झारखंड के अधिवक्ताओं को ₹14,000पेंशन/-मध्यप्रदेश में स्थिति चिंताजनक:संदीप तिवारी

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मध्य प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए कल्याणकारी योजनाए: एक ज़रूरी विमर्शझारखंड राज्य अधिवक्ता परिषद और राज्य सरकार ने अधिवक्ताओं के हित में एक सराहनीय पहल की है, झारखंड में 65 वर्ष से अधिक उम्र के अधिवक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा ₹7000 देने की घोषणा की अधिवक्ता कल्याण कोष से पूर्व से ही₹7000, की सहायता मिल रही है,यानी कुल ₹14,000 यह उन वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए बड़ी राहत है, जो लंबे समय तक न्यायिक सेवा में योगदान देने के बाद वृद्धावस्था में आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।वहीं, मध्य प्रदेश में अधिवक्ताओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, राज्य सरकार और राज्य अधिवक्ता परिषद इस दिशा में ठोस कदम उठाने में विफल रही हैं,झारखंड जैसी अपेक्षाकृत छोटी परिषद और राज्य सरकार जब अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए इतना कुछ कर सकती हैं, तो मध्य प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?

मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना की आवश्यकतामध्य प्रदेश में हजारों अधिवक्ता ऐसे हैं, जो 65 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं और अब नियमित प्रैक्टिस करने में असमर्थ हैं,कई वरिष्ठ अधिवक्ता वृद्धावस्था में आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार या अधिवक्ता परिषद ने इस दिशा में कोई ठोस योजना नहीं बनाई है।अन्य राज्यों में अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजनाए लागू की जा रही हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में इस तरह की कोई पहल अब तक नहीं की गई है, यह न केवल वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ अन्याय है, बल्कि न्यायिक सेवा में दिए गए उनके दशकों के योगदान की अवहेलना भी है, राज्य अधिवक्ता परिषद और सरकार को झारखंड की तर्ज पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए एक स्थायी पेंशन योजना लागू करनी चाहिए।

नवोदित अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता क्यों ज़रूरी है?वकील बनने के शुरुआती वर्षों में अधिवक्ताओं को कई आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, स्थायी क्लाइंट बेस बनने में समय लगता है, और न्यायालयीन कार्यवाही की जटिलताओं के कारण नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से टिके रहना कठिन हो जाता है, कई राज्यों में इस स्थिति को देखते हुए नई अधिवक्ताओं के लिए सहयोग निधि योजना चलाई जा रही है।
उदाहरण के लिए, तमिलनाडु सरकार नवोदित अधिवक्ताओं को उनके करियर के शुरुआती वर्षों में वित्तीय सहायता देती है, इसी प्रकार, अन्य राज्यों में भी अधिवक्ता कल्याण कोष से वित्तीय मदद दी जाती है, मध्य प्रदेश में भी यह योजना लागू होनी चाहिए ताकि नए अधिवक्ताओं को न्यायिक सेवा में मजबूती से खड़े होने का अवसर मिल सके।

मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद और सरकार की उदासीनतामध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद को वकीलों के अधिकारों और कल्याण के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि परिषद और सरकार, दोनों ही इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रहे हैं, झारखंड जैसे छोटे राज्य में अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए योजनाए लागू हो सकती हैं, तो मध्य प्रदेश में क्यों नहीं?

अधिवक्ताओं के लिए ये मागें आवश्यक हैं:

1. वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना: झारखंड की तर्ज पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के अधिवक्ताओं को प्रतिमाह ₹14,000 की सहायता दी जाए।

2. नए अधिवक्ताओं के लिए सहयोग निधि: नवोदित अधिवक्ताओं को करियर के शुरुआती 5 वर्षों तक प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाए

3. कल्याण कोष का सही उपयोग: अधिवक्ता कल्याण कोष में मौजूद धनराशि को अधिवक्ताओं की वास्तविक ज़रूरतों के लिए खर्च किया जाए

4. स्वास्थ्य बीमा योजना: अधिवक्ताओं और उनके परिवार के लिए राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जाए

5. आवासीय योजनाए: अधिवक्ताओं के लिए सस्ती दरों पर आवासीय योजनाए चलाई जाए
मध्य प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं की तत्काल आवश्यकता है, राज्य सरकार और अधिवक्ता परिषद को झारखंड से प्रेरणा लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।

संदीप तिवारी एड.
शहडोल


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