
शहडोल में कथित भीड़ मॉब लिंचिंग द्वारा हमला: कानून-व्यवस्था की परीक्षा
नए पुलिस अधीक्षक नए कलेक्टर शहडोल में आए हैं इसी दौर में राम हॉस्पिटल के पास ही जय स्तंभ चौक और जिला न्यायालय कार्यालय के बीच में कुछ ऐसी घटना रात घटी जिसे शहडोल की सेहत के हिसाब से अभद्र, असिस्ट से ज्यादा मॉब लिंचिंग के रूप में भी देखा जाना क्यों नहीं चाहिए,इसशब्द का उपयोग इसलिए कर रहा हूं क्योंकि बातें कुछ ऐसी नहीं हुई थी कि उसे एक पूरा तब का इकट्ठा होकर अटेंप्ट टू मर्डर के हालात में पहुंचा दे, घटना कुछ ऐसी नहीं थी कि उसे एक ही समूह के लोग इकट्ठा होकर इस हालत में पहुंचा दें ।क्योंकि अब जो सर्वाधिक पीड़ित पक्ष युवा के बारे में जानकारी आ रही है कि उसके नाक में इस प्रकार से अटैक किया गया था कि उसकी जान जा सकती थी किसने किसने किसको किसको पीटा मारा यह तो पुलिस की निष्पक्षता पूर्ण और बुद्धिमान पुलिस की जांच से तय होगा यदि सामान्य पुलिस इसे सामान्य घटना से देखेगी तो शायद ही इसके निष्कर्ष सामने आएंगे। हो सकता है ऐसे महाबलिनचिंग को प्रेशर देने के लिए कुछ तथा कथित अप्रोचफुल लोग पुलिस और प्रशासन को अपनी चाटुकारिता पूर्ण स्थिति से घटना को मोड़ने का काम करें पुलिस अधिकारियों को इससे सतर्क रहने की इसलिए भी जरूरत है कि कुछ शहडोल में इस प्रकार की मोब लिंचिंग की वारदात कभी सुनाई नहीं दी।हो सकता है जब मैं यह कह रहा हूं कि यह मोब लिंचिंग है तो अतिरेक हो…
(त्रिलोकी नाथ)
शहडोल में राम अस्पताल के पास जय स्तंभ चौक और जिला न्यायालय कार्यालय के बीच हाल ही में हुई एक घटना ने शहर की शांति और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नई पुलिस अधीक्षक और नए कलेक्टर के कार्यभार संभालने के इस दौर में यह घटना सामने आई है, जिसे कुछ स्थानीय आवाजें सामान्य झगड़े से आगे बढ़कर भीड़ द्वारा हमला या मॉब लिंचिंग जैसी स्थिति के रूप में देख रही हैं।
विवरण के अनुसार, घटना का आरंभ एक बाहरी नंबर वाली कार से जुड़े युवाओं के होटल में खाने-पीने का सामान लेने जाने से हुआ। कार निकलते समय कीचड़ या पत्थर के टुकड़े पास से गुजर रहे दोपहिया वाहन पर गिरे, जिसे मुस्लिम युवा चला रहे थे। बात बढ़ी, होटल के अंदर तनातनी हुई और धीरे-धीरे एक समूह इकट्ठा हो गया। कथित रूप से कार सवार युवकों पर हमला शुरू हो गया। जो भाग सके वे भाग निकले। जिसकी कार थी और वह बाहरी नंबर की थी, तथा जिसने सोने की चेन पहनी हुई थी, उसे निशाना बनाकर योजनाबद्ध तरीके से प्रताड़ित किया गया। भीड़ के रूप में हमला हुआ और युवक के नाक (बांसा) के ऊपर निशाना साधकर चोट पहुंचाई गई, जिससे उसकी जान को खतरा पैदा हो सकता था।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, युवक शहडोल के सभ्रांत परिवार और होटल कोशिश के संचालक परिवार से जुड़ा है। जब माता-पिता मौके पर पहुंचे तो उन्हें भी निशाना बनाया गया। बाद में कथित तौर पर मॉब लिंचिंग को छिपाने के लिए माता-पिता पर झापड़ मारने के आरोप भी लगाए गए। घटना स्थल जय स्तंभ चौक के आसपास सोहागपुर थाना और कोतवाली थाना क्षेत्र की सीमा पर पड़ने के कारण रिपोर्टिंग में भी कुछ जटिलता आई।
इस घटना को लेकर उठाए जा रहे सवाल महत्वपूर्ण हैं। क्या यह केवल व्यक्तिगत झगड़े का मामला था जिसे सामान्य तरीके से सुलझाया जा सकता था, एक समूह द्वारा जानलेवा हमले की दिशा में बढ़ाया गया? क्या हमलावरों में से कुछ पहले मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में हुए हमले जैसी घटनाओं से जुड़े रहे हैं? क्या शहडोल में कोई ऐसा गिरोह आकार ले रहा है जो संदेश देना चाहता है कि उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले को चूर-चूर कर दिया जाएगा? ये सवाल अभी सिर्फ आशंकाएं हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
शहडोल में पहले भी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में छात्रों पर समूह बनाकर हमले की घटना हुई थी, जिसमें प्रशासन को विशेष प्रयास करने पड़े थे। उस अनुभव को ध्यान में रखते हुए नई पुलिस अधीक्षक और नए कलेक्टर को इस घटना को सामान्य फसाद मानकर छोड़ने की बजाय निष्पक्ष, गहन और बुद्धिमान जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान, घायल की मेडिकल रिपोर्ट और दोनों पक्षों की भूमिका की स्पष्ट पड़ताल जरूरी है।
सूत्र हैं की शहडोल के ही सभ्रांत परिवार होटल कोशिश के संचालक परिवार के लड़के के साथ जानबूझकर अपमानजनक तरीके से जानलेवा हमला किया गया इस बात की जानकारी जब उनके माता-पिता को पता चली तो वह मौका स्थल पर गए और वहां पर उन्हें भी टारगेट किया जाने लगा कहते हैं मॉब लिंचिंग को छुपाने के लिए इस बात की भी रिपोर्ट की गई की घटना के बाद मौका स्थल पर पहुंचने वाले माता-पिता के खिलाफ भी झापड़ करने के आरोप लिख दिए गए। इसके पहले कोतवाली क्षेत्र जानकारी न होने के कारण इसकी रिपोर्ट कोतवाली क्षेत्र में भी पीड़ित परिवार के द्वारा की गई। बताया जाता है जय स्तंभ चौक के इस पर और उसे पर सोहागपुर थाना क्षेत्र और कोतवाली थाना क्षेत्र का विभाजन होता है अब रोड के किस पार झगड़ा हुआ वह कानूनी स्थिति है। यदि रिपोर्ट में माता-पिता द्वारा झापड़ मारने का उल्लेख है तो उसकी पृष्ठभूमि भी स्पष्ट होनी चाहिए—क्या रिपोर्ट लिखने वाला व्यक्ति स्वयं बाइक सवार था या नहीं, और नाक तोड़ने जैसे गंभीर चोट के मुकाबले झापड़ का आरोप कितना प्रासंगिक है।
पुलिस और प्रशासन को सतर्क रहना होगा कि कोई भी पक्ष घटना को अपने अनुकूल मोड़ने का प्रयास न करे। पेशेवर अपराधी अक्सर अपराध के बाद षड्यंत्र रचकर खुद को बचाने और बड़े अपराधों की नींव रखने की कोशिश करते हैं। शहडोल जैसी छोटी-मध्यम शहर की सौहार्दता और सद्भावना पर ऐसा कोई भी हमला घातक साबित हो सकता है।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
ऐसा नहीं मानना चाहिए की मौका स्थल में जो लोग भी पहुंचे थे सब अपराधिक विचारधारा के लिए काम कर रहे थे कुछ लोग घटना को छोटी घटना के रूप में समझ कर इससे बचना चाहते थे किंतु ज्यादातर अपराधिक विचारधारा के लोग इस घटना के बहाने शहर में माबलिंचिंग के जरिए अपना रुतबा कायम करना चाहते थे उन्हें भी चिन्हित किया जाना चाहिए यह पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है अन्यथा उनकी असफलता यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में जो भी घटनाएं होंगी वह उसके लिए जिम्मेदार होंगे क्योंकि अपराधियों की माबलिंचिंग की सफलता जिसमे नवागत पुलिसअधीक्षक संजय अग्रवाल को अप्रोच कर यदि घटना को मोड गया है तो वह भी उसे माबलिचिंग में शामिल माना जाना चाहिए क्योंकि घटना को स्वस्थ तरीके से दिखाना सभ्य समाज की जिम्मेदारी है अन्यथा वह एक माफिया का हिस्सा होता है इसके अलावा कुछ नहीं…
और यह बात पुलिस प्रशासन को भी समझनी चाहिए वह कितना समझना चाहते हैं यह उनकी विवेक पर निर्भर करता है किसी भी स्थिति में निष्पक्षिता शहडोल की सेहत के हिसाब से बहुत जरूरी है दोषी छोड़ ना जाए निर्दोष फंसाया न जाए इसी सिद्धांत पर आप “देशभक्ति-जनसेवा” के लिए काम कर पाएंगे… नई नेतृत्व टीम के लिए यह एक परीक्षा भी है और सबक भी। घटना की निष्पक्ष जांच हो, दोषी चाहे कोई भी हो उसे सजा मिले, और निर्दोषों को संरक्षण मिले। शहर की सेहत के लिए यही सबसे जरूरी है। आगे की जांच रिपोर्ट और तथ्यों पर नजर बनाए रखनी होगी।

