत के लॉजिस्टिक उद्योग में क्रांति लाने की क्षमता है।पिछले कुछ वर्षों में कोयला मंत्रालय ने रेलवे के साथ समन्वय करके कोयले की निकासी के लिए कोयला रेल-सी-रेल (आरएसआर) नेटवर्क के इस्तेमाल में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसके परिणामस्वरूप, वित्त वर्ष 2023-24 में कोयले की आवाजाही लगभग दोगुनी होकर 54 मीट्रिक टन हो गई है, जो वित्त वर्ष 2021-22 में 28 मीट्रिक टन थी। इसमें उतरोत्तर वृद्धि भी हो रही है।
सनातन अधीनता में विश्वास नहीं करता-उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज कहा कि कुछ लोग अज्ञानतावश आध्यात्मिकता जैसे हमारे सात्विक तत्वों को अंधविश्वास का नाम दे रहे हैं। इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कि सनातन का तात्पर्य समावेशिता से है, श्री धनखड़ ने कहा, “कुछ लोग, अज्ञानतावश या अंधाधुंध अर्थ प्राप्ति में लगे होने के कारण, गलत तरीके से आध्यात्मिकता जैसे हमारे सात्विक तत्वों को अंधविश्वास का नाम दे देते हैं।”उन्होंने कहा, “हर बात का जवाब आज के दिन सनातन में मिल सकता है। सनातन जो सिखाता है वह आज की व्यवस्था के लिए आवश्यक है, चाहे वह दुनिया में कहीं भी हो। सनातन का तात्पर्य समावेशिता से है, सनातन का तात्पर्य सार्वभौमिक अच्छाई से है, सनातन का तात्पर्य आत्मा की सर्वोच्चता से है। सनातन अधीनता में विश्वास नहीं करता। यदि आप सनातन के प्रति समर्पण करते हैं, तो आप बंदी नहीं हैं, आप एक स्वतंत्र व्यक्ति, एक स्वतंत्र आत्मा बन जाते हैं।”

