प्रस्तावना पवित्र…,जोड़े गए शब्द ‘नासूर’ : धनखड़/शहडोल की ऐतिहासिक रथ यात्रा/विधि छात्र को तुरंत रिहा करने का आदेश देते हुए कहा ‘पूरी तरह से अवैध’

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शहडोल  जहाँ मोहन राम मंदिर की रथ यात्रा शहडोल की प्राचीन परंपरा और स्थानीय संस्कृति का प्रतीक है, वहीं इस्कॉन की रथ यात्रा वैश्विक भक्ति आंदोलन को दर्शाती है। दोनों के इस संगम ने शहडोल को एक अनूठा आध्यात्मिक केंद्र बना दिया है, जहाँ भक्तों को परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।  इस परंपरा की नींव पंडित मोहन राम पांडे ने 19वीं सदी के अंत में रखी थी। अमरपाटन के असरार गाँव के निवासी पंडित मोहन राम पांडे ने 1895 के आसपास मोहन राम मंदिर का निर्माण करवाया, जिसके बाद मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ स्वामी का मंदिर भी स्थापित किया गया। इस मंदिर की स्थापना के साथ ही रथ यात्रा की परंपरा शुरू हुई, पिछले कुछ वर्षों में शहडोल की इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में एक नया रंग जुड़ा है, और वह है अंतरराष्ट्रीय कृष्णामृत संघ (इस्कॉन) की भागीदारी। इस्कॉन ने मोहन राम मंदिर के समीप से अपनी रथ यात्रा शुरू की है, 

प्रधानमंत्री मोदी ने शुभांशु शुक्ला से की बातचीत, आईएसएस पर ‘भारत माता की जय’ का नारा गूंजा

नयी दिल्ली: 28 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब शनिवार को अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से कहा कि उनकी अंतरिक्ष यात्रा भारत के गगनयान मिशन की दिशा में पहला कदम है, तब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) ‘भारत माता की जय’ के नारे से गूंज उठा।पृथ्वी की 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहे आईएसएस पर मौजूद शुक्ला से बातचीत करते हुए मोदी ने कहा कि आपकी ऐतिहासिक यात्रा सिर्फ अंतरिक्ष तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत की दिशा में किये जा रहे प्रयासों को नयी गति प्रदान करेगी।शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष स्टेशन की उनकी यात्रा न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे राष्ट्र की सामूहिक उपलब्धि है।

प्रस्तावना पवित्र, आपातकाल के दौरान जोड़े गए शब्द ‘नासूर’ हैं : उपराष्ट्रपति धनखड़  नयी दिल्ली: 28 जून (भाषा) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को कहा कि संविधान की प्रस्तावना ‘‘परिवर्तनशील नहीं’’ है, लेकिन भारत में आपातकाल के दौरान इसे बदल दिया गया जो संविधान निर्माताओं की ‘‘बुद्धिमत्ता के साथ विश्वासघात का संकेत है।’’उन्होंने कहा कि 1976 में आपातकाल के दौरान प्रस्तावना में जो शब्द जोड़े गए, वे ‘‘नासूर’’ थे और उथल-पुथल पैदा कर सकते हैं।

विधि छात्र को तुरंत रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि यह ‘पूरी तरह से अवैध’ 

नयी दिल्ली: 28 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद एहतियाती हिरासत में लिए गए एक विधि छात्र को तुरंत रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि यह ‘पूरी तरह से अवैध’ है।न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मध्यप्रदेश के बैतूल के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 11 जुलाई, 2024 को पारित किये गये हिरासत आदेश में त्रुटि पाई तथा कहा कि वह इस मामले में विस्तृत और तर्कसंगत आदेश पारित करेगी।बैतूल में एक विश्वविद्यालय परिसर में हुए विवाद के बाद पुलिस ने अन्नू पर मामला दर्ज किया था। याचिकाकर्ता अन्नू की कथित तौर पर प्रोफेसर से झड़प हुई थी।अन्नू के खिलाफ हत्या के प्रयास और अन्य संबंधित अपराधों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।जेल में जब अन्नू था तब उसके खिलाफ एनएसए के प्रावधानों के तहत हिरासत आदेश जारी किया गया था। बाद में इस आदेश की पुष्टि की गई और तब से हर तीन महीने में इसे बढ़ाया जाता रहा है।शीर्ष अदालत की पीठ ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा,‘‘11 जुलाई, 2024 के पहले हिरासत आदेश के अवलोकन के बाद, हमने पाया है कि अपीलकर्ता को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा तीन (दो) के तहत एहतियाती हिरासत में लिया गया है। हालांकि, हमारा मानना ​​है कि जिन कारणों से उसे एहतियाती हिरासत में लिया गया है, वे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा तीन की उपधारा (दो) की जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं। इसलिए, अपीलकर्ता की निवारक हिरासत पूरी तरह से असमर्थनयोग्य हो जाती है।’’

पीठ ने कहा कि एहतियाती हिरासत अन्य आधारों पर भी अस्वीकार्य है, जैसे कि अपीलकर्ता (विधि छात्र) के आवेदन को राज्य सरकार के पास न भेजकर जिलाधिकारी ने स्वयं निर्णय ले लिया तथा अन्य आपराधिक मामलों में अपीलकर्ता की हिरासत के तथ्य को भी ध्यान में नहीं रखा गया तथा इसपर भी विचार नहीं किया गया कि नियमित आपराधिक कार्यवाही में निरुद्ध होने के बावजूद उसे एहतियाती हिरासत में क्यों रखा जाना आवश्यक था।पीठ ने कहा, ‘‘इस प्रकार, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, हम निर्देश देते हैं कि फिलहाल भोपाल की केंद्रीय जेल में बंद अपीलकर्ता को किसी अन्य आपराधिक मामले में आवश्यक न होने पर हिरासत से तुरंत रिहा किया जाए। उपरोक्त के मद्देनजर, आपराधिक अपील का निपटारा किया जाता है। बाद में तर्कसंगत आदेश जारी जाएगा।’’शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून के छात्र अन्नू उर्फ ​​अनिकेत को पहली बार 11 जुलाई, 2024 के आदेश द्वारा एहतियाती हिरासत में लिया गया था और इस हिरासत आदेश को चार बार बढ़ाया गया और अंतिम विस्तार आदेश के अनुसार, उसकी निवारक हिरासत 12 जुलाई, 2025 तक है।


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