व्योहारी की बेईमान गिरी:कमलनाथ और दिग्विजय बेईमान -शिवराज

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व्योहारी|"न प‍ता मिला, न भेजने वाला आदमी" : कांग्रेस के '50% कमीशन' वाले आरोप पर CM शिवराज का पलटवारभारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में ही शहडोल जिले का व्योहारी विकासखंड और सीधी लोकसभा क्षेत्र का व्योहारी विधानसभा क्षेत्र विशेष कर रेत केअवैध खनिज व्यापार का माफिया के लिए स्वर्ग बन गया, चुनाव आचार संहिता के दौरान माफिया के इस स्वर्ग को प्रमाण पत्र देने के लिए भारत की सेना का एक जवान राजभान तिवारी को रेत के माफिया, जिसमें उसे क्षेत्र की पुलिस, प्रशासन और अवैध खनिज व्यापार के सत्ता और विपक्ष के अपने नजदीक संबंध रखने वाला तंत्र रेत माफिया ने प्राण घातक हमला जमकर कुटाई कर दी क्योंकि वह रेत की माफिया गिरी के चलते अपने खेती के पुश्तैनी व्यापार को बचाने के लिए जमीन बचाने का काम कर रहा था। ताकि वह देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान जय किसान के नारा को जिंदा रख सके।

और इसकी कीमत उसकी पिटाई से आहत हो गई अपने घायल जमीर को लिए जब वह जिला स्तर पर संबंधित पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से मिला तो उसकी खेती तो नहीं बच पाई नाम मात्र के आपसी झगड़े का मुकदमा बाणसागर थाने में दर्ज हो सका । भारतीय सेना के इस जवान कि यह कड़े संघर्ष के बाद बड़ी सफलता थी। इस क्षेत्र में रेत माफिया आसमान से नहीं टपका है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में इसे जमकर संरक्षण मिला और इतना संरक्षण की चुनाव आचार संहिता में भी वह इस अवैध व्यापार को पूरी सफलता के साथ चल रहा है। अगर भारतीय सेना का जवान भी उसके आड़े आता है तो रेत माफिया उसकी हत्या करने में, उसे भयभीत करने में और उसके परिवार को खत्म करने में जरा भी संकोच नहीं करता। ऐसा साहस उसने विगत दिनों दिखाया ,जो अपने आप में इस बात का प्रमाण है की “जय बोलो बेईमान का शासन” वहां पर यानी व्योहारी विधानसभा क्षेत्र में पूरी तरह से स्थापित है…
बावजूद इसके आज प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस नारा को दोहराया जरूर की जय बोलो बेईमान की, लेकिन उन्होंने बेईमानी का नकाब यह कहकर कांग्रेस नेताओं के ऊपर लाद दिया की दोनों कांग्रेसी नेता प्रदेश के बेईमान है।
अब सवाल यह है की जनता को यह सोचना है की माफिया की बेईमान गिरी किसकी चल रही है व्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में। और उसके आधार पर उसे अपना वोट करना है ।आज शिवराज सिंह भाजपा प्रत्याशी शरद  के समर्थन में ग्राम आमडीह में जनता सेचुनाव जीतने के लिएचुनाव प्रचार में आए थे|

यह अलग बात है कि शहडोल क्षेत्र में रेत के टेंडर नहीं होने के कारण सिर्फ और सिर्फ सत्ता से जुड़े नेताओं को अवैध रेत व्यापार करने का छूट मिली हुई है। और वह पूरी सफलता के साथ अवैध रेत का व्यापार यानी माफिया गिरी चल रहे हैं। लेकिन माफिया सूत्रों का यह कहना है कि “बिना अंशदान के साहब के राज में पत्ता भी नहीं हिलता, सब पारदर्शी है… कहीं कुछ छुपा नहीं है..इसलिए यह कार्य हो पा रहा है।”
शहडोल क्षेत्र के भरपूर स्थानीय संसाधन खनिज रेत को पहली बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने करोड़पति बाहरी लोगों के हाथ में देने के लिए एक मुस्त ठेका देने की नीति बनाई थी और बड़े लोग जिसमें नेता और माफिया शामिल हैं मिलकर इस ठेके को हासिल कर लिए। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के नीतिगत फैसले के कारण मध्य प्रदेश की सत्ता कांग्रेस से फिसल कर भाजपा के हाथ में हाईजैक हो गई। इसके साथ भी रेत की तमाम ठेकेदारी और माफिया गिरी भी हाईजैक हो गई। सत्ता परिवर्तन के समय इसका सांकेतिक उदाहरण इसी व्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में देखने को भी मिला, जब कलेक्टर श्रीमती वंदना वैद्य ने पुलिस के साथ मिलकर एतिहासिक अब तक का सबसे बड़ा छापा माफिया के ऊपर डाली थीं। 56 से ज्यादा डंपर जेसीबी और मशीन जप्त की गई थी किंतु बाद में सब कुछ मैनेज हो गया। ऐसा लगा की बैध और अवैध कारोबार में कोई अंतर नहीं है। जिसका असर शहडोल जिले में रेत प्रतिबंध होने के बाद भी सफलता पूर्ण तरीके से ब्लैक में रेत महंगे दामों में माफिया द्वारा बेची जा रही है। तो यह कहना गलत नहीं होगा माफिया राज कांग्रेस ने नीतिगत तरीके से अपने लिए बनाया , लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने उसे हाईजैक कर लिया… रही जनता जनार्दन की बात वह वोट डालने वाली एक मशीन है और कुछ नहीं…. इसीलिए रेत की माफिया गिरी का फर्क बहुत होता दिखाई नहीं देता।

जाकर कपड़े फाड़िए..', चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह में क्यों छिड़ी जंग! | kamalnath vs digvijay singh congress bjp mp assembly election 2023 | TV9 ...    और इसीलिए मुख्यमंत्री शिवराज, प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को इसी माफिया के व्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में आज बेईमान घोषित कर कर चले गए। इसे ही राजनीति और कुछ हद तक कूटनीति भी कहा जाता है…. क्योंकि सत्ता किसी की भी हो माफिया राज की सत्ता को कोई चुनौती नहीं दे पाता… यही कड़वा सच है।


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