
शहडोल में पत्रकार वार्ता: मंत्री दिलीप जायसवाल ने रिलायंस के अवैध गैस उत्पादन के सवाल पर चुप्पी साधी
शहडोल, 16 जून 2025: मध्य प्रदेश के शहडोल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने केंद्र की मोदी सरकार के 11 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। हालांकि, वार्ता के दौरान एक पत्रकार द्वारा उठाए गए गंभीर सवाल ने सभी का ध्यान खींचा, जिसका जवाब मंत्री ने देने से टाल दिया।पत्रकार ने सवाल उठाया कि शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र में मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा पिछले 15 वर्षों से बिना खनिज विभाग के अनुबंध के गैस का उत्पादन किया जा रहा है। यह गतिविधि न केवल नियम-कायदों का उल्लंघन है, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदाय के अधिकारों का भी हनन करती है।
( त्रिलोकी नाथ)
शहडोल, केंद्र शासन की उपलब्धियां पर प्रकाश डालने के लिए मध्य प्रदेश के शहडोल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने केंद्र की मोदी सरकार के 11 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। हालांकि, वार्ता के दौरान एक पत्रकार वार्ता में उठाए गए गंभीर सवाल ने सभी का ध्यान खींचा, जिसका जवाब मंत्री ने देने से टाल दिया।सवाल उठाया कि शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र में मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा पिछले 15 वर्षों से बिना खनिज विभाग के अनुबंध के सीवीएम गैस का उत्पादन किया जा रहा है। यह गतिविधि न केवल नियम-कायदों का उल्लंघन है, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदाय के अधिकारों का भी हनन करती है। पत्रकार ने पूछा, “इसे विकास की कौन सी धारा में देखा जाना चाहिए?”
इस सवाल पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और विषय को टालते हुए अन्य उपलब्धियों की चर्चा शुरू कर दी। उनकी यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब मोदी सरकार पारदर्शिता और सुशासन के दावे करती रही है। पत्रकार वार्ता भाजपा के मुख्यालय में की गई उसे वक्त भारतीय जनता पार्टी के लगभग जिले के सभी प्रमुख पदाधिकारी व कार्यकर्ता पत्रकार वार्ता में उपस्थित रहे।
स्मरणीय है की शहडोल, मध्य प्रदेश का भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची में अनुसूचित एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जो प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यहां कोयला और गैस जैसे खनिज संसाधनों का दोहन लंबे समय से विवादों में रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज पर आरोप है कि उसने खनिज विभाग से उचित विधिक अनुबंध अनुमति के बिना गैस उत्पादन 2009 में शुरू किया, जिससे न केवल अनुबंध की स्टांप ड्यूटी चुकता नहीं किए जाने के कारण करीब 1000 करोड रुपए का सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा, वैधानिक अनुबंध नहीं होने से होने वाली किसी भी दुर्घटना के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के नियोक्ता की कोई जिम्मेदारी सुनिश्चित नहीं होती बल्कि आउटसोर्सिंग से जुड़े ठेकेदार व कर्मचारी पर यह ठीका फोड़ दिया जाता. इस प्रकार के अव्वैधानिक तरीके से उद्योग किए जाने के कारण मनमानी जगह में मनमानी तरीके से गैस का उत्पादन तानाशाही पूर्ण तरीके से किया जाता है क्योंकि शासन के संरक्षण के कारण की मूक सहमति होने के कारण बल्कि स्थानीय पर्यावरण और आदिवासी समुदायों की आजीविका भी प्रभावित हुई।
जबकि पूर्व उद्योग मंत्री बाबूलाल गौर ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि जब रिलायंस अपना उत्पादन कार्य प्रारंभ करेगी तो 90% स्थानीय लोगों को रोजगार सुनिश्चित होगा उसके आंकड़े अब दूर के ढोल के सुहावना की तरह गायब हो गए हैंस्थानीय कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों का कहना है कि इस अवैध गैस उत्पादन से क्षेत्र में भूजल स्तर में कमी, मिट्टी की उर्वरता में ह्रास और प्रदूषण की समस्याएं बढ़ी हैं। इसके बावजूद, न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई की है।
पत्रकार वार्ता का माहौल
पत्रकार वार्ता में मंत्री ने मोदी सरकार की उपलब्धियों, जैसे बुनियादी ढांचे के विकास, स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत योजना पर विस्तार से बात की। उन्होंने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने आर्थिक सुधार, विदेशी निवेश और गरीब कल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है।पिछले 11 वर्षों में भारत ने आर्थिक सुधार, विदेशी निवेश और गरीब कल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। हालांकि, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज के अवैध गैस उत्पादन का सवाल उठा, तो वार्ता का माहौल तनावपूर्ण हो गया। पत्रकारों ने इस मुद्दे पर बार-बार जवाब मांगा, लेकिन मंत्री ने असहजता दिखाते हुए कहा, “यह एक जटिल मामला है, जिसकी जांच की जा रही है। हमारी सरकार पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है।” इसके बाद, उन्होंने अन्य सवालों की ओर ध्यान मोड़ दिया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय आदिवासी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंत्री की चुप्पी की निंदा की है। आदिवासी अधिकार मंच के एक कार्यकर्ता रामलाल गोंड ने कहा, “यह क्षेत्र हमारी आजीविका का आधार है। रिलायंस जैसी कंपनियां हमारे संसाधनों का दोहन कर रही हैं, और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। मंत्री का जवाब न देना उनकी संलिप्तता को दर्शाता है।”
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जब कहा, “भाजपा सरकार कॉरपोरेट हितों की रक्षा कर रही है, जबकि आदिवासी समुदाय के अधिकारों को कुचला जा रहा है। हम इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं।”
निष्कर्ष
मंत्री दिलीप जायसवाल की पत्रकार वार्ता, जो मूल रूप से मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाने के लिए थी, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अवैध गैस उत्पादन के सवाल ने चर्चा का रुख बदल दिया। उनकी चुप्पी और सवाल को टालने की कोशिश ने सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। यह मामला न केवल शहडोल के आदिवासी समुदाय के लिए, बल्कि पूरे आदिवासी बहुल क्षेत्रमें खनिज संसाधनों के प्रबंधन और कॉरपोरेट जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।आगे की कार्रवाई में सरकार और खनिज विभाग की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी हैं। क्या इस मामले की जांच होगी, या यह सवाल एक बार फिर अनुत्तरित रह जाएगा, यह समय बताएगा…….।

