
शहडोल में भू-माफियागिरी के लिए नवधनाड्य पूंजीपतियों के लिए लाभकारी धंधा साबित होता जा रहा है जिसमें गए भागी प्रशासनिक प्रणाली उनके साथ देती है या फिर प्रशासन के लापरवाही के कारण ऐसे भूमिया आम आदमियों के लिए सर दर्द बनते चले जा रहे हैं इस क्रम में जनसुनवाई में वार्ड नं.-14 निवासी वह चंद्रिका प्रसाद शुक्ल ने कलेक्टर के सामने अपनी समस्या रख कर बताई कि उनकी जमीन सोहागपुर की आराजी खसरा नंबर 1847 के अंश रकवा 0.040 हे0 क्षेत्र को क्रय कर शहडोल कलेक्ट्रेट में अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त के बाद भवन निर्माण कर रह रहा है। और उनकी जमीन के बगल
खसरा नंबर के दक्षिण भाग पर निस्तारू रास्ता था जिसमें पूर्व भूमिस्वामी मिनांसु मस्ता द्वारा गैर कानूनी तरीके से अवैध निर्माण कर विवाद बना रहा है। किसी तरह उन्होंने पहले आपसी समझौता के आधार पर निस्तार चलता रहा। अब मेरी जमीन में मिनांसु द्वारा स्टेट बैंक का व्यवसायिक कार्यालय बनाये जाने के कारण स्वतंत्र रास्ता पर अतिक्रमण कर लिया गया है और अवैध निर्माण किया जा रहा है।
इसकी शिकायत किए जाने पर राजस्व निरीक्षक द्वारा जांच में यह पाया गया कि मेरे आवास के दक्षिण तरफ पुरानी नाली एवं रास्ता है रास्ते के बगल से अतिक्रमणकारि मिनांसु मस्ता की भूमि है रास्ता खसरा नं. 1847 है। जिसकी भूमिस्वामी है जिसमें आपसीस समझौता मौके से हुआ है। जिसके आधार पर तहसीलदार सोहागपुर द्वारा स्वतंत्र रास्ता दिये जाने का आदेश मिनांस मस्ता को दिया गया किन्तु आज दिनांक तक न कब्जा हटाया गया ना ही स्वतंत्र रास्ता दिया गया। इस संबंध में अपनी शिकायत के साथ सभी दस्तावेज शामिल कर प्रशासन को दिए गए हैं इसके बावजूद भी अतिक्रमणकारियों का मानना है कि वह अपने धन-बल के भरोसे प्रशासनिक अधिकारियों को अपने नियंत्रण में रखता है इसलिए उसका कोई बाल बांका नहीं कर सकता। और इसी घमंड से वह लगातार अतिक्रमण का कार्य जारी रखे हैं इस संबंध में नगर पालिका अधिकारी और नजर राजस्व विभाग के द्वारा अब तक कोई प्रभावशाली कार्रवाई नहीं की गई है जिससे कलेक्ट्रेट में अपने सेवा देने वाले वयोवृद्ध चंद्रिका प्रसाद प्रशासन से हताशा के माहौल में फिर से अपनी जमीन को सुरक्षित करने का गोहार लगाये हैं।
संबंध में बताया गया हैहमारे क्रय की गई भूमि खसरा नं. 1847 के पूर्व खसरा नं. 1847 की ही श्री जे.पी. मस्ता द्वारा ली गई थी जिसके रजिस्ट्री में दक्षिण की ओर खसरा नं. 1847 में ही रास्ते का लेख है। व पश्चिम की ओर हमारे क्रय की गई भूमि से दक्षिण की ओर 20 फिट रास्ता जाने के बाद श्री मस्ता द्वारा गेट बनाकर बंद कर कब्जे में ले लिये जाने के कारण रास्ता बंद है।
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है जबकि नगर पालिका अधिकारी द्वारा मकान के संबंध में जारी की गई अनुमति को अब तक ना तो निरस्त किया गया है और ना ही इस पर कोई प्रभावशाली रोकपूर्ण कार्रवाई की गई है जिससे आम रास्ता सड़क व आवेदक चांद का प्रसाद की जमीन पर अवैध कब्जा लगातार हो रहा है देखना यह भी होगा कि स्टेट बैंक अपने फायदे के लिए क्या इस अवैध निर्माण पर अपनी सहमति प्रदान करती है अथवा वह भी भ्रष्टाचार की गंगा में गोता लगाने पर विश्वास करती है।
बहरहाल जारी नगर पालिका की अनुमति से अधिक अवैध हो रहे निर्माण पर भी इंजीनियर शरद द्विवेदी वह नगर पालिका अधिकारी अपने भ्रष्टाचार के अवसर खोजने दिखाई दे रहे हैं क्योंकि अभी तक जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं दिखाई देती है अब मामला कलेक्टर के समक्ष हो जाने के बाद शिकायतकर्ता को आशा है कि प्रशासन निष्पक्ष भाव से इस भूमाफिया गिरी पर लगाम लगा सकेगा

