
छात्रों के खिलाफ ‘हिंसा’ के लिए शाह जिम्मेदार, संसद में आकर जवाब देने का साहस नहीं : राहुल
नयी दिल्ली: 5 अगस्त (भाषा)
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में हाल में हुए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कुछ युवाओं से बुधवार को मुलाकात की और आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं।गांधी ने इन युवाओं के संग संवाददाताओं के साथ बातचीत में दावा किया कि गृह मंत्री में यह बुनियादी शिष्टाचार और साहस नहीं है कि 20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ हुई ‘‘हिंसा’’ के मामले पर संसद में पहुंचकर जवाब दें।
संसदीय प्रश्न: अल नीनो की स्थितियों के लिए तैयारी
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून बारिश पर अल नीनो के संभावित असर का आकलन करता है। आम तौर पर, अल नीनो की घटना के दौरान भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और अल नीनो की तीव्रता ही यह तय करती है कि मानसून पर कितना असर पड़ेगा। 1950 के बाद से 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है, जिनमें से 7 बार भारतीय मानसून की बारिश पर असर पड़ा और बारिश सामान्य से कम रही। हालांकि, मानसून के मौसम के बाद के हिस्से (खासकर सितंबर की बारिश) में अल नीनो और बारिश के बीच एक मजबूत उल्टा संबंध देखा गया है।
आईएमडी नियमित रूप से बारिश और तापमान के लिए मौसमी और मासिक पूर्वानुमान जारी करता है। आईएमडी ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के लिए सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया। 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने पहले चरण के दीर्घकालिक पूर्वानुमान में, आईएमडी ने अनुमान लगाया कि मौसमी बारिश ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (एलपीए) का 92% होगी, जिसमें मॉडल की त्रुटि ±5% होगी। इसके बाद, दूसरे चरण के दीर्घकालिक पूर्वानुमान में, आईएमडी ने मौसमी बारिश के पूर्वानुमान को संशोधित करके एलपीए का 90% कर दिया, जिसमें मॉडल की त्रुटि ±4% थी। आईएमडी ने अपने मौसमी पूर्वानुमानों में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना का भी संकेत दिया, जिससे संबंधित हितधारकों को तैयारी और योजना बनाने के लिए पहले से जानकारी मिल सके।इसके अलावा, आईएमडी मानसून की बारिश के बारे में रोजाना और अल नीनो की स्थितियों के बारे में हर महीने अपडेट देता है। आईएमडी सभी संबंधित लोगों को जिले और ब्लॉक स्तर पर बारिश की जानकारी भी देता है और पीएमओ, एमएचए, एमओएएफडब्ल्यू की बैठकों में नियमित रूप से शामिल होकर जरूरी जानकारी देता है। एमओएएफडब्ल्यू की ‘क्रॉप वेदर वॉच’ के तहत, आईएमडी हर हफ्ते पिछली बारिश और अगले दो हफ्तों के लिए बारिश का अनुमान बताता है।एमओईएस का भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), 2026 के लिए मौसम के हिसाब से और कम से मध्यम अवधि के प्रायोगिक पूर्वानुमान के आधार पर, कृषि और बांध प्रबंधन विभागों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसका मकसद कृषि और जल प्रबंधन पर बारिश और ईएनएसओ के असर की जानकारी देना और उसे समझना है।पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2026 में अल नीनो के असर से निपटने के लिए राज्यों को जिले-वार जोखिम और असर के आकलन का कोई अध्ययन या दिशानिर्देश जारी नहीं किया है।हालांकि, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाला भारत मौसम विज्ञान विभाग (आएमडी) नियमित रूप से मौसम और जलवायु का पूर्वानुमान, मौसमी आउटलुक और बारिश, लू (हीटवेव) व अन्य चरम मौसम की घटनाओं से जुड़ी शुरुआती चेतावनियां जारी करता है। ये जानकारियां सभी संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों तक पहुंचाई जाती हैं ताकि वे तैयारी कर सकें और सही कदम उठा सकें।यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी। PIB Delhi
कोयला क्षेत्र,पारदर्शिता और बाजार
सरकार ने पिछले पांच वर्षों में, कोयले के आवंटन और खनन को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और कुशल बनाने के लिए कई संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक सुधार किए हैं। खुली प्रतिस्पर्धी नीलामी के माध्यम से आवंटन से वितरण प्रमुख बदलाव रहा है। साथ ही वर्ष 2020 में कोयले की बिक्री या अंतिम उपयोग पर बिना किसी प्रतिबंध के वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत की गई है।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम: खदानों के सुचारू रूप से संचालन के लिए इस विंडो को परिवेश 2.0 पोर्टल के माध्यम से शुरू किया गया।अन्वेषण: 44 निजी संस्थाओं को एपीए के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिससे अन्वेषण लाइसेंस की आवश्यकता समाप्त हो गई है। भूवैज्ञानिक रिपोर्टों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।वैधानिक संशोधन: कोयला खदान नियंत्रण नियमों में संशोधन करके कोयला कंपनी बोर्डों को खदान खोलने की अनुमति देने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, कोकिंग कोयले को एमएमडीआर अधिनियम, 1957 के तहत एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिससे कोकिंग कोयला परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी और वन मंजूरी प्रक्रिया में तेजी आएगी।खान विकासकर्ता और संचालक (एमडीओ) मॉडल: सरकार ने कोयला खनन के लिए खान विकासकर्ता और संचालक मॉडल पेश किया है और संसाधन निष्कर्षण को अधिकतम करने के लिए राजस्व-साझाकरण मॉडल के तहत बंद/परित्यक्त खादानों की पेशकश भी की है।कोयला ब्लॉक विकास एवं उत्पादन समझौतों में प्रदर्शन सुरक्षा प्रदान करने के लिए बीमा गारंटी बांड को एक स्वीकार्य साधन के रूप में शामिल किया गया है। इससे बैंक गारंटी पर निर्भरता कम होगी, अवरुद्ध कार्यशील पूंजी मुक्त होगी और भागीदारी बढ़ेगी।
कोयला धुलाई: सरकार का लक्ष्य ‘मिशन कोकिंग कोल’ के अंतर्गत वित्त वर्ष 2030 तक देश की कोयला धुलाई क्षमता को 58 मीट्रिक टन तक बढ़ाना हैडिजिटल माइन मॉनिटरिंग: कोयला मंत्रालय ने कोयले के उत्पादन, प्रेषण, भंडारण और परिवहन की तत्क्षण निगरानी के लिए कोयला शक्ति डैशबोर्ड की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त, अनधिकृत खनन गतिविधियों की नागरिक-आधारित रिपोर्टिंग के लिए खनन प्रहरी मोबाइल ऐप और सीएमएसएमएस वेब ऐप की शुरुआत की गई है। सीआईएल ने वैज्ञानिक खदान योजना के लिए एआई-आधारित वीडियो एनालिटिक्स, आरएफआईडी-सक्षम वेइंगब्रिज, जीपीएस-आधारित वाहन ट्रैकिंग और ड्रोन/उपग्रह-आधारित मैपिंग से लैस एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) भी स्थापित किए हैं।कोयला गैसीकरण और यूसीजी: सरकार ने सतही कोयले/लिग्नाइट के गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए, वर्ष 2030 तक 100 मीट्रिक टन गैसीकरण क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 8,500 करोड़ रुपये (जिनमें से 8 परियोजनाएं पहले ही स्वीकृत हो चुकी हैं) और 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी है नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन कैप्चर: कोल इंडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 गीगावाट और वित्त वर्ष 2029-30 तक 9.5 गीगावाट की शुद्ध शून्य नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य के साथ एक चरणबद्ध नवीकरणीय ऊर्जा कार्य योजना को अपनाया है, जिसमें से 558 मेगावाट पहले से ही यूटिलिटी और कैप्टिव परियोजनाओं में स्थापित है।
इसके अलावा, सरकार वृक्षारोपण/जैविक पुनर्स्थापन, पर्यावरण पार्क विकास और खदान जल उपयोग जैसी पहलों के माध्यम से कोयला खनन में पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देती है। पारंपरिक ड्रिलिंग के स्थान पर विस्फोट-रहित खनन प्रौद्योगिकियों (जैसे सरफेस माइनर्स) को तेजी से अपनाया जा रहा है।देश के घरेलू कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2019-20 में लगभग 731 मिलियन टन से बढ़कर लगातार दो वर्षों तक 1 बिलियन टन से अधिक हो गया है, और वित्त वर्ष 2024-25 में 1047.52 मीट्रिक टन और वित्त वर्ष 2025-26 में 1039 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।
सरकार ने एकीकृत कोयला लॉजिस्टिक्स योजना शुरू की है जिसका उद्देश्य रेल, सड़क, तटीय जल परिवहन और अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से प्रौद्योगिकी-आधारित, लागत प्रभावी बहुआयामी लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित करना है। कुल मिलाकर 139 फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाएं शुरू की गई हैं जिनकी कुल क्षमता लगभग 1,319 मिलियन टन है, जिनमें से लगभग 589 मिलियन टन क्षमता वाली 72 परियोजनाएं पहले ही चालू हो चुकी हैं।सरकार ने कोयला क्षेत्र को और सुव्यवस्थित करने के लिए कोयला और उसके प्रसंस्कृत रूपों के व्यापार के लिए एक विनियमित ऑनलाइन मंच स्थापित करने हेतु कोयला विनिमय नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। कोयला विनिमय के माध्यम से कैप्टिव/वाणिज्यिक खनिक और उपभोक्ता वितरण-आधारित अनुबंध कर सकेंगे।केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

