
शहडोल।
शहडोल नगर के जेल बिल्डिंग के समीप स्थित तालाब की भूमि पर निर्मित एक प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवंटित आवास को गुप्त रूप से विक्रय कर गोदाम के रूप में उपयोग किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। यह कार्य न केवल प्रधानमंत्री आवास योजना के उद्देश्यों का उल्लंघन है, बल्कि तालाब जैसी सार्वजनिक जलसंरचना के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित मकानों का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराना है, न कि उनका व्यावसायिक उपयोग या विक्रय कराना. बावजूद प्रधानमंत्री आवास के भवन मुख्य मार्ग तालाब के पास स्वीकृत कराकर निर्माण कराया गया और बाद में अब उसका स्वरूप परिवर्तन कर तालाब को भाठकर लंबा चौड़ा गोदाम और टीन सेड बना लिया गया है। जो निश्चित रूप से प्रधानमंत्री आवास के हितग्राही का नहीं हो सकता।
खबर यह है कि यह जमीन हितग्राही के द्वारा अपने नेता की इशारे पर किसी अन्य व्यक्ति को विक्रय कर दी गई है और इसीलिए भूमि खरीददार ने तालाब का अंश भाग भांठ कर उस पर अपना गोदाम बना लिया। जिस तालाब का रखवा भी छोटा हो गया है। यह तालाब वर्ष 1998- 99 में शासकीय मद से करीब 10 लाख रुपए खर्च करके गहरीकरण किया गया था।
तालाब की भूमि पर निर्मित मकानों का गोदाम के रूप में उपयोग पर्यावरणीय नियमों और जल संरक्षण नीतियों का उल्लंघन है। तालाब एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, वैसे तो शासन द्वारा जल गंगा अभियान के नाम पर जल संरक्षण का काफी प्रचार प्रसार किया जा रहा है किंतु बाल संप्रेषण गृह और जेल बिल्डिंग के बगल में स्थित मुख्य मार्ग जिसमें प्रतिदिन जिला न्यायाधीश, कमिश्नर, अपर कलेक्टर विकास, रोज आते जाते हैं इस तरह प्रधानमंत्री आवास का गोदाम बनाकर तालाब भाटने की प्रक्रिया को खुलेआम सफल हो जाना निश्चय ही प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का परिणाम है।
वैसे भी पिछले दो महीने से इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र की किरण टॉकीज के पास स्थित एक जल बावड़ी को राजनीति के संरक्षण में भाठ दिए जाने से आसपास की जनता द्वारा क्रमिक धरना आंदोलन मौका स्थल पर किया जा रहा है जिसे लेकर अभी तक ना तो प्रशासनिक अधिकारी और ना ही शहडोल की चुने हुए जनप्रतिनिधि दिखाई देते हैं। बल्कि वह आंदोलनकारी के आंदोलन से थककर हार जाने की स्थिति का इंतजार कर रहेहैं। क्योंकि बाजार का प्रमुख जल स्रोत उक्त जल बावड़ी के को पाठ दिए जाने से आसपास की भूजल क्षेत्र में भी गिरावट आने के साथ ही लोगों के लिए जल संकट का कारण बनती है।
अब इस तरह जल तालाबों के ऊपर या अंदर में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर करके छुट-भैया नेता किस प्रकार की माफिया गिरी करते हुए शासकीय जमीनों और तालाबों को तथा जल स्रोतों को नष्ट करने में सक्रिय हैं। जेल बिल्डिंग के पास स्थित इस तालाब पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराकर बाद में इसकी बिक्री कर तालाब के अंदर तालाब हटकर गोदाम बनाए जाना निश्चय ही आश्चर्य का विषय है। देखना होगा प्रकर
ण सामने आने के बाद नगर पालिका परिषद अथवा संबंधित राजस्व अमला कितनी गंभीरता से प्रधानमंत्री आवास के नाम पर चल रही माफिया गिरी को खत्म करने में रुचि लेता है या फिर वह जल गंगा अभियान जैसे प्रचार प्रसार में व्यस्त रहता है। और नित्य प्रतिदिन रास्ता में आने वाले वाले तालाब मे दिनदहाड़े भाठकर कब्जा करा दिया जाना जल गंगा अभियान को मुख्यालय में ध्वस्त करता नजर आ रहा है। देखना होगा प्रशासन क्या सुनिश्चित कर पता है की प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित मकानों का दुरुपयोग किस प्रकार और किन व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है।
अथवा भविष्य में इस प्रकार के दुरुपयोग को रोकने हेतु उचित निगरानी तंत्र स्थापित किया जाताहै ।

