
रीवा शहडोल रोड में दरारें दिखने से भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी
शहडोल।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश तिवारी ने विगत दिनों रीवा शहडोल मार्ग में तथा बयोहारी सीधी मार्ग में बड़ी-बड़ी दरारे दिखने के मामले में कहा है कि इस प्रकार की निर्माण से स्पष्ट हो रहा है कि किस ढंग से विकास के काम किए जा रहे हैं। इसमें कोई अंकुश नहीं है। करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाली यह रोड का यह हाल अभी से होना शुरू हो गया है तो आगे क्या होगा अंदाजा लगाया जा सकता है। रोड को भले ही मेंटेनेंस कर ठीक कर दिया जाए लेकिन वह मजबूती नहीं आती है।कैलाश तिवारी ने कहा है कि घटिया निर्माण के संबंध में कोई कार्रवाई न होने के कारण निर्माण एजेंसी मिलजुल कर इस प्रकार की काम को अंजाम दे रही है।कैलाश तिवारी ने कहा है कि यह मामला कुछ दिनों में ठंडा हो जाएगा और किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी चाहे इसमें किसी की जान जाए चाहे दुर्घटनाएं हैं। सबको अपने-अपने कमीशन की चिंता रहती है।
90 डिग्री वाले पुल’ के दोषपूर्ण डिजाइन:दो मुख्य अभियंताओं समेत सात अभियंताओं को निलंबित
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निर्माणाधीन 90 डिग्री वाले पुल’ के दोषपूर्ण डिजाइन मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दो मुख्य अभियंताओं सहित सात अभियंताओं निलंबित करने का आदेश दिया है।मुख्यमंत्री ने बताया कि निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही और त्रुटिपूर्ण डिजाइन की शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने इस पूरी परियोजना की जांच के आदेश दिए थे।
जांच रपट आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पुल का निर्माण तकनीकी मानकों के विपरीत किया गया था। दो मुख्य अभियंताओं समेत सात अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया है। एक सेवानिवृत्त अभियंता के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। पुल की गलत डिजाइन प्रस्तुत करने के कारण निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट को
काली सूची में डाल दिया गया है। ऐशबाग इलाके में 648 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण पर 18 करोड़ रुपए की लागत
आई थी। इसका उद्देश्य रेलवे समपार पर होने वाली लंबी देरी को खत्म करना और रोजाना करीब तीन लाख लोगों के आवागमन को कम करना था। एक हिस्से का निर्माण भोपाल में निर्माणाधीन ’90 हिंदी वाले पुल’ के दोषपूर्ण डिजाइन मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। लोक निर्माण विभाग कर रहा था, जबकि दूसरे हिस्से का काम रेलवे कर रहा था। एक हिस्से का निर्माण लोक निर्माण विभाग कर रहा था, जबकि दूसरे हिस्से का काम रेलवे
कर रहा था।
पिछले सप्ताह लोक निर्माण विभाग ने करीब 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए इस रेलवे पुल पर वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के करने के लिए समाधान तलाशने हेतु एक समिति का गठन किया था। इस मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम ने अपनी रपट में कहा है कि जमीन की उपलब्धता न होने के कारण इस तरह का असामान्य डिजाइन अपनाया गया। पुल में आवश्यक सुधार के लिए कमेटी बनाई गयी है। सुधार केबाद ही पुल का लोकार्पण किया जाएगा।jansa

