
नयी दिल्ली: 11 जनवरी (भाषा) कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट को लेकर शनिवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि रुपये की गिरावट के सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश की जनता को जवाब देना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार एक डॉलर की कीमत 86.4 रुपये हो गई है।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज कहापेपर लीक पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए, श्री धनखड़ ने कहा कि, “यह एक खतरा है। आपको इस पर अंकुश लगाना होगा। यदि पेपर लीक होते रहेंगे तो चयन की निष्पक्षता का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। और पेपर लीक होना एक उद्योग और व्यापार बन गया है। लोग, युवा लड़के और लड़कियाँ परीक्षाओं से डरते थे।यह कितना कठिन होगा। हम इसका समाधान कैसे करेंगे? अब उन्हें दो डर सता रहे हैं। एक परीक्षा का डर। दूसरा, लीक होने का डर। इसलिए जब वे परीक्षा की तैयारी के लिए कई महीनों और हफ्तों तक अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं, और उन्हें लीक का झटका मिलता है. क,”सेवा में विस्तार, किसी भी रूप में किसी विशेष पद के लिए विस्तार उन लोगों को दिया जाता है जो लाइन में हैं। यह अपेक्षा के तार्किक सिद्धांत को चुनौती देता है। हमारे पास अपेक्षा का सिद्धांत है। लोग एक विशेष खांचे में रहने के लिए दशकों समर्पित करते हैं। विस्तार दर्शाता है कि कुछ व्यक्ति अपरिहार्य हैं। अपरिहार्यता एक मिथक है। इस देश में प्रतिभा की भरमार है। कोई भी अपरिहार्य नहीं है। और इसलिए यह राज्य और केंद्रीय स्तर पर लोक सेवा आयोगों के अधिकार क्षेत्र में है कि जब उनकी ऐसी स्थितियों में भूमिका हो, तो उन्हें दृढ़ रहना चाहिए।”उन्होंने कहा कि, “मैं अत्यंत संयम के साथ एक पहलू पर विचार कर रहा हूँ। लोक सेवा आयोगों में नियुक्ति संरक्षण या पक्षपात से प्रेरित नहीं हो सकती। कुछ प्रवृत्तियाँ दिखाई दे रही हैं। मैं उन पर विचार नहीं करना चाहता, लेकिन उनमें से कुछ बहुत पीड़ादायक हैं। हमें अपनी अंतरात्मा के सामने खुद को जवाबदेह ठहराना चाहिए। हम लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को किसी विशेष विचारधारा या व्यक्ति से जुड़ा हुआ नहीं रख सकते। यह संविधान के ढांचे के सार और भावना के विरुद्ध होगा।
”राजनीति में सामंजस्य सिर्फ इच्छाधारी सोच नहीं है, बल्कि एक वांछनीय पहलू है। सामंजस्य जरूरी है। अगर राजनीति में सामंजस्य नहीं है, ध्रुवीकृत है, गहराई से विभाजनकारी है, कोई संचार चैनल काम नहीं कर रहा है, कल्पना कीजिए कि आप भूकंप में हैं, आप खो गए हैं और आपका बाहरी दुनिया से कोई संबंध नहीं है, तो चीजें आपके लिए भयानक होंगी।PIB Delhi
सीईसी की नियुक्ति वाले नये कानून की पड़ताल करेगा उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली: 11 जनवरी (भाषा) सभी की निगाहें उच्चतम न्यायालय पर हैं जो निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति संबंधी कानून की जांच करेगा क्योंकि चयन समिति में भारत के प्रधान न्यायाधीश को सदस्य नहीं बनाये जाने को लेकर इसकी (नये कानून की) वैधता को चुनौती दी गयी है।मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, दिसंबर 2023 में लागू हुआ। इसका पहली बार इस्तेमाल मार्च 2024 में ज्ञानेश कुमार और एस. एस. संधू को निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त करने के लिए किया गया था। उन्हें अरुण गोयल के इस्तीफे और अनूप चंद्र पांडे की सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त पदों पर नियुक्त किया गया था।
भोपाल लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा है कि प्राचीन काल से हमें जल संरक्षण का कार्य सिखाया गया है। ऋषि-मुनियों ने शोध कर हमें बताया कि जल शरीर के लिए कितना आवश्यक है। हमारा शरीर पंचतत्व से बना है, इन पांच तत्वों में जल भी शामिल हैं, ऐसे में जल संरक्षण करना हमारा दायित्व है। राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि पूरी दुनिया हमारा परिवार है और हम जल को लेकर वैज्ञानिक तरीके से रिसर्च कर उसके संरक्षण का काम कर रहे हैं। श्री पटेल ने कहा कि मैं भी सिविल इंजीनियर हूँ, मैंने जल संरचना के निर्माण को लेकर ग्राउंड जीरो पर काम किया है। जहां भी काम किया, वहां लोगों ने पानी का मूल्य समझा और पूरा समर्थन दिया। हमारे देश में नदियों को माँ का दर्जा दिया गया है और माँ को हम दूषित और मैला नहीं कर सकते, इसलिए हम इनके संरक्षण के लिए काम करें और बेहतर तरीके से जल का सदुपयोग करें। प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है ऐसे में हमारा दायित्व है कि प्रकृति को भी हम जल संरक्षण कर प्राणी मात्र के जीवन में योगदान दें।राज्य मंत्री श्री पटेल कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में आयोजित जल और पर्यावरण पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन अमेरिकन सोसाइटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स के पर्यावरण एवं जल संसाधन संस्थान और मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग एवं अंत्योदय प्रबोधन संस्थान के सहयोग से किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय “जलवायु परिवर्तन के अनुकूल सतत और मजबूत जल बुनियादी ढांचे का निर्माण” था।

