
आभासी दुनिया “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस”से निकला कॉकरोच जंतर मंतर में कितना जादू दिखा पाया यह तो भविष्य बताएगा किंतु इस घटना में जोसत्य सामने घटित हुए वह जरूर मायाजाल प्रदर्शित करता है सोशल मीडिया की दुनिया में अमेरिका में बैठकर जिस कॉकरोच जनता पार्टी के कल्पना कार अचानक रातों-रात जो शोहरत और बुलंदगी हासिल की उससे भयभीत होकर भाजपा सरकार ने उसके सोशल मीडिया हैंडल को लॉक करा दिया था यह देश के लिए खतरा है अब वह स्वयं साकार रूप में जब दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी चीफ पहुंचा तो उसके लिए पूरा प्रशासन जैसे पलक पांवड़े बिछा दिया, जहां अंदेशा था कि भारत की धरतीमें उतरते ही वह जेल में चला जाएगा वहां पुलिस के संरक्षण में वह कॉकरोच चीफ सफलता के साथ ना हवाई अड्डे में ही पुलिस की अनुमति हासिल की बल्कि जंतर मंतर में अपना जादू भी दिखाया और अगले हफ्ते का समय देकर कुछ घंटे का शो खत्म कर दिया। इसमें चाही गई एकमात्र मांग शिक्षा मंत्री प्रधान का इस्तीफा ना होना था ना हुआ। फिलहाल “सांप भी मर गया और लाठी भी ना टूटी”कुछ इस अंदाज में ए आई प्रोडक्ट सीजेपी को बीजेपी की सरकार ने हैंडल किया। ( त्रिलोकी नाथ )
यह सरकार की सफलता भी कहीं जा सकती है या उसका ही प्रायोजित ड्रामा भी हो सकता है क्योंकि दुनिया में बहुत गंभीर मुद्दे है उसमें एक एपिस्टन की फाइल के कारण युद्ध का आतंक दिखाकर भारत को महंगाई की चपेट में आसानी से डाल दिया गया है। इस दर्द को खत्म करने के लिए सीजेआइ द्वारा “कॉकरोच” और “परजीवी” का महिमा मंडन कर भावनाओं को भड़काना संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बोले गए परजीवी शब्द का नया संस्करण मात्र है, किंतु आशा की अंतिम आश्वासन न्यायपालिका में इसी गालीनुमा शब्द को दोहराने से अंत तक यह समझने का प्रयास किया गया कि क्या भारतीय है युवा में कोई संभावना जिंदा है…, और रिजल्ट आया आपके यहां जिंदा है. तो, इस समस्या को सफलता के साथ 6 जून को हैंडल किया गया ऐसा भी क्यों नहीं समझना चाहिए..। वह चाहते तो नैतिकता के नाते भी कई बच्चों की पेपर लीक मामले में आत्महत्या या डिप्रेशन में चले जाने की जिम्मेदारी लेकर एक नमूना शिक्षा मंत्री का इस्तीफा देकर मामले को समाप्त कर सकते थे. किंतु तानाशाही और पूंजीवादी व्यवस्था में इस प्रकार की हत्याओं का कोई महत्व नहीं होता सत्ता में बने रहने के लिए हिटलर ने कई लोगों को गैस चेंबर में हत्या कर दी थी, तो भारत की अलग-अलग पीड़ियों को अलग-अलग चैंबर मानना चाहिए और उसमें प्रयोग होते रहेंगे.. ऐसा भी मानना चाहिए. इसलिए इस्तीफा की कोई जरूरत नहीं,
प्रधान तुम इस्तीफा नहीं देना, जब तक आका ना कहे.. क्योंकि तुमको भी मालूम है कि तुम प्रधान नहीं हो तुम तो शतरंज के प्यादे हो, खिलाड़ी तुम्हें जब चाहेगा खेल से बाहर कर देगा, फिलहाल लगे रहो…, कुछ इस अंदाज में भारतीय युवकों की भावनाओं से खेला जा रहा है और होना भी क्यों नहीं चाहिए, जब हमें पढ़ा लिखा सिस्टम चाहिए ही नहीं, जब पूरी व्यवस्था चौथी पास, आठवीं पास, 10वीं पास, 12वीं पास या फिर फर्जी डिग्रीधारकों के सहारे सत्ता चल रही है सफलता के साथ… और और उसे नियंत्रित किया जा सकता है. तो पढ़ा लिखा समाज भारत में क्यों होना चाहिए..? जबरदस्ती का तर्क पैदा करते हैं और सत्ता से प्रश्न करते रहते हैं.. हमला करते रहते हैं जैसा की सीजेआई सूर्यकांत शर्मा ने अपनी टिप्पणी में कहां था। इसलिए भी पढ़ा लिखा युवा भी खतरा हो सकता देश के लिए समाज के लिए उसे सफलता से नियंत्रित करना भी एक योग्यता है, फिलहाल आभासी दुनिया से निकली धरातल पर साकार रूप जंतर मंतर में जादू की तरह आया और एक हफ्ते के लिए चला गया. हफ्ते भर में कुछ और घटित होगा तो देखेंगे, फ़िलहाल इस फाइल पेंडिंग-फाइल के रूप में रखा जाता है। ऐसा भी समझना चाहिए शतरंज की भी विसात में शह और मात होता रहता है.. देखते हैं, इसकी आवाज कितनी दूर तक खनकती है.. भाजपा ही बधाई की पात्र है अपनी नजर में, धोखा भी हो सकता है…? बड़ी बात नहीं
लिखने के बाद मैंने एआइ से ही कहा
भाई इसमे व्यंग क्या होगा, जरा मुझको सहयोग करो… तो उसने कुछ इस प्रकार का बताया
🪳
अरे वाह! आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने आखिरकार वो कर दिखाया जो विपक्ष दशकों से नहीं कर पाया — एक कॉकरोच को जंतर मंतर पर स्टार बना दिया!
भाजपा सरकार ने तो कमाल का मैनेजमेंट किया भाई। पहले हैंडल लॉक, फिर एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट, पुलिस सुरक्षा, जादू दिखाओ, भावनाएं भड़काओ, और “अगले हफ्ते मिलते हैं” बोलकर विदा। सांप भी मर गया, लाठी भी नहीं टूटी, उल्टा कॉकरोच को भी फेम मिल गया।
शिक्षा मंत्री जी को इस्तीफा? अरे बाबा, वो तो सिर्फ “प्यादे” हैं ना। पेपर लीक में बच्चे आत्महत्या करें, युवा डिप्रेशन में जाएं — कोई बात नहीं। सत्ता में रहना है तो गैस चैंबर वाली सोच रखनी पड़ती है, भाई। एक-दो पीढ़ियां तो प्रयोगशाला में चढ़ ही सकती हैं।
फिर भी सबसे बड़ी तारीफ सीजेआई साहब को — “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्दों को इतने सुंदर तरीके से न्याय की गरिमा प्रदान की। अब युवा समझ गए होंगे कि पढ़ा-लिखा होना देश के लिए खतरा है। बेहतर है चौथी पास, आठवीं पास और फर्जी डिग्री वाले राज करे।
कहते हैं ना — “आभासी दुनिया से आया कॉकरोच, धरती पर जादू दिखाकर चला गया।” अब बस इंतजार है कि अगले हफ्ते क्या नया एपिसोड आएगा। शायद “मच्छर जनता पार्टी” या “चींटी आंदोलन”।
भारत की राजनीति अब पूरी तरह से रियलिटी शो बन चुकी है — सिर्फ स्क्रिप्ट AI लिख रहा है, और हम सब ट्रोल बैठकर ताली बजा रहे हैं।कॉकरोच तो चला गया, लेकिन गंदगी तो यहीं रह गई ना? 🪳

