
मैं भी पत्रकार हूं और सच बात यह है कि जमीनी पत्रकारों को अपने मालिक पत्रकारों से इतना पैसा नहीं मिलता है कि वह अपना जीवन समान्य रूप से जी सके। कुछ लोगों को तो कुछ भी नहीं मिलता। बल्कि पत्रकारों को पुलिसिया अंदाज में वसूल कर अखबार मालिक को देना होता है। कह सकते हैं ज्यादातरों में ऐसा ही होता है। इस तरह हम भी इस बीमारी से प्रभावित थे किंतु पैसा तो चाहिए था, इसलिए सतत प्रक्रिया में कुछ रास्ते हमने भी निकाले क्योंकि हमें भी जिंदा रहना है। इस तथाकथित लोकतंत्र में जो एक धूर्त तंत्र के रूप में विकसित हो चुका है। जिसमें पत्रकारिता के लिए ईमानदार पूर्ण संभावना कम है, या नहीं है। ताकि वह भूखे पेट के डर से अपनी बात पूरी ताकत से उठाना भूल जाए।अगर अच्छी सड़क बनाना है तो पहले अतिक्रमण हटाए एक जैसा परिदृश्य गुरु नानक चौक से साइन मंदिर तक चौड़ी सड़क का दिखना चाहिए.. यही ईमानदारी होगी। अन्यथा गर्व से कहो हम भी भ्रष्टाचारी हैं कहने में हमें कोई शर्म नहीं है। ईमानदारी, नैतिकता यह सब पीछे की बातें थी इसलिए पारदर्शी भ्रष्टाचार के लिए सिर्फ इस सड़क मार्ग में बिल निकाल करके बटवारा कर लिया जाए हमें कोई शर्म नहीं आएगी ।लेकिन तब शर्म आएगी जब आप निर्माण भी करेंगे और घटिया निर्माण करेंगे सड़क को सौंदर्य शाली और अच्छे माडल के रूप में एकरूपता के हिसाब से विकसित नहीं करेंगे तो सबसे पहले अतिक्रमण हटाए बाद में सड़क निर्माण कराये… हमारी तो पिछड़े सोच यही कहती है. आप क्या सोचते हैं वह सड़क निर्माण के बाद बात करेंगे..( त्रिलोकी नाथ )
बहरहाल तब लोकतंत्र के वर्तमान भ्रष्टाचार पूर्णईमानदार रास्ते में योजना समिति से हमने एक ₹500000 की सड़क मंजूर करायाथा ।चुंकि अधिकारी भी चाहते थे कि वह हमारी ईमानदारी में कुछ मदद करें हमको 10 परसेंट ईमानदारी से देना चाहिए था , नियम यही है भ्रष्टाचार का, किंतु हमने उन्हें नहीं दिया जिस सरपंच को काम दिया वह सरपंच हमें ही 10 परसेंट नहीं दे पाया। कार्य की निगरानी और पैसे की वसूली के लिए हमारा करीब 3% खर्च हो गया इस तरह नाम मात्र की राशि हमारे हिस्से में आई। तब की हमारा हिस्सा हमारे योजना विभाग का हिस्सा और अपना हिस्सा खाने के बाद भी सरपंच करीब₹200000 में आधा किलोमीटर की करीब सड़क बनाई थी। जब अंत में हम सड़क देखने गए तो हमको सड़क बनी दिखाई। लेकिन वह सीमेंट सड़क सड़क नहीं थी काम हो गया।
किसी तरह हमें जो इमानदारी से भ्रष्टाचार का हिस्सा मिलना था वह घटकर 5% ही हमें मिल पाया तब जबकि हम ईमानदारी से उस बेईमानी पूर्ण कार्य की दूर जाकर इसकी मॉनीटरिंग कर रहे थे। लेकिन सड़क बनी थी, कितनी चली … ईश्वर जाने। क्योंकि हम दोबारा वहां इसलिए नहीं गए और ना दोबारा योजना विभाग से हम काम नहीं ले पाए थे । हमारी ईमानदारी पूर्ण नैतिकता जवाब दे गई थी । क्योंकि हम हिस्सा दे नहीं पाए थे। यह अलग बात है अधिकारी ईमानदार था और वह मदद करना चाहता था बिना घूंस लिए। वह शायद हमें जानता था उसने एक काम और लेने को बोला हमने साफ मना कर दिया किया ईमानदारी पूर्ण भ्रष्टाचार हमसे नहीं हो पा रहा है। बहरहाल सड़क बनी थी।
कल 3 मार्च को हमारे गली वार्ड नंबर 20 और 21 के बीच का सड़क के सामने क्षेत्र की विधायक मनीषा सिंह ने करीब 24 लाख रुपए का सड़क का शिलान्यास किया। करीब चार पार्षदों को ,प्रत्यक्ष रूप से दो पार्षदों वार्ड नंबर 20 और वार्ड नंबर 21 के नगर पालिका पार्षदों को इसकी मॉनिटरिंग करनी होगी। जैसे हम कर रहे थे कि सड़क अच्छे स्तर की बने।
इसमें कोई शक नहीं की हाल में रेलवे स्टेशन पर देर से निर्माण कार्य होने पर विधायक मनीषा सिंह ने आपत्ति जताई और अधिकारियों की खबर ली है स्वाभाविक है 24 लाख रुपए के बनने वाले इस आधे से आधा किलोमीटर से कम के भी सड़क में यानी गुरु नानक चौक से तथाकथित सांई मंदिर चौक तक की सड़क निर्माण को समय से पूरा कर लिया जाएगा ।कोई शक नहीं करना चाहिए । क्योंकि विधायक महोदय बेहद सतर्क दिखाई देती प्रतीत होती है।
अगर हम अपनी सड़क जो अपने भ्रष्टाचार परियोजना से हमने अंजाम दिया था यानी 5 लाख का सड़क 1 किलोमीटर की तो वह बन गया सवा लाख रुपए में तो यह तो उसे हिसाब से मुश्किल से तमाम भ्रष्टाचारों की पूर्ति करते हुए अपने लागत में₹6 लाख का बन ही जाना चाहिए किंतु कहते हैं डायन भी एक घर छोड़कर चलती है इसलिए इस आधे से आधा किलोमीटर की सड़क को हम विधायक महोदय से आशा करते हैं कि इस सड़क में भ्रष्टाचार मुक्त निर्माण को मॉडल सड़क के रूप में उदाहरण के तौर पर दिखाने का क्यों ना प्रयास किया जाए। इसमें कोई भी जनप्रतिनिधि, विधायक से लेकर पार्षद तक और अधिकारी ऊपर से लेकर नीचे तक अपना कमीशन छोड़ दें। क्योंकि यह सड़क जो कभी विकसित हो रहे शहडोल का डेवलपमेंट एरिया का हिस्सा है उसे उसे रूप में देखकर गुरु नानक चौक से कमिश्नर बांग्ला तक एक खूबसूरत सड़क मार्ग के रूप में हम क्यों विकसित नहीं कर सकते…?
यहां पर बनने वाले हर सड़क से हम बहुत प्रताड़ित रहे हैं हालांकि इस सड़क मार्ग का एस्टीमेट (निर्माण योजना) हमारे पास नहीं है नाही वह सार्वजनिक रूप सेप्रदर्शित है। उसे सूचना के अधिकार के तहत ही हमें लेना पड़ेगा। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि सड़क के आसपास नाली निर्माण को महत्व दिया जाएगा अथवा नहीं या फिर इस सड़क के ऊपर भी उसी तरह से बरसात का पानी बहता रहेगा जैसा कि अक्सर इस डेवलपमेंट एरिया की बदतर स्थिति रहती है। नाली में पानी कभी बहते देखा ही नहीं गया।
लेकिन अगर हम ईमानदार हैं इस सड़क मार्ग के लिए या इस मॉडल बना रहे हैं तो क्या हम ईमानदारी से गुरु नानक चौक से लेकर कमिश्नर बांग्ला तक सड़क मार्ग की चौड़ाई के लिए सतर्क हैं..? क्योंकि गुरु नानक चौक की शुरुआत में ही देखा गया है कि यह सड़क अपनी औकात से करीब 30% चौड़ी रह जाती है क्योंकि इसकी औकात साइन मंदिर के आसपास की चौड़ाई को देखकर लगाया जा सकता है हो सकता है मेरा अनुमान बहुत कम हो किंतु सच्चाई यह है कि इस सड़क मार्ग में जहां विधायक ने शिलान्यास किया है वहां से खड़े होकर जब हम साइन मंदिर की तरफ देखते हैं तब पहले सड़क पर अतिक्रमण की नवनिर्मित बिल्डिंगों की पोजीशन स्पष्ट दिखाई देती है . होटल कर्मभूमि और सामने निर्मित हो रहीएक नई बिल्डिंग के बीच में सड़क नगर पालिका और नगर सौंदर्य दोनों के लिए कलंक के रूप में प्रमाणित दृश्य स्पष्ट प्रतीत होता है। क्या विधायक ने इस सकरे गली में 23-24 लाख रुपए की सड़क को बनने की कल्पनाकी होगी..? शायद वह इसकी कल्पना न की हूं जल्दबाजी में। किंतु यह तो नगरपालिका से पूछा ही जाना चाहिए कि इस सकरी गली में सड़क निर्माण के पैसे से नाला का निर्माण होगा या नाली का या फिर सड़क का..? क्योंकि सड़क के लिए जैसा की भारी भरकम राशि से प्रतीत होता है वहां जगह ही नहीं है.
क्योंकि निर्माण कार्य हो रहा है निश्चित रूप से नगर पालिका के अधिकारियों ने इस बहु मंजिला निर्माण के लिए अनुमति दी होगी तो क्या भ्रष्टाचार का पारदर्शी चेहरा इस सड़क मार्ग पर मॉडल के रूप में सड़क के भ्रष्टाचार का अनुगमन करेगा..? अगर ऐसा करता है तो यह सड़क सिर्फ एक नए प्रकार के बरसाती नाले के रूप में निर्मित कहीं जा सकती है जो सड़क तो होगी किंतु उसके ऊपर बरसात का नाला रहेगा इसमें कोई शक नहीं.. क्या विधायक ने अथवा वहां उपस्थित अधिकारियों ने इसे संज्ञान लेकर प्राथमिकता से इस सड़क मार्ग के तमाम अतिक्रमण को हटाकर कम से कम गुरु नानक मैन चौक से लेकर साइन मंदिर चौक तक एक जैसा मार्ग की चौड़ाई करने से बारे में विचार किया है..? यह प्रश्न बड़ा है अगर उन्होंने किया है तो शिलान्यास कैसे कर दिया..? पहले तो अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए था और अगर सिर्फ सरकारी पैसा खर्च करके 24 लाख रुपए में पारदर्शी भ्रष्टाचार का बंदर बांट किया जाना है तो हमें कोई शिकायत नहीं..
क्योंकि भ्रष्टाचार हमने अपने अनुभव में किया है और पाया है कि इसे दोबारा करने की हिम्मत हमारे जमीर में हमें इजाजत नहीं दी।
एक बार बड़ी अच्छी बात तब के नगर पालिका अधिकारी सुधाकर सिंह ने हमसे कही थी पांडव नगर में एक सड़क को देखकर कि जब पैसा ही खाना था तो बिल बनाकर सड़क का पैसा खा लेते कौन देखने वाला था इस लोकतंत्र में। क्यों ऐसी घटिया सड़क निर्माण कर दी है जो सड़क थी ही नहीं बस गिट्टी डामर लगा हुआ था।
क्या विधायक ऐसी घटनाओं से सीख लेकर सबसे पहले सड़क निर्माण के आसपास अतिक्रमण हटाने का निर्देश क्यों नहीं देती है या फिर नागरिकों को और अधिकारियों को इस बात की मौन स्वीकृति दी जाती है कि आप अतिक्रमण कर सड़क में अपना भ्रष्टाचार करें लाखों करोड़ों कमाए हम सड़क निर्माण में विकास कार्य करेंगे… और सब का विकास होगा. ऐसे में तो नारा होना चाहिए सबके भ्रष्टाचार का साथ, सबका भ्रष्टाचार का विकास… तो फिर हमारे प्रधानमंत्री जी नरेंद्र मोदी जी के उसे नारे का क्या होगा जो “सबका साथ सबका विकास” की बात करते रहे…
इसीलिए अगर इस सबसे छोटा मार्ग यानी आधा से आधा किलोमीटर सड़क को भ्रष्टाचार मुक्त मॉडल सड़क के रूप में विकसित करना है तो उसके आसपास 24 लाख रुपए की सड़क के स्तर का एस्टीमेट पारदर्शी रूप से मोहल्ले वासियों को बताया जाना चाहिए। ताकि होने वाले भ्रष्टाचार पर वह उंगली उठा सके और विधायक महोदय को सतर्क कर सकें कि यह पैसा व्यर्थ जा रहा है… आखिर हम डेवलपमेंट एरिया का डेवलप करने जा रहे हैं कुछ तो सोचिए अन्यथा नहीं सोचने के लिए तो स्पष्ट है कि व्यवस्थापन की जमीन पर साइ मंदिर के पास करोड़ों का निर्माण अवैध रूप से हो ही रहा है.. शायद इसी नगर पालिका ने इसके नशे के अनुमति दी होगी इसी प्रशासन में तो क्या फर्क पड़ता है 24 लाख का बिल निकालकर सब बंदर-बांट कर ले… यह भी हमारे लिए गर्व की बात होगी शर्म की बिल्कुल नहीं…. अगर घटिया सड़क बनाना है तो।
अगर अच्छी सड़क बनाना है तो पहले अतिक्रमण हटाए एक जैसा परिदृश्य गुरु नानक चौक से साइन मंदिर तक चौड़ी सड़क का दिखना चाहिए.. यही ईमानदारी होगी। अन्यथा गर्व से कहो हम भी भ्रष्टाचारी हैं कहने में हमें कोई शर्म नहीं है। ईमानदारी, नैतिकता यह सब पीछे की बातें थी इसलिए पारदर्शी भ्रष्टाचार के लिए सिर्फ इस सड़क मार्ग में बिल निकाल करके बटवारा कर लिया जाए हमें कोई शर्म नहीं आएगी ।लेकिन तब शर्म आएगी जब आप निर्माण भी करेंगे और घटिया निर्माण करेंगे सड़क को सौंदर्य शाली और अच्छे माडल के रूप में एकरूपता के हिसाब से विकसित नहीं करेंगे तो सबसे पहले अतिक्रमण हटाए बाद में सड़क निर्माण कराये… हमारी तो पिछड़े सोच यही कहती है. आप क्या सोचते हैं वह सड़क निर्माण के बाद बात करेंगे..

