
ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी शिविरों को सटीकता के साथ निशाना बनाया
कर्नल सोफिया कुरैशी ने ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए पीओके में लक्षित विशिष्ट आतंकी शिविरों के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा, “मुजफ्फराबाद में शवाई नाला कैंप लश्कर-ए-तैयबा का कैंप है. 20 अक्टूबर, 2024 को सोनमर्ग, 24 अक्टूबर, 2024 को गुलमर्ग और 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों को यहीं प्रशिक्षित किया गया था.”उन्होंने मुजफ्फराबाद में सैयदना बिलाल कैंप पर भी प्रकाश डाला, जो जैश-ए-मोहम्मद का एक मंच है, जो “हथियार, विस्फोटक और जंगल प्रशिक्षण केंद्र” के रूप में काम करता है. कुरैशी ने यह भी कहा कि खुफिया जानकारी ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) से 30 किलोमीटर दूर कोटली में गुलपुर कैंप की पहचान 20 अप्रैल, 2023 को पुंछ हमले और 9 जून, 2024 को तीर्थयात्रा बस हमले से जुड़े लश्कर के ठिकाने के रूप में की है.
इसके अलावा, भिंबर में बरनाला कैंप को हथियारों, आईईडी और जंगल में बचने की ट्रेनिंग के केंद्र के रूप में जाना जाता है, जबकि एलओसी से 13 किमी दूर एक अन्य कोटली कैंप में 15 आतंकवादियों की क्षमता वाले लश्कर के फिदायीन को प्रशिक्षित किया जाता था.उन्होंने कहा, “कोटली का गुलपुर कैंप एलओसी से 30 किमी दूर है और यह लश्कर का कैंप था… 20 अप्रैल, 2023 और 9 जून, 2024 को तीर्थयात्रा बस हमलों के लिए आतंकवादियों को यहीं से प्रशिक्षित किया गया था. भिंबर का बरनाला कैंप भी हथियारों, आईईडी और जंगल में बचने की ट्रेनिंग का केंद्र था. कोटली एलओसी से 13 किमी दूर है. यहां लश्कर के फिदायीन को प्रशिक्षित किया जाता था, जिसकी क्षमता 15 आतंकवादियों की थी.”
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की और उन्हें पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर भारतीय सशस्त्र बलों के सटीक हमलों के बारे में जानकारी दी।पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में, भारतीय सशस्त्र बलों ने मंगलवार देर रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान स्थित जिन आतंकी ठिकानों पर हमला किया उनमें जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ बहावलपुर और लश्कर-ए-तैयबा का अड्डा मुरीदके शामिल हैं।जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले के दो सप्ताह बाद ये मिसाइल हमले किए गए। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
लाहौर: सात मई (भाषा) भारत की ओर से मिसाइल हमले किए जाने के मद्देनजर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बुधवार को आपातकाल घोषित कर दिया गया और सभी शिक्षण संस्थान बंद कर दिए।इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने बुधवार को कहा कि देश के सशस्त्र बलों को भारतीय सैन्य हमलों में निर्दोष पाकिस्तानी लोगों की मौत का बदला लेने के लिए ‘‘अपनी पसंद के समय, स्थान और तरीके से’’ जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
मॉक ड्रिल: एनडीएमसी ने कह, लुटियन दिल्ली में रात आठ से 8.15 बजे तक ‘ब्लैकआउट’ रहेगा
नयी दिल्ली: सात मई (भाषा) राष्ट्रव्यापी नागरिक सुरक्षा ‘मॉक ड्रिल’ के तहत लुटियंस दिल्ली में रात आठ से 8.15 बजे तक ब्लैकआउट रहेगा। नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने यह घोषणा की गई।एनडीएमसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘सभी निवासियों से अनुरोध है कि कृपया सहयोग करें और स्थिति का सामना करें।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बुधवार को 55 स्थानों पर सुरक्षा ‘मॉक ड्रिल’ (सुरक्षा अभ्यास) की गई और इस दौरान तेज आवाज में बजते सायरन, सुरक्षित स्थानों की ओर भागते लोग, स्ट्रेचर पर घायल लोगों को ले जाये जाने जैसे कुछ दृश्य दिखे।राष्ट्रव्यापी ‘ऑपरेशन अभ्यास’ के तहत हवाई हमलों, एक साथ कई स्थानों पर आग लगने की घटनाओं और खोज व बचाव अभियान जैसे विभिन्न परिदृश्यों का किस तरह सामना करना है, इसको दर्शाते हुए ‘मॉक ड्रिल’ की गईं।
जांबाज सैनिको को सलाम, उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं: कांग्रेस
नयी दिल्ली: सात मई (भाषा) कांग्रेस पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर भारत द्वारा किए गए मिसाइल हमले के लिए बुधवार को भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य को सलाम किया और कहा कि वह सरकार एवं अपने वीर जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर चर्चा और सशस्त्र बलों की सराहना की गई। बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे।
आठ मई : द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ
नयी दिल्ली: सात मई (भाषा) साल के बाकी दिनों की तरह आठ मई का दिन भी इतिहास की कई छोटी-बड़ी घटनाओं के लिए याद किया जाता है। जर्मन तानाशाह हिटलर के आत्महत्या करने के तकरीबन एक सप्ताह बाद वह आठ मई का ही दिन था, जब जर्मनी के जनरल अल्फ्रेड योडल ने बिना शर्त आत्मसमर्पण के कागजों पर हस्ताक्षर कर दिए और इसके साथ ही यूरोप में द्वितीय विश्वयुद्ध का खात्मा हो गया।विश्व युद्ध के समापन की औपचारिक घोषणा होने तक रूस में अगला दिन हो चुका था, इसलिए वहां नौ मई को विश्व युद्ध के समापन का जश्न मनाया गया। हालांकि, जापान ने सितंबर में आत्मसपर्मण किया और उसके बाद ही द्वितीय विश्व युद्ध पूरी तरह से समाप्त हुआ।
6 और 7 में के मध्य हुए पाकिस्तान हमले पर क्या असर होंगे क्या सोचता है गूगल का ग्रोक
6 और 7 मई 2025 की मध्यरात्रि को भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में किए गए हवाई हमलों, जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया, के कई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकते हैं। ये हमले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में किए गए, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। निम्नलिखित बिंदुओं में इन हमलों के संभावित प्रभावों का विश्लेषण किया गया है, जो उपलब्ध जानकारी और क्षेत्रीय संदर्भ पर आधारित हैं:
1. आर्थिक प्रभाव
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव:
पाकिस्तान का शेयर बाजार (KSE-100 इंडेक्स) पहले से ही पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक तनाव के कारण 7,000 अंकों की गिरावट झेल चुका है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार, यह गिरावट 6,200 अंकों तक और बढ़ गई, जिससे निवेशकों का भरोसा और कमजोर हुआ।
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने और द्विपक्षीय व्यापार (अटारी-वाघा सीमा बंद, आयात-निर्यात पर रोक) रोकने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। सिंध और पंजाब प्रांत में फसल उत्पादन में 20-30% की कमी की आशंका है, जिससे खाद्य संकट और महंगाई बढ़ सकती है।
विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, 2025 के अंत तक 74% पाकिस्तानी भुखमरी के कगार पर हो सकते हैं, और पानी की कमी इस स्थिति को और बदतर कर सकती है।
मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार, यदि तनाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा, और आर्थिक विकास दर प्रभावित होगी।
अंतरराष्ट्रीय दबाव: पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों से भारत पर दबाव डालने की अपील की। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में भारत को पहलगाम हमले के लिए व्यापक समर्थन मिला, जिसने पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया।
चीन की प्रतिक्रिया: चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन उसका रुख संतुलित रहा।
4. पानी और ऊर्जा पर प्रभाव
सिंधु जल समझौता: भारत ने पहले ही सिंधु जल समझौता निलंबित कर दिया था, और पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि पानी रोकने की कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। पानी की कमी से पाकिस्तान की 30% जलविद्युत उत्पादन और कृषि पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे 2025 के अंत तक 74% आबादी भुखमरी के कगार पर पहुंच सकती है।
5. सुरक्षा और सैन्य खर्च
सैन्य तैनाती: पाकिस्तान ने बलूचिस्तान से 18,000 सैनिकों को पीओके में तैनात किया, जिससे रोजाना 1.5 से 3.2 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च हो रहा है। इससे स्वास्थ्य और शिक्षा बजट में कटौती की गई, जिसका असर आम जनता पर पड़ा।
आर्थिक संकट: पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार केवल 13.15 अरब डॉलर है, जो दो महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। 2025 में 26 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना असंभव लग रहा है।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर और इससे पहले के भारत के कूटनीतिक व आर्थिक कदमों ने पाकिस्तान को सैन्य, आर्थिक, और सामाजिक रूप से कमजोर किया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही संकट में थी, और इन हमलों ने उसे और गहरे संकट में धकेल दिया। हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा बना हुआ है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।
नोट: यह जानकारी उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल सकती है, और कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि की आवश्यकता हो सकती है।

