ग्रेट निकोबार द्वीप-अगले पांच वर्षों में भव्य ग्रीनफील्ड सुपर एयरपोर्ट;1.5 करोड़ (150 लाख) पेड़ काटे जाएंगे, कोरल रीफ्स नष्ट होंगे-राहुल गांधी

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सामरिक और नागरिक मोर्चे पर भारत की बढ़ेगी ताकत

नई दिल्ली(ईएमएस)।... रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ग्रेट निकोबार द्वीप पर अगले पांच वर्षों में एक भव्य ग्रीनफील्ड सुपर एयरपोर्ट बनकर तैयार हो सकता है। इस बेहद खास परियोजना को पिछले साल नवंबर में कैबिनेट की मंजूरी मिली थी। रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह कोई आम हवाई अड्डा नहीं होगा, बल्कि इसका संचालन पूरी तरह भारतीय नौसेना के हाथों में होगा। इस एयरपोर्ट का उपयोग नागरिक और सैन्य, दोनों ही उद्देश्यों के लिए समान रूप से किया जाएगा। यह ड्यूल-यूज एयरपोर्ट समंदर में भारत की समुद्री निगरानी क्षमता और ऑपरेशनल पहुंच को कई गुना मजबूत करने वाला है। इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके बनने से भारत को हिंद महासागर में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखने, सैन्य संसाधनों की तेज आवाजाही सुनिश्चित करने और किसी भी ऑपरेशन को तुरंत सपोर्ट देने की अचूक क्षमता मिलेगी। यह एयरपोर्ट अकेले नहीं बन रहा है, बल्कि ग्रेट निकोबार के ‘समग्र विकास’के लिए इसके साथ तीन अन्य बड़ी और आपस में जुड़ी परियोजनाएं भी पाइपलाइन में हैं, जिनमें एक इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक ग्रीनफील्ड टाउनशिप और एक एलएनजी आधारित पावर प्लांट शामिल है। इन चारों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर लगभग 81,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन द्वीपों के आसपास समुद्र में बड़े पैमाने पर ‘हाइड्रोकार्बन भंडार’(तेल और गैस) होने की भी प्रबल संभावना है, जो इस पूरे प्रोजेक्ट के आर्थिक महत्व को और ज्यादा बढ़ा देता है। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो ग्रेट निकोबार द्वीप ‘सिक्स डिग्री चैनल’ से महज 40 किलोमीटर दूर है। यह वही संवेदनशील समुद्री रास्ता है जो अदन की खाड़ी से मलक्का जलडमरूमध्य तक फैला हुआ है। दुनिया का दो-तिहाई तेल परिवहन और आधा कंटेनर ट्रैफिक इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हाल के दिनों में हिंद महासागर क्षेत्र में कई बाहरी शक्तियों ने अपनी सैन्य और आर्थिक दखल बढ़ाई है, जिसे देखते हुए यह सुपर एयरपोर्ट और पोर्ट प्रोजेक्ट दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक स्थिति को बेहद मजबूत करेगा। वर्तमान में इन विकास परियोजनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। कंटेनर पोर्ट पर समीक्षा पूरी हो चुकी है और कैबिनेट नोट का ड्राफ्ट वित्त मंत्रालय को भेजा जा चुका है। वहीं, पावर प्लांट की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। कहां तक पहुंची बात ग्रेट निकोबार की इन विकास परियोजनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। कंटेनर पोर्ट (आईसीटीपी) पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी की समीक्षा पूरी हो चुकी है और कैबिनेट नोट का ड्राफ्ट वित्त मंत्रालय को भेज दिया गया है। टाउनशिप प्रोजेक्ट पर पिछले हफ्ते एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी की अहम बैठक हो चुकी है। एलएनजी आधारित पावर प्लांट की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार है, जिसे जल्द ही एनटीपीसी बोर्ड से मंजूरी मिल जाएगी।

Watch: Rahul Gandhi does scuba diving in Nicobar, claims PM Modi's project will destroy 1.5 crore treesराहुल गांधी ने हाल ही में (अप्रैल 2026 में) ग्रेट निकोबार द्वीप का दौरा किया और वहाँ की प्राचीन जंगलों, कोरल रीफ्स तथा जैव विविधता को देखकर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने इस परियोजना की तीखी आलोचना की है।
मुख्य बातें जो राहुल गांधी ने कहीं:
परियोजना रक्षा  से नहीं जुड़ी: मोदी सरकार दावा करती है कि यह रणनीतिक और सुरक्षा के लिए है, लेकिन राहुल गांधी ने इसे झूठ बताया। उन्होंने कहा कि INS Baaz का विस्तार करके सुरक्षा मजबूत की जा सकती है, जिसका वे पूरा समर्थन करेंगे। असल में यह एक व्यवसायी (अदानी) को होटल, कैसीनो और टूरिज्म प्रोजेक्ट के लिए फायदा पहुंचाने का मामला है।
पर्यावरणीय विनाश: 1.5 करोड़ (150 लाख) पेड़ काटे जाएंगे, कोरल रीफ्स नष्ट होंगे, आदिवासी समुदायों और पूर्व सैनिकों को उनकी जमीन से बेदखल किया जाएगा। उन्होंने कहा — “यह विकास नहीं, विकास की भाषा में सजा हुआ विनाश है।”
“सबसे बड़ा घोटाला और अपराध”: उन्होंने इसे भारत की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ “one of the biggest scams and gravest crimes” बताया। विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2026) पर उन्होंने एक वीडियो जारी किया और ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसमें युवाओं से अपील की कि वे हरियाली को लालच पर तरजीह दें।
राहुल गांधी ने कहा कि ग्रेट निकोबार को पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल टूरिज्म का वैश्विक मॉडल बनाया जा सकता है, लेकिन वर्तमान परियोजना इसे नष्ट कर देगी।


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