
शहडोल।
जब भारत की राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी अपना अस्तित्व तलाशने के लिए यमुना के जल प्रदूषण को मुद्दा बना कर चुनाव जीती है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपना पहला काम यमुना नदी में जाकर आरती करती हैं। संयोग बस तब इस समय लगभग शहडोल मध्यप्रदेश में जल स्रोतों को विनाश करने की परियोजनाओं का बढ़ावा मिल रहा होता। दोनों ही चीज में अच्छा यह है कि जल स्रोत सामाजिक जागरूकता का मुद्दा बनता है।किंतु जिस भाजपा दिल्ली में जल संरक्षण को चुनाव जीतने का आधार बनाया जाता है इस जल संरक्षण के जल स्रोत को भारतीय जनता पार्टी अपनी ताकत से शहडोल में नष्ट करने का और भू माफिया को बढ़ावा देने के लिए काम करती दिखाई देती है। यही बीजेपी का पारदर्शी दोमुंहा चेहरा है..? -( त्रिलोकी नाथ )
किरण टॉकीज के पास जल स्रोत जागरूकता पर हुआ बड़ी आम सभा ऐसा नहीं है कि भाजपा संरक्षण में शहडोल नगर में पहली बार हो रहा हो किरण टॉकीज के बगल में पुराने जल स्रोत चाहे उसका निर्माण किसी ने भी किया रहा हो वह सार्वजनिक जीवन का हिस्सा था। उस जल स्रोत की वजह से आसपास के जल स्तर को प्रबंधन में ताकत मिलती थी साथ ही आसपास की भूमि भी सार्वजनिक उपयोग की भूमि के रूप में पहचानी जाती रही। हो सकता है कि वह किसी व्यक्ति विशेष की भूमि रही हो यह जांच का विषय हो सकता है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि वहां पर एक जल स्रोत था और आज से 90-100 साल पहले उसको बकायतें सीढ़ियों के द्वारा प्रबंध किया गया था। जो सार्वजनिक उपयोग के सेवा में समर्पित था. इस पर बकायदे जब विवाद आया भी तो अन्य अन्य न्यायालय और संस्थाओं ने इस पर रोक लगाने की कार्यवाही की जो रीवा राज नियम के अधीन होने के साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अनुरूप ही रहा।
क्या इसलिए की चोर-चोर मौसेरे भाई सत्ता में साझेदार हैं.. अब तो करीब 20 वर्ष से मुक्ति के बाद कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष शहडोल में सुशोभित है इसके बावजूद भी यदि इस तालाब/जल स्रोत को सत्ता की ताकत से स्थानीय नगर विकास संस्था नगर पालिका परिषद नहीं बचा रही है अपनी ताकत का इस्तेमाल करके इसे सुरक्षित नहीं कर रही है जनता को जन आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है
तो इसका साफ मतलब है कि कांग्रेस के लोग भी इस जल स्रोत को वह माफियाओं के साथ मिलकर नष्ट कर रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि जल स्रोत के ठीक सामने नगर पालिका परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष कुलदीप निगम का निवास है और उनसे बेहतर इस जल स्रोत की जानकारी किसी अन्य को नहीं हो सकती। चाहे वह निजी भूमिका मुद्दा ही क्यों ना हो हर चीज पर उन्हें पारदर्शी तरीके से निर्भय होकर अपनी भूमिका को प्रकट क्यों नहीं करना चाहिए। क्या कारण है कि समाजवादी नेता धर्मेंद्र श्रीवास्तव इसके लिए आवाज उठा रहे हैं और कुलदीप निगम इस पर चुपचाप हैं। जो एक पावरफुल कांग्रेसी नेता भी हैं और कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल इस समय सत्ता पर है तो क्या यह मान कर चला जाए की नगर पालिका के अंदर जो माफिया गिरी जल स्रोतों को नष्ट करने के लिए अलग-अलग तरीके से तालाबों को बाउंड्री बाल के नाम पर उसे लगी सरकारी भूमि को सीमित करने के लिए जो प्रयोग हो रहे हैं इस प्रयोग में माफिया गिरी के हवाले इस जल स्रोत की भी हत्या में कांग्रेस नेता अपनी अप्रत्यक्ष रूप से साथ दे रहे हैं।
रही बात नगर पालिका में विकास नामक निर्माण की प्रक्रिया को लेकर जब भी बातें अच्छी जा रहे हैं तो पाया यह जा रहा है की कहीं-कभी नक्शा बनवा लीजिए और मनमानी अतिक्रमण करके निर्माण कार्य करते रहिए कोई देखने सुनने वाला नहीं है भ्रष्टाचार से इन करोड़ों रुपए खर्च करने वाले नगर पालिका पदाधिकारी को अपने वसूली करने से फुर्सत नहीं है कि वह नगर के हित में पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ सही सोच सके।
इसकी एक उदाहरण के रूप में गुरुनानक चौक से कमिश्नर बांग्ला के सड़क मार्ग में नंगे नाच के रूप में देखा जा सकता है जो सरे आम डेवलपमेंट एरिया के सड़क के निर्धारित पैमाने को लात मारकर अतिक्रमणकारियों मनमानी निर्माण कर रहे हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि पार्षदों और नेताओं को चांदी का जूता मारो और चुपचाप काम करते रहो। भ्रष्टाचार की ताकत इन नेताओं के इसका एक प्रभाव राजेंद्र टॉकीज के पीछे बनने वाले स्टेट बैंक के लिए बना रहे एक बड़े भवन में भी मिनांशु मस्ता के द्वारा देखा जा रहा है जो सरेआम गलत खरे नंबर पर नक्शा पास कर कर मनमानी तरीके से सड़क पर अतिक्रमण करके नक्शा के विरुद्ध धड़ाधड़ निर्माण कर रहा है क्योंकि मस्ता मालूम है कि अगर व्यवस्थापन की जमीन पर साइन मंदिर के सामने अवैध रूप से निर्माण कार्य हो सकता है उसे जमीन को कलेक्टर की अनुमति की जरूरत भी नहीं है तो वह स्टेट बैंक के लिए अवैध निर्माण कैसे नहीं कर सकता यही कारण है उसे भी मालूम है कि प्रतिनिधियों की औकात चंद भ्रष्टाचार के पैसे में बिक जाती है।
इसलिए कानून यहां काम करना बंद कर देता है और मनमानी तरीके से निर्माण कार्य होते रहते हैं । राजेंद्र टॉकीज के पीछे हो रहे इस अवैध निर्माण तथाकथित स्टेट बैंक के लिए निर्माण होने वाले अवैध भवन निर्माण में उनके अधिकारियों की भी मिला भगत भ्रष्टाचार की ताकत को बढ़ावा देती है।
हालांकि अमिता चपरा जो जिला भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष हैं और भाजपा केराष्ट्रीय अध्यक्ष वह केंद्रीय मंत्री नड्डा के काफी निकट है जैसा कि उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नड्डा के दोनों महिलाओं के जबलपुर की मित्रता के मैत्रीपूर्ण संबंध के साथ उनके फोटो आ रहे हैं स्वाभाविक रूप से मध्य प्रदेश प्रशासन में उनका दबदबा बरकरार है और उनके खिलाफ प्रशासन समान रूप से नहीं जा सकता इसलिए श्रीमती चपरा से जब संपर्क साध उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया वह उन्होंने फोन नहीं उठाया। क्योंकि पूर्व छात्र नेता व समाजवादी नेता धर्मेंद्र श्रीवास्तव का आरोप है कि उनके दबदबा के कारण ही उनके लोगों द्वारा बावड़ी को नष्ट कर सरकारी जमीन पर कब्जा करने का काम किया गया है यह अलग बात है कि अलग-अलग न्यायालय ने
इस पर रोक लगा रखा है देखते हैं कि प्रशासन कितनी पारदर्शिता से जल संग्रहण के मामले में अपनी भूमिका अदा कर पता है या नहीं..?
इन सबसे स्पष्ट होता है कि अगर आप सत्ता में है तो चाहे कांग्रेस में हों या भाजपा में आप एक ही भ्रष्टाचार प्रजाति के उत्पाद हैं। और भ्रष्टाचार के जरिए इन्हें अलग-अलग तरीके से उनकी औकात के हिसाब से खरीद कर आप अपनी माफिया गिरी को अंजाम दे सकते हैं। क्योंकि सब पारदर्शी तरीके से होता रहता है किरण टॉकीज के पास का तालाब जल स्रोत का विनाश और उसकी भूमि पर कब्जा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बन गया है। यह बड़ी बात है कि शहडोल की जनता अपनी जागरूकता से जल मुद्दों पर शहडोल को एक दिशा देती दिख रही है। शायद प्रशासन अपनी लंबी नींद से और कायर प्रशासनिक प्रणाली से मुक्त होकर चुस्ती के साथ नगर के तमाम अवैध निर्माणों पर तथा अतिक्रमण पर कोई पारदर्शी पुरुषार्थ भरा कदम उठाए जो शहडोल नगर के लिए एक अच्छा कदम कहा जाएगा किंतु शहडोल के नागरिकों की भी है जिम्मेदारी है कि वह अपने आसपास के विरासत में प्राप्त जल स्रोतों के लिए हमेशा सतर्क रहें अगर वह इसे बचा पाते हैं तो वह एक सपूत नागरिक है अन्यथा गद्दार और कपूत नागरिक होने का कलंक उनके जीवन में लगना तय है जब आने वाली पीढ़ियां यह उनसे पूछेंगे की तब आप क्या कर रहे थे जब विरासत के तालाबों और जल स्रोतों को लुटेरे शासन और प्रशासन के संरक्षण में माफिया लूट रहा था…?

