दीपावली की शुभकामनाएँ: प्रकाश की विजय और लोकतंत्र की आशा

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दीपावली की उज्ज्वल शुभकामनाएँ: प्रकाश की विजय और लोकतंत्र की आशा

प्रिय मित्रों,
    इस दीपावली के पावन अवसर पर, जब आकाश दीयों की मंदमंद ज्योति से जगमगा उठता है, हम सब एक साथ खड़े हैं—उम्मीद की किरणों के बीच। वर्तमान राजनीतिक परिवेश में चुनौतियाँ तो हैं ही: सोनम वांगचुक जैसे समर्पित पर्यावरण कार्यकर्ता की गंभीर आरोपों नजरबंदी के कारण जोधपुर जेल में हैं, जहाँ उनकी पत्नी गीतांजली अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई है। इलेक्टोरल बॉन्ड्स पर सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक संवैधानिक असंवैधानिक घोषणा के बाद भी, राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता की मांग बनी हुई है, जो लोकतंत्र की नींव को मजबूत बनाने का संकल्प दर्शाती है बावजूद इलेक्ट्रिकल बंद के फंड को ना तो सीज किया गया ना ही उसे पर कोई दंडात्मक निर्णय प्रक्रिया अपनाई गई। वोटिंग प्रक्रिया पर उठने वाले सवाल, जैसे कर्नाटक और हरियाणा में आरोपित मतदाता सूची में अनियमितताएँ, हमें चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को और सशक्त बनाने की याद दिलाते हैं।

भ्रष्टाचार के खुलेआम चेहरे हमें विचलित करते हैं, लेकिन ये ही वे अंधकार हैं जो प्रकाश की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। और फिर बिहार का आगामी विधानसभा चुनाव, जो 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होगा तथा 14 नवंबर को परिणाम घोषित होंगे, वह न केवल एक राज्य का भविष्य तय करेगा, बल्कि पूरे भारत के लोकतंत्र के लिए एक क्रांतिकारी मार्गदर्शक सिद्ध
होगा खाने को यह बिहार का विधानसभा का चुनाव है लेकिन स्पष्ट है कि इस चुनाव के निर्णय भारतीय लोकसभा की मध्यवधि चुनाव से कमजोर नहीं होंगे।—जहाँ बिहार की 13 करोड़ जनता की आवाज़ देश भविष्य के लिए निर्णायक बनेगी, और नई उम्मीदें जन्म लेंगी।
  दीपावली हमें सिखाती है कि रावण का अंधकार भी राम के बाण से नष्ट हो जाता है। आज, जब सोनम वांगचुक की तरह सत्य के सिपाही बंधन में हैं, तो हमें उनके संघर्ष से प्रेरणा लेनी चाहिए यह आजाद भारत में अंग्रेजी की गुलामी को प्रयोगशाला के रूप में प्रमाणित करता है—वह संघर्ष जो लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए है, जो पूरे हिमालय और भारत की साझा विरासत है। इलेक्टोरल बॉन्ड्स के फैसले ने हमें सशक्त बनाया है
अब समय है कि हम पारदर्शिता की मशाल जलाएँ, ताकि राजनीतिक दान की धारा जनहित में बहने लगे। वोट चोरी के आरोपों पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया—जैसे राहुल गांधी के दावों पर सबूत मांगना—हमें सतर्क रहने का संदेश देती है, लेकिन साथ ही यह विश्वास भी जगाती है कि अगर संस्था प्रमुख को कानूनी सुरक्षा में असीमित अधिकार दे देंगे तो संस्थाएँ जवाबदेह से ज्यादा तानाशाह बन जाती हैं और इसलिए सुधार संभव है संभव हैं।
भ्रष्टाचार, जो पारदर्शी रूप से सामने आ रहा है, वास्तव में एक अवसर है—सफाई का, नई शुरुआत का।
और बिहार? वह चुनाव भारत के लोकतंत्र का आईना बनेगा। एनडीए और महागठबंधन के बीच यह मुकाबला, जिसमें बीजेपी ने 71 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है और कांग्रेस ने अपनी रणनीति साझा की है हमें दिखाएगा कि कैसे जनादेश ही मंडल तोड़ सकता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में आए बदलाव—जैसे 38 लाख की कमी लेकिन 21 लाख नए नामों का जुड़ना—यह दर्शाते हैं कि प्रक्रिया अजीबो गरीब तरीके से विकसित हो रही है, क्या अधिक समावेशी बन रही है। बिहार का परिणाम क्रांतिकारी होगा, क्योंकि यह साबित करेगा कि लोकतंत्र की ताकत अंततः जनता के हाथों में है—वह जनता जो मतदान के माध्यम से इतिहास रचती है।
इस दीपावली पर, आइए हम नकारात्मकता को मात देकर सकारात्मकता का उत्सव मनाएँ। सोनम वांगचुक की जेल यात्रा हमें साहस सिखाए, इलेक्टोरल बॉन्ड्स का फैसला न्याय की जीत का प्रतीक बने, वोटिंग की चुनौतियाँ हमें जागरूक बनाएँ, भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई मजबूत हो, और बिहार का चुनाव हमें नई दिशा दिखाए। दीये जलाएँ, पटाखे फोड़ें, मिठाइयाँ बाँटें—और हर पटाखे की चिंगारी में देखें लोकतंत्र की चमक। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि हर अंधेरी रात के बाद सुबह आती है, हर संघर्ष के बाद विजय मिलती है।शहडोल पांचवी अनुसूची प्रभावित क्षेत्र है यदि यहां पर 200 दिनों से कोई धरना प्रदर्शन चल रहा है और उसका निवारण नहीं हो रहा है यह अशुभ संकेत है पांचवी अनुसूची क्षेत्र का भविष्य संवेदनहीन समाज के हाथों में है इस पर भी शुभ कारक निर्णय क्यों नहीं हुए….?

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें, और प्रकाश फैलाते रहें।
त्रिलोकी नाथ
संपादक
विजयआश्रम शहडोल

 


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