
ब्रिक्स ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की
नयी दिल्ली: 12 सितंबर (भाषा) भारत ने शनिवार को तब एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की, जब ब्रिक्स द्वारा अंगीकार किये गए ‘नयी दिल्ली घोषणापत्र’ में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की गई और देश-समर्थित सीमा-पार आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं की नीति अपनाने का आह्वान किया।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सत्र: समावेशी वैश्विक शासन और सुदृढ़ीकरण के दौरान प्रधानमंत्री की उद्घाटन टिप्पणी
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भारत की ब्रिक्स विचारधारा जन-केंद्रित और मानवता प्रथम दृष्टिकोण पर आधारित है। लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता हमारी प्राथमिकताएँ हैं। इन साज़िशों के साथ, हमने ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष बल दिया है।इसी सोच के साथ साढ़े तीन सौ से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। लगभग तीस शहरों में आपकी टीमों का स्वागत करने का अवसर मिला।
प्रधानमंत्री ने कहा इस वर्ष का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक अवलोकन है। हम ब्रिक्स की बीसवीं सालगिरह मना रहे हैं। हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान कर रहे हैं और सर्वसम्मति से आगे बढ़ रहे हैं। हम किसी के विरोध में नहीं, बल्कि युवाओं के साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। अगले बीस वर्षों के लिए हम एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करेंगे। इसकी शुरुआत हमें अपने खुद के वर्किंग सिस्टम से करनी होगी।हम एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बना सकते हैं। इसमें हर निर्णय के साथ नोडल बिंदु, समय-सीमा और कार्यान्वयन की स्थिति दर्ज की जा सकती है।
प्रधानमंत्री ने कहा ब्रिक्स को मजबूत करते हुए, हमें वैश्विक सुधार की दिशा भी तय करनी होगी। वैश्विक शासन की वर्तमान संरचना एक पिरामिड के रूप में दिखाई देती है। इसके ऊपरी भाग में शक्ति और निर्णय लेने वाले केंद्र हैं, और सिद्धांत भाग में वे देश हैं जो निर्णयों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार नहीं देते हैं।वैश्विक दक्षिण आज वैश्विक संकटों की अगली पंक्ति में है, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता पिछली पंक्ति में है। हमें इस “विशेषाधिकार के पिरामिड” को “साझेदारी के मंच” में बदलना है, जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो।
हम मिलकर वैश्विक शासन सुधार के दस प्रस्ताव तैयार करें, जिसमें हम अगले शिखर सम्मेलन तक एक ब्रिक्स सुधार रोडमैप के रूप में प्रस्ताव का प्रयास कर सकते हैं इस रोडमैप को बनाने में हमें तीन मुख्य निर्णय- प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण का ध्यान रखना होगा।पहला, रिप्रजेंटेशन के संबंध में मैं कहता हूं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार अब और टाला नहीं जा सकता। इस विषय पर पाठ-आधारित वार्ताओं को निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ा जाएगा।इसी तरह, वित्तीय संस्थानों में मतदान शक्ति, नेतृत्व की स्थिति और नीतिगत प्राथमिकताओं के अनुसार आज की विशिष्ट रियेलिटी होनी चाहिए। जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक प्रशासन की दिशा देने में भी भूमिका मिलनी चाहिए।
दूसरा, जवाबदेही। वैश्विक निवेशकों का विश्वास तब बना जब वे आवेदकों का प्रभावशाली समाधान करने में सक्षम होंगे। हमें सामूहिक प्रतिक्रिया की गति, पैमाने और अंतिम मील प्रभाव पर ध्यान देना होगा।नाविकों का वैश्विक व्यापार में बहुत बड़ा योगदान है, दूसरा बार कठिन समय में उन्हें शामिल करने की कमी महसूस होती है। मेरा प्रस्ताव है कि हम नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क क्या बना सकते हैं? इसके माध्यम से संबंधित देशों के समुद्री प्राधिकरणों और मिशनों को जोड़ा जाएगा। इससे संकट की चेतावनी, चिकित्सा सहायता, परिवार को सूचित करना और निकासी में सहायता दी जा सकती है।
और तीसरा मैं चाहता हूं नियम बनाना के संबंध में। भविष्य के वैश्विक नियमों को तय करने में समान भागीदारी सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।एआई, साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां, भविष्य के अवसरों के साथ भविष्य के नियम भी तय कर रहे हैं।हमें ग्लोबल साउथ को रूल-टेकर से रूल-शेपर बनाने का प्रयास करना होगा। ब्रिक्स के माध्यम से हम वैश्विक दक्षिण देश के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को बातचीत कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता प्रदान कर सकते हैं।सुखद संयोग से आज दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र दिवस है। इस दिन ग्लोबल साउथ को समर्पित एक विशेष निर्णय लिया गया। भारत इस विषय में लीड लेने के लिए तैयार है।भारत में आयोजित इस ब्रिक्स समिति का संदेश स्पष्ट होना चाहिए: यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा किया जाना चाहिए।(12 सितंबर 2026 पीआईबी दिल्ली )
ब्रिक्स घोषणापत्र में हुआ 1955 के बांडुंग सम्मेलन जिक्र, कांग्रेस ने नेहरू को याद किया
नयी दिल्ली: 12 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने 1955 के बांडुंग सम्मेलन के दौरान जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखे गए नोट्स और टिप्पणियों का जिक्र करते हुए शनिवार को कहा कि उस ऐतिहासिक सम्मेलन की भावना आज भी प्रासंगिक है, इसलिए इसका उल्लेख ब्रिक्स के नयी दिल्ली घोषणापत्र में भी किया गया।पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया और 1966 की हिंदी फिल्म “मेरा साया” के मशहूर गीत इसके शुरुआती अंतरे “तू जहां जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा” का उल्लेख किया।
जलवायु-संबंधी आपदाओं को कम करने के लिए नेपाल-चीन सहयोग आवश्यक : नेपाली विदेश मंत्री
काठमांडू: 12 सितंबर (भाषा) नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को कहा कि चीन के साथ रिश्तों को पारंपरिक सीमा प्रबंधन के दायरे से आगे ले जाकर, पर्यावरण सहयोग, जलवायु सुरक्षा और प्रौद्योगिकी, व्यापार एवं आधारभूत अवसंरचना पर आधारित रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर तक पहुंचाने की जरूरत है।
मप्र: शहडोल में सड़क नहीं होने के कारण बैलगाड़ी से घर ले जाया गया शव
शहडोल: 12 सितंबर (भाषा)
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव से करीब एक किलोमीटर पहले ही रुक गई, जिसके बाद 70 वर्षीय महिला का शव बैलगाड़ी से घर ले जाया गया।घटना ब्यौहारी जिला पंचायत के अंतर्गत अखेतपुर ग्राम पंचायत में हुई।
लातूर इतिहास के सबसे बुरे सूखे का सामना कर रहा है, जलाश्यों से जलापूर्ति संभव नहीं : भाजपा विधायक
लातूर (महाराष्ट्र): 12 सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक संभाजीराव पाटिल निलंगेकर ने शनिवार को कहा कि लातूर अपने इतिहास के सबसे भयानक सूखे का सामना कर रहा है। इस मानसून में कम बारिश होने की वजह से सभी 145 बड़े और छोटे जलाशयों में पानी का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि अब वहां से पानी की आपूर्ति करना मुमकिन नहीं है।
निलंगा क्षेत्र से विधायक निलंगेकर ने बताया कि इन सभी जलाश्यों में अब कुल मिलाकर केवल 14 प्रतिशत पानी ही बचा है, जिसके कारण राज्य सरकार ने उपलब्ध पानी मुख्य रूप से केवल पीने के लिए आरक्षित कर दिया है।

