
तथाकथित 144 साल के महाकुंभ में सबसे ज्यादा आम नागरिक परेशान हुआ क्योंकि प्रशासन ने तमाम रूपाए घंटा वीवीआईपी पंजीवादी व्यक्तियों के लिए आरक्षण कर दिया था और सबसे दुखद अंत इस रूप में आया कि केंद्रीय प्रदुषण विभाग ने जिस गंगा में लोगों ने स्नान किया किया है डुबकी लगाई है वह दअरसल वाह अति प्रदुषित मल-जल का पानी था.. तो क्या हिंदुओं की राम राज्य की तथाकथित सरकार ने गंगा स्नान के नाम पर आम नागरिकों को बीमारी परोसी है…? इसका भी एक अध्ययन क्यों नहीं होना चाहिए कि कितने लोग वहां से लौटने के खराब बीमार पड़े हैं.. अगर यह अध्ययन हो जाता है कि 63 करोड़ लोग वहां पर हैं स्नान किए हैं तो क्या 63 करोड़ लोग वास्तव में बीमार पड़े हैं.. इसकी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए…? सरकार ने इस घटना के खराब गंगा नमामि गंगे योजना में जो पैसा खर्च किया है उसे भी देख लीजिए
नमामि गंगे कार्यक्रम’ एक एकीकृत संरक्षण मिशन है। इसे जून 2014 में 20,000 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ केंद्र सरकार के ‘महत्वाकांक्षी कार्यक्रम’ के रूप में अनुमोदित किया गया था। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण में प्रभावी कमी और संरक्षण के दोहरे उद्देश्यों को पूरा करना हैभारत सरकार (जीओआई) ने गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण के लिए 2014-15 में 20,000 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ नमामि गंगे कार्यक्रम (एनजीपी) शुरू किया था जिसकी अवधि पांच वर्षों के लिए मार्च 2021 तक थी। इस कार्यक्रम को 22,500 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है।गंगा नदी बेसिन भारत में सबसे बड़ा है, जो देश के 27 प्रतिशत भूभाग में फैला हुआ है और इसकी लगभग 47 प्रतिशत आबादी का भरण-पोषण करता है। 11 राज्यों में फैले इस बेसिन में भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा शामिल है। इस बेसिन के अधिकांश भाग, लगभग 65.57 प्रतिशत, में कृषि कार्य किया जाता है, जबकि 3.47 प्रतिशत क्षेत्र में जल निकाय हैं। वर्षा के संदर्भ में कुल बारिश का 35.5 प्रतिशत प्राप्त करने के बावजूद, गंगा नदी बेसिन भारत में साबरमती बेसिन के बाद दूसरा सबसे अधिक पानी की कमी वाला बेसिन है, जिसमें प्रमुख भारतीय नदी बेसिनों में औसत प्रति व्यक्ति वार्षिक वर्षा जल का केवल 39 प्रतिशत है।
प्रगति अवलोकन (31 जनवरी 2025 तक)
- 40121.48 करोड़ रुपये मूल्य की कुल 492 परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
- इनमें से 307 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और अब चालू हैं।
- सीवेज अवसंरचना से संबंधित 206 प्रभावशाली परियोजनाएं प्रारंभ की गई हैं।
- इन सीवेज अवसंरचना परियोजनाओं के लिए 33003.63 करोड़ रुपये की पर्याप्त धनराशि स्वीकृत की गई है।
- इनमें से 127 सीवरेज परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं, जो प्रदूषण कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
- इसके अलावा, जैव विविधता और वनरोपण को समर्पित 56 परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
- इन परियोजनाओं को 905.62 करोड़ रुपये से अधिक की वित्त पोषण प्रतिबद्धता प्राप्त हुई है।
- उल्लेखनीय रूप से, जैव विविधता और वनीकरण पर केन्द्रित 39 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं, जिससे गंगा बेसिन के पारिस्थितिक संतुलन में वृद्धि हुई है।

