
शहडोल की रथ यात्रा: मोहन राम मंदिर और इस्कॉन का आध्यात्मिक संगम
शहडोल,
मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का शहर, जहाँ मोहन राम मंदिर और भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की परंपरा लगभग एक सदी से अधिक समय से जीवंत है। इस परंपरा की नींव पंडित मोहन राम पांडे ने 19वीं सदी के अंत में रखी थी। अमरपाटन के असरार गाँव के निवासी पंडित मोहन राम पांडे ने 1895 के आसपास मोहन राम मंदिर का निर्माण करवाया, जिसके बाद मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ स्वामी का मंदिर भी स्थापित किया गया। इस मंदिर की स्थापना के साथ ही रथ यात्रा की परंपरा शुरू हुई,
जो उस समय पुरानी सब्जी मंडी स्थित विष्णु बाबू के दरबार हाल में समाप्त होती थी।पंडित मोहन राम पांडे ने 1911 में एक विलेख के माध्यम से मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था एक समिति को सौंप दी थी, ताकि यह धार्मिक परंपरा निर्बाध रूप से चलती रहे। उनके वंशज, लाला पांडे और सूर्य प्रकाश पांडे, गर्व के साथ बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने शहडोल को यह धार्मिक अमानत सौंपी, जिसका उद्देश्य भगवती मार्ग को सशक्त करना और समाज में आध्यात्मिकता का प्रसार करना था। तब से लेकर आज तक यह रथ यात्रा शहडोल की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है। (त्रिलोकी नाथ)
मोहन राम मंदिर से प्रारंभ होने वाली रथ यात्रा के बाद रेलवे कॉलोनी स्थित जगन्नाथ मंदिर जहां उड़िया मोहल्ला की बहुलता है अलग से बने इस जगन्नाथ मंदिर की अपनी भगवान जगन्नाथ पुरी के परंपराओं के अनुसार जगन्नाथ महोत्सव निकालने की परंपरा प्रारंभ हुई। जिसे अपना खास आकर्षण है इस मंदिर से आस्था रखने वाले लोग यहां पर भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा महोत्सव का आनंद लेते हैं इसके बाद हाल के कुछ वर्षों से इस्कॉन मंदिर ने शहडोल संभाग मुख्यालय में अपनी शाखा खोला और अब मोहन राम मंदिर की रथ यात्रा और इस काम की रथ यात्रा एक साथ निकला करते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में शहडोल की इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में एक नया रंग जुड़ा है, और वह है अंतरराष्ट्रीय कृष्णामृत संघ (इस्कॉन) की भागीदारी। इस्कॉन ने मोहन राम मंदिर के समीप से अपनी रथ यात्रा शुरू की है, जो रेलवे ग्राउंड की ओर बढ़ती है। इस यात्रा में भक्त कीर्तन और भजन गाते हुए भक्ति भाव में लीन रहते हैं। इस्कॉन के व्यवस्थापक नरोत्तम सेवक दास जी का कहना है कि भगवत मार्ग ही मानव जीवन का सच्चा मार्ग है, जो परम सुख और शांति प्रदान करता है। इस्कॉन का उद्देश्य इस मार्ग का प्रचार-प्रसार करना और लोगों को भक्ति के पथ पर ले जाना है।
मोहन राम मंदिर की रथ यात्रा और इस्कॉन की रथ यात्रा, दोनों एक ही उद्देश्य को साझा करती हैं—आध्यात्मिकता का प्रसार और भगवान के प्रति भक्ति को बढ़ावा देना। जहाँ मोहन राम मंदिर की रथ यात्रा शहडोल की प्राचीन परंपरा और स्थानीय संस्कृति का प्रतीक है, वहीं इस्कॉन की रथ यात्रा वैश्विक भक्ति आंदोलन को दर्शाती है। दोनों के इस संगम ने शहडोल को एक अनूठा आध्यात्मिक केंद्र बना दिया है, जहाँ भक्तों को परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
यह रथ यात्रा न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। यह शहडोल के लोगों को एकजुट करती है और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। पंडित मोहन राम पांडे की दूरदर्शिता और इस्कॉन के भक्ति आंदोलन ने मिलकर शहडोल को एक ऐसे स्थान के रूप में स्थापित किया है, जहाँ भगवान जगन्नाथ की कृपा और भक्ति का आलोक निरंतर प्रसारित हो रहा है।
वर्तमान में मोहन राम मंदिर में विवाद होने के कारण तथा विवादित लोगों का कब्जा मोहन मंदिर में हो जाने से वहां राजनीति अपना पर प्रसार ली है हाई कोर्ट के निर्देश में काम कर रही स्वतंत्र समिति समिति के सदस्य का कहना है जब तक समिति को संपूर्ण प्रभार नहीं मिल जाता है तब तक वह रंग जगन्नाथ यात्रा में नहीं आ पा रहा है जो कि इसके इतिहास में इसे ऐतिहासिक बना दिया है जैसे ही प्रशासन द्वारा हाई कोर्ट से निर्देशित स्वतंत्र समिति को मंदिर ट्रस्ट का प्रभार जो की 12 वर्षों से नहीं मिला है इससे स्वतंत्र समिति विवाद का कोई पक्ष नहीं बनना चाहती मेरे प्रशासन चाहेगा तो यह शहडोल की ऐतिहासिक गौरवशाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा नागरिकों की भावना के अनुरूप गौरवपूर्ण ढंग से शहडोल की शान बनेगा।
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया. रविवार सुबह करीब 4:30 बजे, जब भक्त श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने भगवान के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में जमा थे, उसी दौरान वहां धक्का-मुक्की हो गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं.

