
जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है’: आपरेशन सिंदूर
नयी दिल्ली: 12 मई(भाषा) पाकिस्तान में स्थित सैन्य ठिकानों पर पिछले सप्ताह करारा सैन्य प्रहार करने के बाद सोमवार को भारतीय सशस्त्र बलों ने मध्यकाल के भक्त कवि तुलसीदास और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की काव्य पंक्तियों का सहारा लेते हुए पड़ोसी देश को कड़ा एवं सटीक संदेश दिया कि ‘भय की बिना प्रीति नहीं हो सकती’ और ‘विवेक के मरने पर मुनष्य का नाश तय है।’यहां ‘आपरेशन सिंदूर’ के संबंध में जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस वार्ता की शुरूआत ही राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी रचना की दमदार पंक्तियों से हुई।
युद्ध कोई बॉलीवुड की फिल्म नहीं, कूटनीति पहली पसंद: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे
पुणे: 12 मई (भाषा) पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने के फैसले पर उठ रहे सवालों की आलोचना करते हुए कहा कि ‘‘युद्ध न तो रोमांटिक होता है और न ही यह बॉलीवुड की कोई फिल्म है।’’उन्होंने रविवार को पुणे में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यदि आदेश मिलेगा तो वह युद्ध के लिए तैयार रहेंगे, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति रहेगी।पूर्व सेना प्रमुख ने बताया कि यह एक उथल-पुथल भरा सप्ताह रहा है, जिसकी शुरुआत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से हुई। इसके अंतर्गत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर हमला किया जिसके बाद चार दिनों तक हवाई और कुछ जमीनी लड़ाइयां चलीं।उन्होंने कहा, “अंत में सैन्य कार्रवाई रोके जाने की घोषणा की गई। मैं दोहराना चाहूंगा कि यह केवल सैन्य कार्रवाई की समाप्ति है, संघर्ष विराम नहीं है। देखिए, आने वाले दिनों और हफ्तों में चीजें कैसे सामने आती हैं।”उन्होंने कहा कि कई लोगों ने सैन्य कार्यवाही के निलंबन के बारे में सवाल उठाए हैं और कहा है कि क्या यह अच्छी बात है।उन्होंने कहा, “यदि आप तथ्यों और आंकड़ों पर विचार करें, खास कर युद्ध की लागत पर, तो आपको एहसास होगा कि एक बुद्धिमान व्यक्ति बहुत अधिक या अपूर्णीय नुकसान होने से पहले ही निर्णय ले लेता है।”उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि हमने पाकिस्तान को यह साबित कर दिया है कि उनके आतंकवाद के रास्ते पर चलते रहने की कीमत बहुत अधिक होगी। इसी बात ने उन्हें बाध्य किया और अंततः उनके डीजीएमओ ने संघर्ष विराम की संभावना पर चर्चा करने के लिए हमें फोन किया।”
उन्होंने कहा कि इसका एक तीसरा पहलू भी है, वह सामाजिक है।नरवणे ने कहा कि जब रात में गोले गिरते हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, खासतौर पर बच्चों को शरण स्थलों की ओर भागना पड़ता है, तो वह अनुभव उनके मन में गहरी वेदना छोड़ता है। “यह कार्यक्रम ‘भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान’ द्वारा आयोजित किया गया था।नरवणे ने कहा, “युद्ध कोई रोमांटिक बात नहीं है। यह आपकी कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं है। यह एक गंभीर विषय है। युद्ध या हिंसा अंतिम विकल्प होना चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है। भले ही अविवेकी लोग हम पर युद्ध थोपें, हमें उसका स्वागत नहीं करना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “फिर भी लोग पूछ रहे हैं कि हमने अब तक पूरी ताकत से युद्ध क्यों नहीं किया। एक सैनिक के रूप में यदि आदेश दिया जाएगा तो मैं युद्ध में जाऊंगा, लेकिन वह मेरी पहली पसंद नहीं होगी।”जनरल नरवणे ने कहा कि उनके विकल्प कूटनीति, संवाद के माध्यम से मतभेदों को सुलझाना और सशस्त्र संघर्ष की नौबत न आने देना होंगे।उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय बजट का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा लेता है और इसी प्रकार का निवेश किया जाना है।जनरल नरवणे ने कहा, “यदि आप अच्छी तरह से तैयार हैं, तो दूसरे आप पर हमला करने से पहले दो बार सोचेंगे।”
‘किंग’ कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से विदा ली , कहा आसान नहीं लेकिन यही सही है
नयी दिल्ली: 12 मई (भाषा)
भारत के सफलतम टेस्ट कप्तान और पिछले एक दशक से भारतीय बल्लेबाजी की धुरी रहे विराट कोहली ने सोमवार को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की जिससे टी20 के दौर में भी पारंपरिक क्रिकेट के संकटमोचकों में शुमार इस महान खिलाड़ी के इस प्रारूप में सुनहरे कैरियर पर विराम लग गया ।

