100 वर्ष के जश्न में शामिल होने का निर्णय कर लिया है जहां गांधी भी होंगे और गोंडसे भी, इसलिए जलना कैंसल…-( त्रिलोकीनाथ )-

इस बार रावण 100 वर्ष के जश्न में शामिल होने का निर्णय कर लिया है जहां गांधी भी होंगे और गोंडसे भी, इसलिए जलना कैंसल…
इस बार 2 अक्टूबर का अजीबोगरीब संयोग: गांधी, गोडसे, वांगचुक और रावण
इस बार 2 अक्टूबर, भारत के लिए एक ऐसा दिन जो इतिहास, विरोधाभास और अब तो थोड़ा-सा तमाशा भी लेकर आता है। यह दिन महात्मा गांधी का जन्मदिन है, लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन है, और इस बार तो दशहरा भी उसी दिन ठिठुरता हुआ आ टपका है। लेकिन रुकिए, कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इस बार का 2 अक्टूबर एक अनोखा संगम लेकर आया है—राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 साल पूरे होने का जश्न, और वह भी उसी दिन जब रावण ने पानी में गोता लगाकर अपने जलने के सालाना कार्यक्रम को कैंसिल कर दिया। यह सब इतना अजीब है कि लगता है जैसे इतिहास, मिथक और समकालीन सियासत ने एक साथ मिलकर एक सुपरहिट मसाला फिल्म की स्क्रिप्ट लिख डाली हो।
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रावण का विद्रोह: “मैं जलूंगा नहीं, देखूंगा!”
दिल्ली से शहडोल तक, रावण ने इस बार कुछ ज्यादा ही ड्रामा कर दिय…2 अक्टूबर को भारत के लिए महात्मा गांधी का जन्मदिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण है वह इसलिए भी क्योंकि इसी दिन हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्मदिन है लेकिन कल का 2 अक्टूबर अजीबोगरीब संयोग लेकर आ रहा है। 2 अक्टूबर को दशहरा भी है और दशहरा में भारतीय जनता पार्टी की पित्र संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा एक एनजीओ का 100 वर्ष पूर्ण होने का समय भी है। दिल्ली में रावण ने इस अवसर पर पानी में गोता लगा दिया जिससे लाखों रुपए की क्षति हो गई क्योंकि रावण संघ के कार्यक्रम को देखने के लिए जलना नहीं चाहता, इसी तरह शहडोल में भी रावण पानी में भीग गया कहना चाहिए डूब गया तो दिल्ली से शहडोल तक स्पष्ट हुआ कि कल रावण संघ के 100 वर्ष के कार्यक्रम में जाएगा क्योंकि वहां पर महात्मा गांधी और उनकी हत्या करने वाला आतंकवादी नाथूराम गोडसे भी इस जश्न को मना रहा होगा, इतना विरोधाभासी कंट्रोवर्सी वाला अवसर हजारों साल में कभी एक बार आता है और उस पर भी वे सब मिलकर रावण को जला देने में उतारू थे।
किसी ने कान में कह दिया रावण से देश में लोकतंत्र लागू है यह अत्याचार अब नहीं होना चाहिए उसे भी नागपुर का संघ का वह जश्न क्यों नहीं देखना चाहिए की कैसा होता होगा जब गांधी और गोंडसे दोनों ही एक ही मंच पर सवार होंगे।
75 साल की उम्र बीत जाने के बाद भी संघ प्रमुख भागवत उसे भूल जाना चाहेंगे क्योंकि यह रावण के कार्यकाल की बात थी, “प्राण जाए पर वचन न जाए..” अब अडानी और अंबानी के युग की बात है राजस्थान की कठपुतली का नृत्य, संघ के मंच में बेहद रोमांचक होगा। इसे और रोमांचकारी बनाने के लिए बतौर गिफ्ट देते हुए भाजपा ने आरएसएस को लद्दाख के गांधीवादी सोनम वांगचुक को देशद्रोही का ठप्पा लगाकर राजस्थान में जेल में डाल दिया है।
जब वोटचोर-वोटचोर का खेल बिहार में केंचुआ के साथ हो रहा था तब खाली मंच में किसी ने कहते हैं मां की गाली दे दी उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन और रूस चले गए लौट के आए तो उन्हें याद आया की मां की गाली का बदला बिहार की जनता को लेना चाहिए क्योंकि वह उनकी भी मां है. क्योंकि रिश्ते में प्रधानमंत्री बिहारी के भाई हैं क्योंकि पूरे बिहार ट्रेन से भर भर के गुजरात जाते हैं मजदूरी करने अपने भाईयों के यहां इसलिए भी बिहार को मां की गली का बदला लेना चाहिए वोटचोर-वोटचोर के खेल में यह प्रधानमंत्री का सियासती दांव था जो राहुल गांधी के हाइड्रोजन बम की तरह आया तो जरूर लेकिन फुस्शी हो गया।
इसलिए शंघ के कार्यक्रम में एक बौद्ध दलित महिला जो अंबेडकरवादी हैं और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया गवई मां है उन्हें भी जस्न में शामिल होने का निमंत्रण नुमा अपवाह सामने आई क्योंकि गांधी, गोंडसे के अलावा हाफ पेंट से फुल पैंट तक प्रगति करने वाले भागवत जी चाहते थे की प्रगतिशील मंच में बौद्ध दलित महिला भी शामिल हो ताकि रंग मंच 100 वर्ष के जश्न जैसा दिखाई दे लेकिन इस मां ने अपनी जमीर को उम्र के चौथे पड़ाव में जिंदा किया और जश्ने 100 वर्ष में शामिल होने की खबर को खारिज कर दिया रावण के लिए यह और रोमांचकारी था इसलिए भी वह अपने दरबारी इंद्र को मेघ वर्षा कर इस पानी में डूब गया कि अब जलना कैंसिल क्योंकि संघ के मंच को जलवा को देखना है
इसलिए इस
कंट्रोवर्सी का रहस्य और रोमांच और बढ़ जाएगा.. नागपुर में जब यह सुनिश्चित कर पाना बड़ा मुश्किल हो जाएगा की गांधी महत्वपूर्ण है या गोंडसे। इस विवाद का जन्म के पहले ही गांधीवादी आंदोलन के नायक सोनम वांगचुक को देशद्रोही बताकर इस अफवाह को जोरदार हवा देकर इस बात की गारंटी भी की जा रही है गांधी और गांधीवादी आंदोलन मर चुका है।
इतने रोमांचक घटनाक्रम को देखने के पहले रावण को जला दिया जाए वह उसे गवारा नहीं था इसलिए अपने शासन को पुन स्थापित करते हुए लंका पति ने इंद्र को आदेश दिया कि जहां-जहां मेरे पुतले रखे हैं कि उन्हें जलाया जाएगा सब जगह वर्षा कर दो.. बजट बिगाड़ दो क्योंकि कल सबसे पहले संघियों के मंच को देखना होगा.. इसलिए सालाना कार्यक्रम मरना कैंसल। यह कहते हुए रावण ने रोमांचकारी अनुभव का दास्तान अनुभव करते हुए गर्व करने लगा ‘गर्व से कहो मैं रावण हूं लद्दाख के गांधीवादी सोनम वांगचुक नहीं……”
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