अब “बैगा-भारिया-सहरिया बटालियन”-मुख्यमंत्री यादव/शहडोल के बैगा बनाए जा रहे हैं बंधुआ मजदूर…? बंधुआ नाबालिक बच्चे की रक्षा के लिए बाप ने लगाई गुहार

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   सरकार एक तरफ अनुसूचित जाति जनजाति समाज के उत्थान के लिए अरबो रुपए पानी की तरह बहा रही है शहडोल जिले की रहने वाली विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा भारतीय और सहरिया के लिए तो विशेष अभियान चला रखा है उपायुक्त से लेकर सहायक आयुक्त आदिम जाति विभाग के लोग सदस्य किए गए हैं इसके बावजूद भी भ्रष्टाचार का जो नंगा नाच इन विभागों में होता है उसकी खनक के कारण विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा परिवार आज भी बंधुआ मजदूरी के दंस को जी रहे हैं.. विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चे नाबालिक अवस्था में ही गांव से अपहरण करके नागपुर के क्षेत्र में ले जाकर बेच दिए जाते हैं और इसके लिए एक सुव्यवस्थित माफिया का नेक्सस काम करता रहता है …

निश्चित तौर पर जिस शहडोल जिले में तृतीय वर्ग कर्मचारी, अंसारी नाम का व्यक्ति सहायक आयुक्त के पद पर बैठकर अपने उच्च अधिकारी और नेताओं तथा अधिकारियों के लिए करोड़ों रुपए का अवैध धारण करता है पूरे पारदर्शी तरीके से वह सफलता के साथ इसी पद से रिटायर भी होता है वहां पर इन विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों की सुरक्षा व्यवस्था का वही हाल होना चाहिए जो हाल बिजोरी के नाबालिक बच्चे शिवम बैगा के साथ पिछले 6 माह से हो रहा है शहडोल मुख्यालय का सोहागपुर थाना अंतर्गत 10 किलोमीटर दूर गांव में बंधुआ मजदूरों की सप्लाई पूरी सफलता के साथ यदि हो रही है और पुलिस और आदिम जाति विभाग नींद में नहीं जगा है, तो इसका मतलब है बंधुआ मजदूरी का पैसा सबके बच्चों का पेट पाल रहा है…? इसका मतलब यह भी है कि शासन का पैसा विशेष पिछड़ी जनजाति के नाम पर अंसारी जैसे लोगों की शहडोल और अन्य स्थानों पर हवेलियां खड़ा कर दिया है इसका मतलब यह है की उपयुक्त आदिवासी विभाग एक विलासिता का भव्य स्थान है जहां पर अधिकारी अपने आका के इशारे पर पिछड़ी जनजाति के पैसे पर दिवाली मनाते हैं और जमकर बंदर बांट होती है….

यह बात इसलिए कहीं जा रही है क्योंकि अगर आप शहडोल संभागी मुख्यालय के थाना अंतर्गत कुछ चुने हुए बका जनजाति के नाबालिक बच्चों को सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं उन्हें चिन्हित नहीं कर पा रहे हैं तो साफ है कि आपका लक्ष्य भ्रष्टाचार के महल में करोड़ों अरबो रुपए पर सिर्फ बंदर बांट करना है और कोर आंकड़े नेताओं को और अफसर को पहुंचा देना है यही कारण है कि आदिम जाति के नाम पर फर्जी शिक्षण संस्थाएं अरबो रुपए यहां से लूट रही हैं अंसारी नाम का बाबू कहते हैं 8 करोड रुपए के फर्जी बिल एक शिक्षण संस्थान को निकाल कर दे दिया जो कई कर्म से रुके पड़े थे वस्तुत उसे विद्यालय की छानबीन करने की जहमत भी उसने नहीं उठाई और शायद इसीलिए आदिम जाति विभाग अपने भ्रष्टाचार के लिए तो कतिपय भ्रष्टपुलिस अपने भ्रष्टाचार के लिए लक्ष्य के लिए सरकारी पैसे का दुरुपयोग कर रहा है.. परिणाम स्वरूप 14 वर्षीय शिवम बैगा नागपुर के किसी गांव में बंधुआ मजदूरी का एक “प्रोडक्ट” बनकर माफिया के लिए या तो कम कर रहा है अथवा किसी अपराध की दुनिया में या फिर इस दुनिया से विदा हो लिया है…..?

यह बात इसलिए कहीं जा रही है क्योंकि उसके पिता बब्बू बैगा निवासी ग्राम बिजौरी(छीर सागर) थाना व तहसील सोहागपुर ने आज आवेदन पत्र देकर अपनी व्यथा प्रशासन को सुने बब्बू के अनुसार वह खेती किसानी मजदूरी करके जीवन यापन करता है उसका बेटा शिवम जिसकी उम्र 14 साल है गांव के ही रवि यादव और महेंद्र बैगा करीब 25 दिन पहले जब मेरा लड़का नदी तरफ गया था उसे शहडोल चलना है बहका करके शहडोल ले आए और तब से वह गायब हुआ बब्बू पूछते पूछते पता चला कि उन लोगों ने उसे महाराष्ट्र के शिरडी लोनी गांव में किसी के यहां मजदूरी में बेच दिए हैं और अब उसे लड़के को कहां बेच दिया है पता नहीं चल रहा है। बब्बू का कहना है वे लोग पूछने पर भी नहीं बता रहे हैं वह कहां पर है मैं थाना सोहागपुर में दिन में लगभग 11-12 बजे शिकायत करने गया था तो पुलिस वालों ने रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया
बब्बू के अनुसार मेरे ही गांव में राजेश यादव जो रवि यादव का बड़ा भाई है वह साफ कहता है कि जो करना हो कर लो तुम्हारी रिपोर्ट नहीं लिखी जाएगी और ना ही लड़के का पता चलेगा ।बब्बू ने अपने आवेदन पत्र में कहा है मेरी बहन जमाना बैगा भी जब पूछताछ कर रही थी तो कहा गया है की ज्यादा यहां वहां शिकायत किया तो जब मिल जाओगे तो हम तुमको छोड़ेंगे नहीं इस तरह मेरी बहन भी घबराई हुई है और हम सब के सब भयभीत हैं हमारे लड़के को इन लोगों ने कहां गुमा दिया है या बेच दिया है नहीं बता रहे हैं। हमें अंदेशा है कि कहीं उसके साथ कोई बड़ी वारदात तो नहीं कर दिया है। बब्बू ने प्रार्थना की है कि तत्काल उसके नाबालिक बेटे को बंधुआ मजदूर बनाने वाले ठेकेदारों से मुक्त करने की दया करें।
देखना होगा जहां एक तरफ मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव बैगा समाज के उत्थान के लिए दिन-रात नई योजनाएं बना रहे हैं उन्हें सशक्त किया जा रहा है क्या उनकी कार्यपालिका संभाग मुख्यालय के लगे गांव के इस समाज के व्यक्तियों को न्याय दे सकेगी या फिर शासन के दांत देखने के और खाने के और होते हैं… फिलहाल शहडोल में तो यही दिख रहा है…?

 जनजातीय कार्य विभाग की शौर्य संकल्प योजना के अंतर्गत प्रदेश में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह बैगा, भारिया एवं सहरिया के लिये अलग से बटालियन गठित की जायेगी। साथ ही इस समूह के इच्छुक युवाओं को पुलिस, सेना एवं होमगार्ड में भर्ती कराने के लिये इन्हें आवश्यक प्रशिक्षण दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के युवाओं को रोजगार एवं सेवा से जोड़ने के लिये पीवीटीजी बटालियन बनाने के निर्देश दिये हैं। प्रदेश में बैगा, भारिया एवं सहरिया जनजाति पीवीटीजी समूह में आती हैं। इसी प्रकार आर्मड फोर्सेस में भर्ती के लिये प्रशिक्षण योजना में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के युवाओं को नेवी, आर्मी, एयरफोर्स, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, पुलिस, होमगार्ड एवं अन्य निजी सुरक्षा एजेन्सियों में भर्ती कराने के लिये इन्हें प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। इसके लिये कार्ययोजना तैयार की जा रही है।तीन विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिये कार्यरत है पृथक-पृथक विकास प्राधिकरणजनजातीय कार्य विभाग में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये संचालक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के विकास के लिए योजना बनाने एवं इनका क्रियान्वयन के लिये एजेन्सी भी कार्यरत है। यह एजेन्सी सतत् रूप से योजनाओं के अमल की मॉनिटरिंग भी करती है। एजेन्सी का कार्यक्षेत्र प्रदेश के 15 जिलों में हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिये राज्य स्तरीय प्राधिकरण एजेन्सियों का गठन भी किया गया है। हर प्राधिकरण में विशेष पिछड़ी जनजातीय वर्ग के व्यक्ति को अध्यक्ष तथा तीन अशासकीय सदस्यों को मनोनीत किया जाता है। इन विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिये योजना बनाने एवं योजनाओं का क्रियान्वयन करने के लिये प्रदेश में 11 प्राधिकरण कार्यरत हैं। बैगा विकास प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में 6 जिले (मण्डला, शहडोल, बालाघाट, उमरिया, डिण्डौरी एवं अनूपपुर) आते हैं। भारिया विकास प्राधिकरण में (पातालकोट) के कार्यक्षेत्र में छिन्दवाड़ा जिले के तामिया विकासखण्ड के पातालकोट क्षेत्र के 12 गांव आते हैं। सहरिया विकास प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में 8 जिले (श्योपुरकलां, मुरैना, भिण्ड, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, ग्वालियर एवं दतिया) आते हैं।1500 रूपये प्रतिमाह दी जा रही है आहार अनुदान राशिराज्य सरकार द्वारा विशेष पिछडी जनजातीय समूहों को आहार अनुदान भी दिया जाता है। इन समूहों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिये सरकार द्वारा बैगा, भारिया एवं सहरिया परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खाते में 1500 रूपये प्रतिमाह दिये जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल से 31 अगस्त 2024 तक 2 लाख 18 हजार 563 हितग्राहियों को कुल 180 करोड़ रूपये से अधिक आहार अनुदान राशि दी जा चुकी है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि धार्मिक भावनाओं और परम्पराओं के अनुरूप आने वाले नवरात्रि एवं दशहरा पर्व के आयोजन के लिए समुचित प्रबंध किये जाये। प्रदेश के सभी देवालय एवं मंदिरों में यथायोग्य प्रबंधन करने जिला प्रशासन सक्रियता से कार्य करें। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का दशहरा और भी आनंदमयी होगा, क्योंकि अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर की स्थापना के बाद यह पहला दशहरा है।

 

 

 


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