
“प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्” जंतर-मंतर में मिली अभिव्यक्ति की आजादी -१
डर जरूरी है, यह बात भाजपा के बागी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था ( जब एनडीटीवी ग्रुप पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने छापा मारा था क्योंकि वहां की पत्रकारिता उनकी उंगली के इशारे के हिसाब गुलामी नहीं कर रही थी बाद में गुलामी का सपना देखने वाले पूंजीपति गौतम अडानी ने इस ग्रुप को खरीद लिया।) यह बात तब व्यंग्य में कही गई थी, तब के बाद भारत में वैचारिक गुलामी की खुली घोषणा अघोषित तौर पर हो गई थी, इसके पहले देश में “नई आजादी”शब्द नकाब पहनकर एक छिछोरी फिल्म कलाकार कंगना रनौत को उसके छिछोरेपन के लिए पद्मश्री दिया गया, सांसद भी बना दिया गया और बाद में उसे एक महिला जवान में झापड़ भी मारा उसकी छिछोरेपन के लिए, वास्तव में वह झापड़ भाजपा सरकार और सत्ता में बैठे हुए अघोषित इमरजेंसी लागू करने वाले कॉरपोरेट एजेंट नरेंद्र मोदी सरकार के लिए था तब सरकार को चेत जाना चाहिए था…. भारत की धरती में गुलामी जब हजार वर्ष बाद भी जिंदा हो जाती है तो लोकतंत्र में आर्थिक साम्राज्यवाद की गुलामी की सफलता असंभव है किंतु मद-मस्त सरकार चाणक्य के कार्यकाल में शोषण और दामन पर विश्वास करने वाले राजा नंद की तरह व्यवहार करती रही….।
(त्रिलोकीनाथ)
हजारों साल पहले चाणक्य ने स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है इसको सिद्ध किया था बाद में 19वीं और 20वीं सदी मे महात्मा गांधी और गोपाल कृष्ण गोखले के नेतृत्व में यह शब्द भारत में फिर स्थापित हुआ किंतु आजादी के दौर में पूरी बेशर्मी के साथ अंग्रेजों का साथ देने वाली विचारधारा के संगठन ने स्वतंत्रता को नकारती रही। आध्यात्मिक भावना अमृत सिर्फ परिपूर्ण भारत की भाव आध्यात्मिक भावना को ही उसकी कमजोरी हथियार बनाकर देश की सत्ता में कब्जा करने वाली विचारधारा कॉरपोरेट माफिया के साथ मिलकर देश में आर्थिक व वैचारिक गुलामी का जो कुचक्र चलाया वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूर्ण होने पर खत्म हो गया। “डर जरूरी है..उस वक्त प्रमाणित हो गया जब युवा चेतना जागृत हुई और 25 जुलाई 2026 को देश की आजादी 15 अगस्त के 20 दिन पहले अभिव्यक्ति की आजादी के लिए कलंक बन चुके “धर्मेंद्र प्रधान”शब्द को सत्ता की खनक से अपमानित करते हुए बाहर फेंक दिया… घमंडी कॉरपोरेट की प्रधान नरेंद्र मोदी सरकार को किसी अनिश्चय की आशंका में अपने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवा चेतना को सौंपना पड़ा।
देश के दिल दिल्ली में लोकतंत्र के केंद्र जंतर मंतर में इस जादू को युवा चेतना छात्र आंदोलन के रूप में “मैय्या मैं तो चंद्र खिलौना लैय्यहूं”के तर्ज में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा खिलौने की तरह ले लिया… और इस खिलौने को दिलाने में राहुल गांधी जिस पर वर्तमान संसद सत्र में संसद के नेता नरेंद्र मोदी ने यह कह तंज कसा की “56 साल के युवा…”वह वास्तव में राजनीतिक क्षेत्र में नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद युवाओं के लिए उनकी भाषा में समर्पित होते हुए प्रधानमंत्री के घर के सामने जिस प्रकार से जमीनी धरना प्रदर्शन को अंजाम दिया इस घटना ने छात्र आंदोलन को एक मुकाम में पहुंचा दिया क्योंकि पूरा विपक्ष उनके इस नेतृत्व पर उसीप्रकार से स्वीकार किया जिस प्रकार भारतीय राजनीति ने जंतर मंतर के छात्र आंदोलन के नेतृत्व को स्वीकार किया था।
25 जुलाई को पूरा देश और दुनिया विश्व की सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की अभिव्यक्ति की आजादी पर जश्न मना रहा था क्योंकि गुलामी का कलंक बन चुका “धर्मेंद्र प्रधान” शब्द सत्ता से धकिया दिया गया था… अब डैमेज कंट्रोल चलता रहेगा वह राजनीति है.
क्रमशः देखे तो “कॉकरोच जनता पार्टी” का जन्म में सिस्टम को और देश की स़वैधानिक व्यवस्था को कुतर रही कॉर्पोरेट पॉलीटिकल सिस्टम से त्रस्त हो चुके आम जनमानस खासतौर से युवा वर्ग में बेकारी बेरोजगारी महंगाई गरीबी को तुष्टिकरण कर कर देश को स्वस्थ नागरिक अधिकार के खिलाफ चल रहे दमन चक्र के दौर में मदमस्त देश के अंतिम आशा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा ने अपने पद में रहते हुए ऐसे युवाओं के खिलाफ जब उन्हें कॉकरोच परजीवी बताया और जब यह कॉकरोच शब्द प्रचारित हुआ की किस प्रकार से कोई भी कहीं भी बैठकर गाली दे रहा है..पूरी देश और दुनिया में भारतीय युवा में करंट की तरफ फैल गया विदेश में बैठा हुआ एक युवा अभिजीत दीपक ने सोशल मीडिया हैंडल में एक “कॉकरोच जनता पार्टी” मंच का गठन किया और उसके गठन के साथ ही संपूर्ण युवा का करंट उससे कनेक्ट हो गया ..
वह रातों-रात भाजपा की तथाकथित करोड़ की सदस्य संख्या को किक करते हुए गति में तेजी से आगे बढ़कर उसके फॉलोअर बन गए और वह इतना शक्तिशाली हो गया कि कॉर्पोरेट पॉलीटिकल सिस्टम इस “कॉकरोच जनता पार्टी” से भयभीत हो गई सबसे पहले दमन उसने सोशल मीडिया से उसे खत्म करने का निर्णय लिया. वह फिर जिंदा हुआ उसी ताकत के साथ और भारत आकर उसने भारत में परीक्षा मामलों में अक्सर पेपर लीक कर उसके जरिए करोड़ों रुपए के कारोबार करने वाले माफिया सिस्टम को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने पर आ गया. क्योंकि तब तक नीट पेपर लीक के मामले में 21 बच्चे आत्महत्या कर चुके थे। कॉर्पोरेट पॉलिटिकल इंडस्ट्री इस बैलेंस करने के लिए बहुत सर्कस की किंतु दिल्ली के जंतर मंतर में इस धार देने का काम बिना अपराध के 3 महीने जेल काट चुके पर्यावरण विद् और शिक्षक सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन की घोषणा कर उफान में पहुंचा दिया। (जारी -२)

