“जंतर-मंतर” शहर के भीतर क्यों बनाया जाए?: उच्च न्यायालय / स्कूली छात्रों के खतरनाक तरीके से बेतवा नदी पार करने की मीडिया रिपोर्ट संज्ञान लिय//

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तो पूरे शहर को बधंक क्यों बनाया जाए?: उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली: सात अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन और धरनों के लिए निर्धारित स्थल बनाए रखने पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर राजधानी के बीचों-बीच होने वाले प्रदर्शनों के कारण पूरे शहर को ‘‘बंधक’’ क्यों बनाया जाए?सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा, ‘‘मेरे अनुसार, ऐसी चीजें शहर के भीतर नहीं होनी चाहिए। लेकिन यह सरकार का फैसला है। बेवजह पूरे शहर को बंधक क्यों बनाया जाए?’’

विदिशा में स्कूली छात्रों के खतरनाक तरीके से बेतवा नदी पार करने की मीडिया रिपोर्ट संज्ञान लिया

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के काकरौआ गांव के स्कूली बच्चों द्वारा जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी के स्टॉप डैम के खंभों को फांद कर स्कूल जाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है।  यह खतरनाक रास्ता इसलिए अपनाते हैं क्योंकि इससे सड़क मार्ग से 13 किलोमीटर की दूरी घटकर मात्र 1.5 किलोमीटर रह जाती है। खबरों के अनुसार, गांव के नौ विद्यार्थी प्रतिदिन इसी तरह नदी पार करते हैं, जिनमें पांच छात्राएं शामिल हैं।आयोग ने कहा है कि यदि यह जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला बनता है। आयोग ने यह भी कहा है कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 21ए 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को राज्य द्वारा निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की गारंटी देता है। बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 भी 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने अविनाश मेहरोत्रा ​​बनाम भारत संघ (2009) मामले में यह माना है कि शिक्षा के अधिकार में सुरक्षित विद्यालय और सुरक्षित बुनियादी ढांचे का अधिकार भी अनिवार्य रूप से शामिल है7 AUG PIB Delhi

नीट आरोपपत्र: एनटीए विशेषज्ञ की सोसाइटी के ‘एक्सेस कंट्रोल ऐप’, फोन रिकॉर्ड्स से खुली परतें

नयी दिल्ली: सात अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी 2026) प्रश्नपत्र लीक मामले में डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों पर आधारित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र में पुणे की उस आवासीय सोसाइटी के ‘एक्सेस कंट्रोल ऐप’ का रिकॉर्ड भी शामिल किया गया है, जहां राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के रसायन विज्ञान विशेषज्ञ एवं आरोपी पी. वी. कुलकर्णी रहते थे।अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने 28 जुलाई को यहां विशेष अदालत में 13 आरोपियों के विरुद्ध दाखिल आरोपपत्र में कुलकर्णी की सोसाइटी के ‘एक्सेस कंट्रोल ऐप’ से प्राप्त अभिलेखों का उल्लेख किया है। इनमें उन विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक विवरण भी शामिल हैं, जो कुलकर्णी द्वारा संचालित विशेष कोचिंग कक्षाओं में आते थे।


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