
जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है धर्म का पाखंडी नकाब ओढ़कर अरमान जगाने वाले तथाकथित धार्मिक लोगों को अपराध करने की छूट मिल गई उसका सबसे ज्यादा खतरनाक परिणाम शहडोल के मोहन राम मंदिर में देखने को मिला धार्मिक नकाबपोश वर्ग मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट के आदेश को भी अनदेखा करने का साहस किया क्योंकि उसे यह आभास है की हाई कोर्ट में न्यायपालिका का आदेश सत्ता के सामने दम तोड़ देता है और ऐसा शहडोल में मोहन राम मंदिर के मामले में फिलहाल तो होता दिख रहा है तो जाने की आखिर क्या हुआ जब हाई कोर्ट के निर्देश में गठित स्वतंत्र कमेटी को धार्मिक नकाबपोश प्र
भार नहीं दिया उससे क्या परिणाम सामने आए और कैसे करोड़ों रुपए की खसरा नंबर 138 की 33 डिसमिल जमीन हेर फेर कर कब्जा करने का काम हुआ।जब स्वतंत्र कमेटी, रघुनाथ जी राम जानकी शिव पार्वतीमोहन राम ट्रस्ट के आवेदन पर 20-3-18 को तहसीलदार सोहागपुर द्वारा मंदिर ट्रस्टमें गैर कानूनी तरीके कब्जा करके संपूर्ण प्रबंधन अपने हाथ में रखने वाले लव कुश पांडे के खिलाफ जब स्थगन आदेश पारित किया गया कि उसके द्वारा मंदिर की 33डेसिमल जमीन में जो अवैध ढंग से तोड़फोड़ कर निर्माण कराया जा रहा है वह गैर कानूनी है और इसलिए तत्काल कार्य को रोकते हुए लव कुश अपना पक्ष पेशकरें.
पहले तो तहसीलदार सोहागपुर जो पदेन सदस्य भी हैं स्वतंत्र कमेटी के, उन्हें लव कुश पांडे अपनी तानाशाही और गुंडागर्दी से कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया बाद में यह फाइल कैसे गुम हो गई…? इसका पता नहीं चला. ठीक उसी प्रकार न्यायालय तहसील ऑफिस से प्रकरण फाइल का गुम हो जाना आश्चर्य की बात नहीं थी जिस प्रकार नगर पालिका में जब यह पाया गया 1972 में पांडे जी मोहन राम मंदिर यानी मोहन राम मंदिर ट्रस्ट के लिए जारी नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र जो की 33 डिसमिल जमीन के लिए 1965 के आवेदन के आधार पर मोहन राम मंदिर के लिए जारी हुए थे उसकी कॉपी, मंदिर ट्रस्ट में रखे हुए रिकॉर्ड से निकलकर 33 डिसमिल जमीन के लिए उपयोग किया इसकी जानकारी आने के बाद ही जबकि स्पष्ट तौर पर उक्त शहडोल नगर की आराजी खसरा नंबर 138 की 33 डिसमिल जमीन 25.9 .1965 को पोही मोहन राम मंदिर की प्रॉपर्टी हो चुकी थी और उसका बताए थे डायवर्सन कराया गया था जिसका राजस्व प्रकरण अ-2/857 रहा इस तरह प्रपत्र भी कुल जमीन 30702 वर्ग फुट जिसमें अन्य जमीन में भी शामिल थीं कार डायवर्सन कराया गया था। किसका बकायदे पुनर निर्धारण प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया था और आवश्यकता पड़ने पर 9-5-1972 को अधीक्षक भू अभिलेख शहडोल द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था जिसमें सांप तौर पर लिखा गया था कि उक्त खसरा नंबर 138 की 33 डिसमिल जमीन श्री मंदिर रघुनाथ जी पांडे मोहन राम ट्रस्ट कमेटी शहडोल धारक एवं स्वात्वाधिकारी हैं। यही कागज लवकुश के द्वारा मंदिर में अवैध कब्जा करके रहते हुए अपने पास छुपा लिया गया इसमें पूरे दस्तावेज ही शामिल रहे और बाद में इसका दुरुपयोग करते हुए नगर पालिका शहडोल में इस परफेक्ट को दिखाकर तथाकथित राम जानकी धार्मिक मंदिर संस्था चित्रकूट के लिए निर्माण मरम्मत की अनुमति ली गई।
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बकि कड़वा सत्य यह है की राम जानकी धार्मिक संस्था चित्रकूट नाम की कोई संस्था रजिस्टर्ड ही नहीं है। जी पुरानी लंका चित्रकूट का संबंध मोहन राम मंदिर से है जिसमें रोहिणी प्रपन्नाचार्य स्वयं को महंत बताते हैं उसका वास्तविक नाम जो सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है
वह पुरानी लंका चित्रकूट के नाम से रजिस्टर्ड ट्रस्ट दर्ज है। ना की राम जानकी धार्मिक संस्था के नाम से।
इस तरह स्पष्ट है की भ्रम पैदा करके मोहन राम मंदिर जिसमें लव कुश और उसके सहयोगी अवैध कब्जा करके रह रहे हैं उन सब ने सहमति और संभवत एक राय होकर मोहन राम मंदिर ट्रस्ट शहडोल की खसरा
नंबर 138 की 33 डिसमिल जमीन जो वर्तमान में करोड़ों रुपए की है उसे पर भ्रम पैदा करके एक फर्जी संस्था के नाम से भू अभिलेख में दर्ज करा परिवर्तन दिया। और जब इस बात का संज्ञान स्वतंत्र कमेटी को हुआ उसने तहसीलदार सोहागपुर से इसकी शिकायत की जिसके परिणाम स्वरूप तब अवैध रूप उक्त 33 डिसमिल जमीन में कई निर्मित भवन में कंस्ट्रक्शन को तोड़फोड़ कर सामग्री गायब करते हुए तथा प्रतीत नए निर्माण के नाम पर कब्जा कर करने वाले लव कुश के विरुद्ध तहसील द्वारा इस सगन आदेश जारी किया गया। किंतु लवकुश और उसके साथ सहयोगी जो सत्ता से जुड़े थे मिलजुल कर तहसीलदार न्यायालय शहडोल की युक्त फाइल को गायब कर दिया गया और इसीलिए अब बार-बार हाईकोर्ट के आदेश पालन 2012 में कोई भी उन विभागीय अधिकारी लवकुश को पत्र जारी करता है की प्रभार स्वतंत्र कमेटी को तीन दिन के अंदर सौंप दिया जाए। लव कुश भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोगों का प्रभाव दिखाकर गत 12 वर्ष बाद भी आज तक प्रभार स्वतंत्र कमेटी को नहीं दिया क्योंकि ऐसा करने पर उक्त सभी दस्तावेज जो उसने चोरी छिपे अपने पास कब्जा कर रखा है और मोहन राम मंदिर जमीनों को खुर्द बुर्द कर रहा है वह उसमें पकड़ा जाएगा जो एक गंभीर अपराध है इसके साथ ही जो करोड़ों रुपए चांदी के रूप में फिर किए हैं उसमें भी उसकी जवाब दे ही सुनिश्चित हो जाएगी और इसीलिए वह सत्ता धारी लोगों से मिलकर का दबाव बनाता रहा ताकि उसे हाई कोर्ट के निर्देश में गठित स्वतंत्र समिति को प्रभार ना देना पड़े। यह शहडोल के आम नागरिकों का दुर्भाग्य है की इतनी बड़ी भू माफिया गिरी मंदिर परिसर से होती रहे और आम नागरिक धार्मिक अंधविश्वास में मंदिर को अप्रत्यक्ष तरीके से लूटने में सहयोग करता रहा।
मजे की बात यह है कि जब नगर पालिका परिषद से उक्त अनापत्ति के लिए पूरी प्रकरण फाइल की छाया प्रति सूचना के अधिकार अंतर्गत चाहा गया तो वह प्रकरण में लगाया गया अनापत्ति नगरपालिका परिषद से गायब हो गया यानी माफिया का दबदबा चारों तरफ बरकरार रहा और उस पर भी नगर पालिका को जब यह आवेदन दिया गया की सड़क पर किनारे स्थित नगर पालिका की पब्लिक बोरिंग से मोटर लगाकर इस 33 डिसमिल जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कार्य कर कब्जा किया जा रहा है नगर पालिका परिषद के तत्कालीन पदाधिकारी और अधिकारियों के द्वारा बोरिंग को सुरक्षित नहीं कराया गया यानी परिषद में बैठा हुआ कोई भ्रष्ट नेता मोहन राम मंदिर की जमीन पर लव कुश कोकब्जा करने के लिए संरक्षित किया… निश्चित तौर पर मोहन राम मंदिर की 33 डिसमिल करोड़ों रुपए की जमीन के बंदर बांट में उस नेता को भी काफी कुछ मिला होगा यूं ही कोई भ्रष्टाचार में उपकार नहीं करता।
माफिया की की बढ़ती हुई ताकत और उसके वर्चस्व कीपूरी जानकारी तत्कालीन एसडीएम धर्मेंद्र मिश्रा को दी गई उन्होंने अपने जमीर को जिंदा करते हुए कर्तव्य निष्ठा कर, लव कुश को तत्काल मंदिर का प्रभार हाई कोर्ट के 2012 केआदेश अनुसार स्वतंत्र कमेटी को सौंपने का पत्र दिया, लेकिन तब तक शायद भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ माफिया नुमा नेताओं की निगाह मोहन राम मंदिर पर पड़ चुकी थी उन्होंने फिर दबाव बनाया और हाईकोर्ट के 2012 के आदेश के पालन में स्वतंत्र कमेटी को लवकुश से प्रभार नहीं मिल पाया बल्कि लव कुश मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय में गैरकानूनी तरीके से कब्जा कर पूरे रिकॉर्ड अपने हाथ में ले लिया और वह उसका दुरुपयोग तथा कथित फर्जी धार्मिक संस्था के नाम पर 33 डिसमिल जमीन को लूटने के लिए करता रहा। सवाल यह नहीं है की वह मंदिर ट्रस्ट की जुड़ी शहडोल और कटनीकी तमाम जमीन पर लूटपाट कर रहा था उसे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तरीके से खुर्द बुद्ध कर रहा था सवाल यह है की जिम्मेदार स्वतंत्र कमेटी और स्वतंत्र कमेटी को बनाने वाली अनविभागीय अधिकारी सुहागपुर इतना कमजोर औरनिरीही और लाचार कैसे बन गया कि वह मंदिर की करोड़ों रुपए की जमीन को खास तौर से शहडोल की 33 डिसमिल जमीन को लव कुश को लूटने दिया और आज भी उसका दखल मंदिर परिसर के अंदर गैरकानूनी प्रबंधन पर कब्जा करके अपना शातिर चाल चलने का बरकरार है जिसे आम जनता अच्छी तरह से अब समझ गई है गैर कानूनी निर्माण हो या फिर मंदिर संपत्ति की आराजी में हस्तक्षेप हो लव कुश के द्वारा जमकर नंगा नाच किया जाता रहा। जिसमें मंदिर ट्रस्ट की डीड के विपरीत जाकर किसी गुप्ता परिवार से काफी कुछ लेनदेन कर दुर्गा प्रतिमा को स्थापित करना है हो चाहे तालाब के पास झूलेलाल के मूर्ति को स्थापित करना लवकुश के बाएं हाथ का खेल हो गया खुद की दूध डेरी चलना हो या फिर पुजारी नियुक्त करना हो लवकुश के निर्देश पर काम होता रहा। इसका बड़ा बुरा परिणाम यह हुआ की मंदिर के अंदर एक माफिया काकस बनाकर 12 साल से मंदिर के नाम पर जमकर चंदाखोरी चलती रही और लव कुश कथित कई जगह जमीन और प्लाट्स बनाने का काम करता रहा । यदि उसे एफिडेविट लिया जाए तो पता चलेगा कि चित्रकूट से आया यह गरीब शहडोल में 2012के अमीर आदमी बन गया।
सवाल यह है हाई कोर्ट के आदेश पालन न कर पाने पर प्रशासन क्यों मजबूर रहा निश्चित तौर पर सत्ता के दबावके बिना मोहन राम मंदिर की जमीन खुर्द बुर्द कैसे होती चली गई कौन हैइसका जिम्मेदार और शहडोल का आम नागरिक-मुख-बधिर बना रहा क्योंकि उसने भी स्वीकार कर लिया था की सत्ता में जो रहता है उसे कुछ तो अति करने की छूट होती है शायद इसीलिए मोहन राम मंदिर में हाई कोर्टआदेश का पालन नहीं हो सका.


