“प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्” जंतर-मंतर में मिली अभिव्यक्ति की आजादी -2 (त्रिलोकीनाथ)

“प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्” जंतर-मंतर में मिली अभिव्यक्ति की आजादी -2
क्योंकि तब तक नीट पेपर लीक के मामले में 21 बच्चे आत्महत्या कर चुके थे। कॉर्पोरेट पॉलिटिकल इंडस्ट्री इस ए बैलेंस करने के लिए बहुत सर्कस की किंतु दिल्ली के जंतर मंतर में इस धार देने का काम बिना अपराध के 3 महीने जेल काट चुके पर्यावरण विद् और शिक्षक सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन की घोषणा कर उफान में पहुंचा दिया। सरकार लगातार अनदेखी करती रही करीब 20 दिन के बाद 20 जुलाई तारीख को संसद सत्र दिल्ली में प्रारंभ होने के दिन ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा नहीं होने पर जंतर मंतर से संसद भवन पर संसद मार्च की घोषणा की गई जिससे घबराकर भाजपा सरकार ने 19 जुलाई की सुबह सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से जैसे अपहरण करते हुए उनके स्वास्थ्य के बहाने और हाई कोर्ट के आदेश का आड़ लेकर लड़कों के बीच से धोखा देते हुए उठा लिया गया और सफदरजंग अस्पताल में एक अघोषित जेल बनाकर का युवा किसी भी कीमत में जो दिल्ली पहुंच रहा था
संसद मार्च पहुंचना चालू किया और पहुंच गया उनके अघोषित जेल को दरकिनार कर लोगों ने लक्ष्य संसद भवन को बनाकर पहुंचना चालू किया उसे भीड़ जो की जंतर मंतर की लाखों की भीड़ नहीं थी उसे भीड़ में पत्र भी तत्वों को हाथ में पत्थर पहुंचने देकर पुलिस पर हमले करवाए गए और फिर इस बहाने पुलिस ने संसद के आसपास पहुंचे तमाम छात्रों और बच्चों को भी आंसू गैस,वैलट इन, और लाठी चार्ज कर खून की होली खेली हिंसा का नंगा नाच संसद भवन के बाहर आसपास होता रहा शायद इस दमन से छात्र आंदोलन खत्म हो जाए किंतु परिणाम और खतरनाक बन गए युवा चेतना ने इसे गांधीवादी तरीके से विस्तार दे दिया नेतृत्व विहीन आंदोलन का मोर्चा युवा नेतृत्व अभिजीत दीप के और उसके सहयोगियों ने संभाल लिया जंतर मंतर का आंदोलन जारी रहा और भारी होता गया। किंतु अराजकता फैल जाए सरकार अपने दमन चक्र में सफल हो जाए इस आशा और निराशा के बीच में 21 तारीख को 56 साल का युवा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में वायु वृद्ध नेताकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन में उनके घर में इकट्ठा हुए और बिना किसी सूचना के प्रधानमंत्री के घर में द्वारा में जाकर एक अलग धरना आंदोलन की घोषणा कर दी राहुल गांधी का खून भी वहां निकला चोट लगने से नाक के पास यह घटना घटी पूरा विपक्ष राहुल गांधी के इस कदम में साथ आ खड़ा हुआ से जंतर मंतर के तमाम मुद्दे जिसे कॉर्पोरेट पॉलीटिकल सिस्टम और सरकार अपनी षड्यंत्र कारी कुचक्र से खत्म कर देना चाहती थी
छात्र आंदोलन का पूरा मुद्दा राजनीति के केंद्र में आ गया नेताओं की गिरफ्तारी हुई अंततः धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसका बड़ा चेहरा बनकर सामने आया उनकी अन्य मांगे छात्रों पर लगाए गए अपराधिक प्रकरण खत्म होंगे नीट परीक्षा में आत्महत्या किए गए हर बच्चे के परिवार को एक करोड रुपए राहत राशि दी जाएगी और अन्य चीज सर्वांगीण शिक्षा सुधार आदि आदि घटनाओं की शुरुआत होगी सरकार ने इसे माना सबसे बड़ी बात कह रही की जो सरकार आंदोलन को हाईजैक करके खत्म करना चाहती थी उसे आंदोलनकारी की शर्त में वार्ता के लिए सरकार के पास नहीं बल्कि कांस्टीट्यूशन क्लब नई दिल्ली भवन में बैठकर निर्णय लेना पड़ा वहीं प्रेस वार्ता में इस छात्र आंदोलन के समापन की घोषणा भी हुई।
इस छात्र आंदोलन में जो विचार पैदा हुए उसे 56 साल के युवा चेहरा राहुल गांधी ने अभी खत्म करने से मना कर दिया और नाबालिक बच्चों के ऊपर जो हिंसात्मक कार्यवाही हुई अपमानजनक और अश्लील हरकत किए जाने की जिम्मेदारी गृहमंत्री अमित शाह के ऊपर जिम्मेदारी ठहराते हुए कार्यवाही की बात कही है अब यह अभिव्यक्ति को एक नए आयाम में पहुंचने की राजनीति की शुरुआत भी हो गई है देखना होगा कि देश मैं अभिव्यक्ति की आजादी का यह नया आंदोलन देश के लोकतंत्र को कितना मजबूत करता है। फिलहाल पूरे देश और दुनिया में यह देखा कि जब बच्चे उड़ जाते हैं “मैय्या मैं तो चंद्र खिलौना लैय्यहों, तो उसे भारतीय युवा चेतना ले लेती है। इसे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक ने इस महत्वपूर्ण शब्द विश्लेषण से किया की दुनिया झुकती है उसे झुकाने वाला चाहिए। आजादी के इस नए पर्व पर आप सबको बहुत-बहुत बधाई
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